सुविधाओं के अभाव में भी जज बनकर सफलता का परचम लहराने वाली ऑटो ड्राइवर की बेटी

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, देश की शान होती है बेटियां, माता-पिता का सम्मान है बेटियां, बेटियां किसी से कम नहीं होती, ऐसे अनेकों स्लोगन हमें सुनने और देखने को अक्सर मिल ही जाते हैं, जो बेटियों के प्रति प्रेम भावना को जागृत करते हैं। लेकिन जब परिवार की बेटी परिवार के साथ साथ देश का नाम भी रोशन करती है तो माता-पिता के लिए यह बड़े गौरवान्वित पल होते हैं। 

देहरादून की बेटी पूनम टोडी ने उत्तराखंड पीसीएस जूनियर की परीक्षा में टॉप किया है। पूनम के पिता एक ऑटो ड्राइवर है जो गर्व से फूले नहीं समाते, उनका कहना है कि हर घर में ऐसी बेटी का जन्म हो। 

न्यायिक सेवा सिविल जज जूनियर डिवीजन 2016 की परीक्षा में उत्तराखंड के सात और उत्तर प्रदेश के एक अभ्यर्थी ने सफलता प्राप्त की है, पूनम टोडी भी इन्हीं में से एक है।

असफलताओं ने सफल बनने के लिए प्रेरित किया 

अपनी पिछली दो असफलताओं से पूनम के हौसले तो पस्‍त हुए लेकिन इरादे कमजोर नहीं हुए। दोनों बार लिखित परीक्षा पास करके भी साक्षात्‍कार में असफल होने के बाद पूनम ने दिल्‍ली की कोचिंग क्‍लास में प्रवेश्‍ लेकर इस बार दुगनी मेहनत से परीक्षा की तैयारी की और सफल हो कर दिखाया। पूनम को पढ़ाई के लिए महंगी किताबों की जरूरत पड़ने पर उनके पिता जो ऑटो ड्राइवर हैं और मात्र 300 रुपए प्रतिदिन ही कमा पाते हैं उन्होंने कभी कोई कमी महसूस नहीं होने दी।

पूनम के माता-पिता ने कभी भी पूनम को नौकरी करने पर जोर नहीं दिया हमेशा उसे उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए ही प्रेरित किया इसी कारण पूनम मास्टर्स के साथ लॉ की डिग्री ले पाई। अपने परिवार में कभी बेटे और बेटी में फर्क नहीं करने पर अशोक टोडी को गर्व है। उन्होंने पूनम की शैक्षिक जरूरतों को पूरा करने के लिए अपनी जरूरतों को भी ताक पर रख दिया।

परिवार का प्‍यार ही रहा सफलता का आधार

अपने माता पिता और भाइयों का आभार व्यक्त करते हुए पूनम अपनी सफलता का सबसे बड़ा आधार अपने परिवार को और उसके प्यार को मानती हैं। डी ए वी कॉलेज देहरादून से मास्टर्स इन कॉमर्स की डिग्री प्राप्त करने के बाद पूनम को जज बनने की प्रेरणा इस पेशे से मिलने वाले सम्मान से मिली। 

पूनम के पिता अशोक टोडी चाहे अपने बच्चों को सुख सुविधाओं से भरपूर जीवन नहीं दे पाए लेकिन उनकी शिक्षा पर खर्च करके उनकी जड़ों को इतना मजबूत कर दिया कि 4 सालों से जज बनने की तैयारी कर रही बेटी ने इस सपने को पूरा करके उनके जीवन की हर कमी को दूर कर दिया।

बेटे और बेटी की समानता ही है बेटी के प्रति सच्‍चा प्‍यार

पूनम हर माता-पिता को यही संदेश देना चाहती हैं कि बेटी के जीवन के लक्ष्य को विवाह तक ही सीमित ना करके उसे भरपूर पढ़ने का मौका देना चाहिए। शिक्षा ही एक ऐसा हथियार है जिससे जीवन की विषम परिस्थितियों से लड़ा जा सकता है और वास्तविक ऊंचाइयों को प्राप्त किया जा सकता है। 

 

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