एक व्‍हेल की मृत्यु ने उन्हें प्‍लास्टिक के खिलाफ जंग के लिए किया प्रेरित, आज एक मुहिम बन चुकी है

आज की कहानी के उद्देश्य को सार्थक करने के लिए यह छोटी सी कहानी बहुत जरूरी है। साहिल अपने दादा जी के साथ समुद्र किनारे चल रहा था किनारे पर हजारों तड़पती मछलियों को देखकर वह उनका हाथ छुड़ाकर भागा और एक-एक कर मछलियों को समुद्र में डालने लगा। दादाजी ने डांटा और कहा ‘’तू अकेली नन्ही सी जान कब तक इन हजारों को बचाएगा’’। साहिल रूआंसा सा होकर दादा जी के साथ हो लिया। थोड़ी दूर जाकर उसने पीछे मुड़कर देखा कि बच्चों का एक बहुत बड़ा समूह तड़पती मछलियों को समुद्र में वापस डाल रहा था। साहिल के चेहरे पर खुशी और जीत की लहर दौड़ गई। कुछ ऐसा ही उदाहरण दिल्ली के रहने वाले मीडिया कर्मी अभिमन्यु चक्रवर्ती ने दुनिया के सामने प्रस्तुत किया है। उन्होंने अकेले ही प्लास्टिक मुक्त पर्यावरण की बनाने के लिए जो पहल की है उससे आज अनेकों लोग जुड़ रहे हैं। 

सोशल मीडिया की एक पोस्‍ट ने अभिमन्‍यु की सोच को बदल दिया  

फेसबुक पर 10 फुट लंबी व्‍हेल की तस्वीर स्पेन के समुद्री बीच पर देखकर अभिमन्यु का मन बहुत आहत हुआ जब इस तस्वीर के माध्यम से उन्हें पता चला कि व्‍हेल के पेट में 29 किलो प्लास्टिक गया था जो उसकी मौत का कारण बन गया। 

15 सालों तक नष्ट नहीं होने वाले प्लास्टिक के बुरे परिणाम पूरी मानव जाति सहित पशु-पक्षी भी झेल रहे हैं। समुद्र में डाला जाने वाला प्लास्टिक का कचरा समुद्री जीव भोजन की भूल में खा बैठते हैं जिसके कारण अंदरूनी अंगों में रुकावट होने से वह काम करना बंद कर देते हैं और निर्दोष जीव जंतु मौत के मुंह में समा जाते हैं। अभिमन्यु इस समस्या से निपटने के लिए कुछ करना चाहते थे लेकिन क्या और कैसे नहीं जानते थे।

प्‍लागिंग यानि पिक अप एंड जॉगिंग 

इन्हीं दिनों खबरों में मुंबई के वकील अफरोज शाह द्वारा वर्सोवा बीच पर सफाई अभियान के बारे में जब अभिमन्यु ने पढ़ा तो बिना किसी की सहायता के सफाई अभियान का मन बना लिया। इस योजना पर सोचते हुए अभिमन्यु को स्वीडन के लोगों के बारे में पता चला कि प्‍लागिंग नाम की मुहिम के जरिए वह प्लास्टिक के कचरे को साफ करते हैं। प्‍लागिंग यानि पिक अप एंड जॉगिंग। जॉगिंग करते हुए रास्ते में दिखने वाले प्लास्टिक के कचरे को उठाना। अभिमन्यु के लिए यह बिना लागत वाला आईडिया बड़े काम का था। बस फिर क्‍या था उन्होंने जॉगिंग के साथ-साथ प्लास्टिक का कचरा उठाना शुरू कर दिया।

काफी लोगों ने अभिमन्‍यु की इस पहल का स्‍वागत किया  

मार्च में अभिमन्यु ने अकेले ही इस सफर की शुरुआत की जिसमें उनका साथ सिर्फ एक दोस्त ने निभाया। डिजिटल युग में सोशल मीडिया की ताकत का अंदाजा अभिमन्यु को मीडिया कर्मी होने के नाते भली-भांति था। सो प्‍लागिंग के हैश टैग के साथ अभिमन्यु ने सोशल मीडिया पर अपनी फोटोस डाली शुरू की। धीरे-धीरे उनके दोस्तों के जिज्ञासा भरे फोन आने शुरू हो गए। सफाई के पहले और बाद की जगहों की फोटोस डालने से एक बड़ा बदलाव आया काफी लोग अभिमन्यु की इस मुहिम में जुड़ने लगे।

समुद्र में फेंका जाने वाला 60 प्रतिशत प्‍लास्टिक साऊथ ईस्‍ट एशिया की देन

विश्व पर्यावरण दिवस पर  भारत का थीम है ‘प्लास्टिक प्रदूषण से जंग’ जो अभिमन्यु की थीम से मिलता-जुलता है। अभिमन्यु ने अब मोटरसाइकिल पर साउथ ईस्ट एशिया में वियतनाम, लाओस, कंबोडिया, थाईलैंड, म्यांमार, इंडोनेशिया, फिलीपींस एवं चाइना में जाकर अपनी मुहिम से लोगों को जोड़ने का निर्णय लिया है क्योंकि समुद्र में 60 प्रतिशत कचरा साउथ ईस्ट एशिया के इन देशों की देन है।

इस मुहिम से अब नहीं तो कब जुडेंगे

अब जरूरत है एक बार प्रयोग में आने वाले प्लास्टिक को अपने जीवन से निकाल फेंकने की। छोटी-छोटी चीजें बड़ा बदलाव ला सकती हैं जैसे पानी के लिए दोबारा प्रयोग होने वाली बोतलें, कपड़े या जूट के बैग का इस्‍तेमाल करना,  प्लास्टिक के बर्तनों का प्रयोग नहीं करना। दोस्तों, रिश्तेदारों से प्लास्टिक के भयानक परिणामों पर चर्चा और प्लास्टिक के प्रयोग नहीं करने का संकल्प लेना इस दिशा में बड़ा बदलाव ला सकते हैं। अभिमन्‍यु भी साहिल की तरह बार-बार पीछे मुड़कर देखे तो हमारा साथ किसी न किसी रूप में मिलने से ही उसकी या कहें मानव जाति की  जीत सुनिश्चित होगी। 

 (यह कहानी मेघना गोयल द्वारा दिखी गयी है।)

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