मोटी तनख्वाह की नौकरी छोड़ अपने स्टार्टअप से भारतीय अध्यात्मवाद का परिचय दुनिया से करा रही है यह लड़की

विश्व पटल पर भारत की पहचान उसकी संस्कृति, अध्यात्म व ज्ञान के कारण है। भारत की इन गहरी जड़ों की गंभीरता को समझते हुए जब कुछ प्रश्न सौम्‍या वर्धन के सामने आए तो स्वयं उनके मन में बहुत से प्रश्न उठने लगे जिसका जवाब पाने के लिए एक MBA स्टूडेंट जो कार्यनीति सलाहकार बनना चाहती थीं, ने भारतीय विद्या भवन दिल्ली से एस्ट्रोलॉजी, आचार्य, न्यूमरोलॉजी, वास्तु इत्यादि भारतीय संस्कृति पर आधारित सभी पाठयक्रम रेगुलर किए और भारतीय अध्यात्मवाद के पीछे के वैज्ञानिक रहस्य को खोजा, समझा और जाना तो पाया कि भारतीय अध्‍यात्‍मवाद पंचतत्‍व से निर्मित इस नश्‍वर शरीर को सौरमंडल से समन्वित करने का सच्‍चा मार्ग दिखाता है।

“योग, आयुर्वेद, ध्यान, पूजा, कर्म इन सभी के सम्मिश्रण को यदि जीवन में नियमित और सही रुप से प्रयोग किया जाए तो भारतीय प्राचीन संस्कृति के महत्व को समझना बहुत आसान हो जाता है” बड़े आत्मविश्वास के साथ सौम्या यह बात कहती हैं जिन्होंने शुभ पूजा डॉट कॉम का स्टार्टअप शुरू किया जहां 300 से अधिक तरह की पूजा विश्वभर में कोई भी ऑनलाइन करवा सकता है। भारत में क्योंकि धार्मिक पूजा के लिए कोई मूल्य या स्‍तर निश्चित नहीं है, ना ही यह जानना जरूरी है कि पूजा करवाने वाले के पास क्या डिग्री है, ऐसे परिवेश में सौम्‍या वर्धन द्वारा शुरू किए गए स्टार्टअप शुभ पूजा डॉट कॉम पर स्नातक अथवा परास्नातक ब्राह्मणों द्वारा पूजा के विश्लेषण एवं महत्व को बता कर पूजा संपन्न करवाई जाती है।जिसका परिणाम यह है कि आज ऑनलाइन पूजा करवाने वाले परिवारों द्वारा उन्हें उस पूजा का जो फायदा मिलता है उसका फीडबैक भी पूजा डॉट कॉम पर वह सौम्या को बताते हैं क्योंकि सौम्या का मानना है कि पूजा की वर्ग विशेष का अधिकार नहीं श्रद्धा पर आधारित है।

शुभ पूजा डॉट कॉम की ऑनलाइन विधि प्राचीन भारत में शास्त्रों में वर्णित नैमिषारण्य में सूतजी द्वारा अपने शिष्‍यों को ध्‍वनि तरंगो द्वारा शिक्षा प्रदान करने जैसा है। सौम्‍या वर्धन को आधुनिक युग की सूत जी कहना गलत नहीं होगा जो विश्व भर में भारतीय संस्कृति और अध्यात्म का प्रचार अपने स्‍टार्ट अप के द्वारा कर रही हैं। 

अपने स्टार्टअप की शुरुआत में सौम्या को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा जैसे “यह तो ब्राह्मण ही नहीं है, यह इतनी छोटी उम्र में क्या पूजा करवाएगी” लेकिन सौम्या ने हर चुनौती को हरा दिया क्योंकि उन्होंने अपने काम में हमेशा पारदर्शिता रखी की “पूजा कीजिए तो मन से कीजिए वरना मत कीजिए” या “अगर जरूरत नहीं है तो जरूरी नहीं कि हर संपर्क करने वाले कंस्‍यूमर को कहा जाए कि तुम्हारे ग्रह खराब हैं”

सौम्‍या से यह पूछने पर कि आधुनिक पीढ़ी जो मशीनी परिवेश में पल रही है उनके लिए शुभ पूजा के अस्तित्‍व को आप भविष्‍य में कैसे बनाए रख पाएंगी इस पर जोरदार हंसी का ठहाका लगाते हुए सौम्‍या कहती हैं कि मुझे इसकी चिंता नहीं क्‍योंकि मैं आधुनिक पीढ़ी के सवालों क्‍यों और कैसे का जवाब प्रामाणिक तथ्‍यों के साथ दे पाने में सक्षम हूं। आज तनाव की बीमारी से वैश्विक समाज जिस तरह त्रस्‍त है उससे निकलने का एकमात्र रास्‍ता अध्‍यात्‍म एवं योग ही है जिससे आधुनिक पीढ़ी भी अछूती नहीं है। इसलिए मैं अपने व्‍यापार के भविष्‍य को लेकर एकदम निश्चिंत हूं।   

भारत भूमि पर जन्म होना ही बहुत बड़े सौभाग्य की बात है ऐसा मानना है सौम्या वर्धन का। भारत अभिन्‍नता में एकता को प्रदर्शित करने वाला ऐसा राष्ट्र है जिसने वसुधैवं कुटुंबकम का पाठ पूरे विश्व को पढ़ाया है। मुंबई में होने वाले विश्व स्तरीय कार्यक्रम में सौम्या भारत की संस्कृति की झलक एक लाइव परफॉर्मेंस के द्वारा वहां विद्यमान 5000 दर्शकों को देंगी जिसका सीधा प्रसारण 3 लाख से अधिक लोग देखेंगे। भारतीय सरकार के विज्ञान एवं तकनीकी विभाग से सम्‍मानित, न्‍यूयॉर्क में रेडियो पर प्रति वीरवार प्रसारित लाइव शो के अलावा टेलीविजन पर कई शोस के द्वारा सौम्‍या अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर चुकी हैं।

होली से संबंधित बड़ी ही प्यारी घटना के बारे में सौम्‍या ने बताया कि यूनाइटेड स्‍टेटस से आए एक परिवार के लिए भारत में उन्होंने होली के त्यौहार का महत्व बताते हुए एक वर्कशॉप का आयोजन किया जिसमें उन्हें भगवान कृष्ण के बारे में बताया कि कैसे कृष्ण भगवान की मां ने उन्हें कहा कि तू अपने काला होने पर दुखी मत हो जा कर अपने सभी सखाओं को रंग लगा दे फिर तो सब तेरे जैसे हो जाएंगे। वह परिवार होली के त्‍यौहार और इस कहानी से इतना प्रेरित हुआ कि सौम्‍या को अपने देश में होली का त्योहार आयोजित करने के लिए बुलाया क्योंकि उनका मानना था कि इससे उनके देश में रंगभेद को खत्म करने में सहायता मिलेगी। इस घटना से सौम्या का उत्साह कई गुना बढ़ गया। 

एक ऐसा स्‍टार्ट अप जो आय के साधन के साथ-साथ ज्ञान और सम्मान का स्रोत भी है, सिर्फ अपना ही नहीं अपने देश का भी यह तो सच में सोने पर सुहागा ही है।

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