इंजीनियर जिसने ग्रामीण और आदिवासी बच्चो के चौतरफा विकास के लिये बनाया एक आसान लेकिन प्रभावकारी शिक्षा का मॉडल

शिक्षा हमारे चारों ओर की चीज़ो को सीखने की प्रक्रिया है यह हमे किसी भी परिस्थिति या वस्तु को समझने ,किसी भी तरह की समस्या से निबटने और सम्पूर्ण जीवन के भिन्न भिन्न आयामों में संतुलन बनाये रखने में सहायता करती है। शिक्षा सभी मनुष्यों का सबसे पहला और महत्वपूर्ण अधिकार है इसके अभाव में मनुष्य जीता तो है लेकिन जीवन में आगे बढ़ने के लिये उसे काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।इसलिये शिक्षा सदा ही जीवन में एक लक्ष्य निर्धारित करने और आगे बढ़ने के लिये प्रेरित करती है।दुर्भाग्यवश आज भी  हमारे समाज का एक बड़ा हिस्सा  शिक्षा से वंचित है किन्तु सौभाग्यवश  आज सरकार के साथ साथ कुछ ऐसे लोग भी है जिन्होंने अपना सर्वस्व न्योछावर कर शिक्षा के प्रचार एवं प्रसार में अपना जीवन समर्पित कर दिया है। ऐसे  ही एक शख्सियत है पेशे से इंजीनियर बिनायक आचार्य जिन्होंने शिक्षा के महत्व को भली भांति समझते हुए यह जाना कि ग्रामीण और आदिवासी इलाको में शिक्षा का स्तर काफी निम्न है । काफी गहन विचार के बाद उन्होंने ग्रामीण और आदिवासी बच्चो के लिये एक ऐसा मॉडल तैयार किया जिसमे बच्चों को उन्ही के गांव की पढ़ी लिखी महिलाओं द्वारा उनकी समस्याओ को समझते हुये पढ़ाया जाता है तथा इस प्रकार शिक्षित किया जाता है कि उनके कौशल में और निखार आ सके। अपने इस मॉडल को  बिनायक आचार्य ने  " थिंकज़ोन" का नाम दिया।

बिनायक पेशे से इंजीनियर है और अपने कैरियर की शुरुवात में वह  वर्ल्ड बैंक में "ग्लोबल एजुकेशन प्रैक्टिस कंसलटेंट" के तौर पर नियुक्त थे इस सिलसिले में उन्होंने कई  विदेश यात्रा भी की।अच्छा एवं स्थिर  कैरियर  होने के बावजूद  बिनायक के मन सामाजिक कार्यो में ज्यादा लगता था। इसी कारण एक दिन नौकरी छोड़ भुनेश्वर के XIMB College में एडमिशन लेकर  Rural Management में MBA किया और इसके बाद ग्रामीण और आदिवासी बच्चो के स्किल डेवलपमेंट पर काम किया। अपने गंभीर प्रयासो के बावजूद बिनायक ने मलकानगिरी जैसे आदिवासी इलाको  में महसूस किया कि उनकी द्वारा दी जा रही ट्रैंनिंग का ज्यादा लाभ नहीं हो रहा था कारण था ट्रैंनिंग जिसमे  ज्यादातर युवा थे उनमे बचपन से दी जाने वाली अच्छी और गुड़ात्मक शिक्षा का अभाव होना,जिसका उनके स्किल डेवलमेंट ट्रैंनिंग और उसके बाद उचित रोज़गार खोजने में नकारात्मक प्रभाव पढ़ रहा था। यहाँ तक कि  वो युवा भी मानते थे अगर उनकी शिक्षा अच्छी होती तो शायद उन्हें स्किल ट्रैंनिंग की जरूरत ही नहीं होती। मलकानगिरी में मिले इसी अनुभव ने बिनायक आचार्य को " थिंकज़ोन" जैसे मॉडल बनाने को प्रेरित किया। 

इस मॉडल में गांव की पड़ी लिखी महिलाये जिन्होंने पहले कभी पढ़ाया हो को एक खास मानक के तहत चुना जाता है जिन्हें थिंकजोन की टीम डेढ़ महीने की  ट्रैंनिंग देती है जहाँ उन्हें बताया जाता है कि कैसे कम साधनो और सुविधा में भी बच्चो को क्वालिटी एजुकेशन दी जा सकती है।इसी कारण यह मॉडल कही भी किसी भी परिस्थति में लागू किया जा सकता है। इस समय यह मॉडल उड़ीसा के कटक 

,जगतपुर और गंजाम  जिले के कई गाँवो सफलता पूर्वक चल रहा है जहाँ अभी तक 45 महिलाये करीब 1500 बच्चो को पढ़ा रही है। थिँकजोन से जुड़े बच्चो की उम्र करीब 3 से 10 साल की है ,यह एक लेवल बेस प्रोग्राम है ,यहां बच्चो को उम्र के हिसाब से नहीं बल्कि उनकी जानकारी के हिसाब से अलग अलग वर्गो में रखा जाता है इसके लिये सबसे पहले उनका टेस्ट लिया जाता है। इसके बाद उनके बैच बनाये जाते है। हर बैच में 25 -30  बच्चे होते है। बच्चो की क्लास या तो इन महिलाओं के घर में होती है या फिर सामुदायिक केन्द्रो या ऐसी जगहो पर होती है जहाँ इनको इकठा किया जा सके। अगर बच्चो की संख्या ज्यादा होती है तो यह महिलाये दिन में दो या तीन बैच भी लेती है।

बिनायक बताते है कि "थिंकजोन में एक अर्ली चाइल्डहुड प्रोग्राम भी है जहॉ 3 से 6 साल के बच्चे है  जिनमे कुछ आँगनवाड़ी भी जाते है ,इनको पेंसिल पकड़ने से लेकर साफ सफाई और नैतिकता की बाते बताई जाती है क्योकि यह  उम्र उनकी सीखने की है और इस उम्र में  सही शिक्षा उनको एक मजबूत आधार देती है "। इन सब के लिये टीचर्स   खेल और विडिओ का सहारा लेती है। बिनायक आगे बताते है कि "थिँकजोन के इस मॉडल की शरुवात वर्ष 2015 में हुई थी और इस मॉडल के कारण बच्चो में सीखने की क्षमता लगभग 50 % तक बढ़ गयी है और साथ ही इस प्रोग्राम से जुडी महिलाओं की आय भी लगभग 40% बढ़ी है"।

अपने इस मॉडल की उड़ीसा में  सफलता के बाद बिनायक अब इसको देश के दूसरे ऐसे राज्यों में ले जाने की योजना बना रहे है जहाँ शिक्षा का स्तर काफी ख़राब है इनमे झारखंड ,छत्तीसगढ़  और बिहार प्रमुख है। शिक्षा के स्तर को सुधरने में प्रयासरत बिनायक आचार्य एक ऐसी मशाल है जिनके तेज़ से आज उड़ीसा के कई गांव जगमगा रहे है और भविष्य में यह आग देश के कोने कोने में फैलेगी।

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