मानसिक स्वास्थ को लेकर फैली भ्रांतियों को मिटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं "एना चांडी"

आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में हर चौथा  आदमी डिप्रेशन का शिकार होता जा रहा है। डिप्रेशन की स्थिति तब होती है जब हम जीवन के हर पहलू पर नकारात्मक  रूप से सोचने लगते हैं। जब यह स्थिति चरम पर पहुंच जाती है तो इंसान को अपनी  ज़िंदगी बेकार लगने लगने लगती है और धीरे धीरे इंसान डिप्रेशन की स्थिति मे पहुच जाता है।डिप्रेशन के कारण शरीर में कई हार्मोन का स्तर  बढ़ता जाता है,  जिनमें एड्रीनलीन  और कार्टिसोल प्रमुख हैं और इस कारण    इसका शिकार व्यक्ति कभी कभी कुछ ऐसे कदम भी उठा लेता हैं जो उसके जीवन को तबाह कर देते हैं।

ऐसे ही लोगों के लिये मसीहा का काम कर रहीं एना चांडी जो भारत  की पहली सुपरवाइज़िंग और ट्रेनिंग ट्रांजैक्शनल ऐनालिस्ट हैं जिन्हे कॉउंसलिंग के क्षेत्र में विशेषता के साथ इंटरनेशनल ट्रांजैक्शनल ऐनालिस्ट एसोसिएशन से मान्यता भी प्राप्त हैं।वह न्यूरो लिंग्विस्टिक  प्रोग्रामिंग और आर्ट थेरेपी में भी सर्टिफाइड हैं।  आज कल वह फिल्म अभिनेत्री दीपिका पादुकोण जिनको उन्होंने कभी डिप्रेशन से बाहर निकला था द्वारा स्थापित "द लिव लव लॉफ फाउंडेशन "की डायरेक्टर हैं।जिसके माध्यम से इन्होने पिछले 2 सालो में कितने ही लोगों को डिप्रेशन से बाहर निकाल कर उनके जीवन में नयी उमंग का संचार किया हैं।

एना का जन्म दक्षिण भारत के चैन्नई शहर हुआ था। उनकी स्कूलिंग बेंगलुरु के बिशप कॉटन स्कूल और कॉलेज की शिक्षा माउंट कारमेल से हुई हैं। परंपरागत परिवार होने के कारण इनके जल्द ही कॉलेज के बाद शादी कर दी गयी लेकिन भाग्य को तो कुछ और ही मंज़ूर था। सुसराल में इनके देवर को “सज़ोफ्रेनिया” नाम की बीमारी थीं जो की एक  mental disorder होता हैं जिसमे मरीज़  abnormal social behavior का शिकार होता हैं। परिवार में किसी को भी इस बीमारी के बारे पता नहीं था लेकिन परिवार वालों को साइकोथेरेपिस्ट ने उनकी देखभाल करना सीखा दिया था। एना ने इसमें बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया और उनकी अच्छे से देख भाल की। परिवार में ही मिले इस अनुभव के बाद एना ने "विश्वास " नाम की गैर सरकारी संस्था के साथ फ्रीलांसर के तौर पर काम करने लगी जो असमर्थता और विकास के क्षेत्र में काम करती थीं।  अपने अच्छे काम व लगन के चलते उन्हें संस्था में और अधिक जिम्मेदारी दी गयी। 

एना बताती है कि "समाज में मानसिक बीमारियों के बारे में भ्रन्तिओं को तोड़ने के लिये इन्होने कॉउंसलर बनने का फैसला लिया हालांकि घर वालों ने कुछ ऐसा करने को बोला जिसमे फ्यूचर सिक्योर हो क्योकि उस वक़्त भारत में इसका कोई भी स्कोप नहीं था , लेकिन एना फैसला ले चुकी थीं और उन्होंने अमेरिका से ट्रांजैक्शनल एनालिसिस की जानकरी ली और तीन साल बाद वह एक ट्रांजैक्शनल ऐनालिस्ट बन गयी तथा प्रथम भारतीय महिला भी जो डेप्रेशन और मानसिक बीमारियों वाले मरीज़ो की कॉउंसलिंग करती थीं।

एना बताती हैं कि "कॉउंसलिंग से जुडी सबसे अच्छी बात ये हैं कि आप अपने बारे में भी बहुत कुछ सीख जाते हैं और अपनी कमियों को दूर कर आत्मविश्वास के साथ अपनी जिंदगी को जीते हैं "। आगे वह बताती हैं कि शरुवात में उनके घर वालो की कॉउंसलिंग के करिअर में न जाने की बात कुछ हद तक सही थी क्योकि उस समय भारत में इस विषय पर कोई सोचता तक नहीं था ,लेकिन आज धीरे धीरे ही सही लोगो में जागरूकता आयी हैं और लोग इसका फायदा भी उठा रहे हैं। दीपका पादुकोण के साथ हुऐ अनुभव के बारे में बात  करते हुऐ एना बताती है कि "वह जानती थी कि दीपका ठीक नहीं हैं ,लेकिन वजह क्या हैं यह पता नहीं था और जब दीपिका ने एना को फ़ोन किया तो वह फ़ोन पर ही अपना हाल बताकर रोने लगी। सही वजह जानने के लिये अगले ही दिन एना दीपिका के पास मुंबई पहुंच गयी और एक पूरा दिन उनके साथ बिताया और बाद में वह उन्हें डॉक्टर के पास भी ले गयी। " लिव लव लॉफ " दीपिका की ही फिलोस्फी हैं और इस फाउंडेशन का मकसद मानसिक स्वास्थ के बारे में जागरूकता बढ़ाना हैं जिसमें एना  एना चांडी डायरेक्टर के तौर पर महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। 

एना के अनुसार आज जब वह पीछे मुड़कर अपने सफर को देखती हैं तो उन्हें इस बात की बहुत की बहुत ख़ुशी होती हैं कि अनेको परेशानियां होने के बावजूद वह आगे बढ़ती रही और इसका श्रेय वह अपने पैशन के प्रति जुनून को देती हैं ,जो आपके अंदर से ही आता हैं और आपको निरंतर आगे ही बढ़ाता हैं।

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