स्टार्टअप के जरिए कला व शिल्प के कारीगरों को आर्थिक रूप से आत्म निर्भर बना रही दिल्ली की एक टेक्सटाइल डिज़ाइनर

विश्व भर में आज भारत की पहचान फैशन के क्षेत्र में काफी तेज़ी से बन रही है न केवल फैशन डिज़ाइनिंग बल्कि टेक्सटाइल  डिज़ाइनिंग के क्षेत्र जो की फैशन इंडस्ट्री का ही अंग है ने काफी तेज़ी से प्रगति की है। रचनात्मक सोच रखने वाले युवाओ के लिए आज टेक्सटाइल डिज़ाइनिंग में कॅरिअर काफी नयापन लेकर आया है। यही कारण है की वर्तमान में युवा इस ओर तेज़ी  से आकर्षित हो रहा है। आधुनिक टेक्नोलॉजी के चलते ऐसे सॉफ्टवेयर उपलब्ध हो गए है जिससे टेक्सटाइल डिज़ाइनिंग को नये आयाम मिल रहे है।इसी क्षेत्र से जुड़ा एक  नाम उभर कर सामने आया है कनिका गुप्ता का ,जो की एक टेक्सटाइल डिज़ाइनर है। रंगो का प्रस्तुति का  सम्पूर्ण ज्ञान रखने वाली कनिका को नये नये डिज़ाइन बनाने का शौक है और अपने शौक को नया रूप देने के लिये दिल्ली में “Ezel home” और “Ezel lab” नाम से दो स्टूडियो चला रही है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अपनी रचनात्मकता को और अधिक उभरने के लिए वे उन कारीगरों की मदद लेती है जो की कला व शिल्पकारी में  अच्छी जानकारी रखते है किन्तु आर्थिक शोषण के कारण वे अपनी कला से दूर होते जा रहे है।कनिका ने इन कारीगरों पर हो रहे शोषण को रोकने के लिए मजबूती से कदम बढ़ाया है और उनकी कला को नयी पहचान दिलवाने के लिये लगातार प्रयास कर रही है जिसमे वह बखूबी सफल भी हो रही है।


दिल्ली की रहने वाली कनिका गुप्ता ने टेक्सटाइल डिज़ाइनिंग में नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ फैशन टेक्नोलॉजी से  स्नातक किया है। कनिका ने सबसे पहले 2010  में जरी के काम से जुड़ा स्टूडियो खोला। लेकिन  उससे भी पहले कनिका ने क्राफ्ट पर और अधिक जानकारी जुटाने की कोशिश करते हुए देश के कोने कोने में भृमण किया। इसी बीच वे झारखंड पहुंची। वहाँ की शिल्पकारी ने उन्हें बेहद प्रभावित किया परन्तु उन्होंने यह भी अहसास किया कि रोज़गार के क्षेत्र में वह काफी संघर्ष कर रहे है और अपनी कला से काफी दूर होते जा रहे है।इसी बात पर बहुत अधिक गौर करते हुए कनिका ने ADVIKA नाम से मॉडल प्रोजेक्ट शुरू किया।जिसमे उन्होंने टेक्सटाइल का डिज़ाइन शहरी लोगो की रूचि के अनुसार बनवाया और अपने इस कदम को वह Ezel lab की ओर पहला कदम मानती है। कनिका बताती है “डिज़ाइन सिर्फ सुन्दर वस्तु ही नहीं अपितु एक प्रक्रिया होती है जो की एक व्यवसायिक  बदलाव है। जिसमे आप दूसरो से अलग वस्तुए बनवाते है और विचार करते है कि इस बदलाव को एक कंपनी के रूप में कैसे लाया जाये। बस यही काम Ezel lab में किया जाता है”। शुरू में कनिका ने पाया की उच्च  व उच्च माध्यम  वर्ग के लोगो में अपना  घर सजाने का बहुत शौक होता है लेकिन वे टेक्सटाइल की शॉपिंग विदेशो से करना पसंद करते थे ,देशी गुणवत्ता उन्हें पसंद नहीं आ रही थी। बस यही जानकारी के साथ कनिका ने Ezel home का निर्माण किया। कनिका बताती है कि “उनका कोई बिज़नेस बैकग्राउंड नहीं है और न ही MBA किया है इसलिए थोड़ी दिक्कत तो आयी”। पहले साल उन्होंने सिर्फ बिसनेस को जाना दूसरे वर्ष अपने प्रोजेक्ट पर स्टडी किया बस उसके बाद कनिका ने कभी मुड़ कर पीछे नहीं देखा। आज यही वजह है कि कनिका के होम फर्निशिंग सामान के डिजाइन दिल्ली के अलावा हैदराबाद ,मुंबई ,जम्मू और दुसरे शहरों में भी खूब पसंद किये जा रहे है।

कनिका ने ईज़ल होम के नींव 2011 सितम्बर में रखी। सबसे पहले उन्होंने अपने काम की शुरुआत 8"और 10"मैट्रेस की बेडशीट से की। क्यूंकि इस  साइज़ की  बेडशीट पहले उपलब्ध नहीं हो पाती  थी और लोग बाहर से मंगवाते थे। बाद में उन्होंने कुशन कवर ,बेड कवर,टेबल मैट्स ,टेबल कवर और परदे डिज़ाइन करना शुरू किये। फिर 2012 में उन्होंने बसंत कुंज और गुडगाँव के ग्राहकों के लिये घर की सजावट का काम शुरू किया। कनिका का डिज़ाइन स्टूडियो भी है जिसमे वह रिटेल में कोई सामान नहीं बेचती है बल्कि घर ,होटल व रेस्टोरेंट के लिए डिज़ाइन बनाती है।

कनिका सबसे पहले अपने ग्राहक की पसंद व नापसंद जानने का प्रयास करती है क्योकि हर व्यक्ति की अलग अलग पसंद होती है कोई  नयी प्रकार की सजावट  चाहता है तो कोई परम्परिक ।फिर वह उनकी बजट से जुडी जानकारी प्राप्त करने के बाद ही काम शुरू करती है। कनिका के डिज़ाइन हमेशा नये होते है क्योकि वह अपने एक  ग्राहक का डिज़ाइन दूसरे ग्राहक को कभी भी उपलब्ध नहीं कराती है। इसलिए उनके काम में हमेशा नयापन देखना को मिलता है। आज कनिका के ग्राहक देश के अलावा अमेरिका व सिंगापुर में भी मौजूद है।

कनिका अपने बिज़नेस के लिये  छोटे कारीगरों से काम लेती है जिसके लिए उनका मकसद बहुत नेक है। वे बताती है की “मै  जानकार कारीगरों को रोज़गार दिलवाकर उन्हें खुद के पैरों पर खड़ा करना चाहती हूँ। अगर कारीगर काम जनता है चाहे फिर उसके पास एक ही मशीन क्यों न हो मै उसे काम जरूर देती हूँ”। देश के अलग अलग हिस्सों के कारीगरों से कनिका अपने मन मुताबिक काम लेती है। पहले उन्हें  कारीगरों को काम समझना पड़ता था लेकिन अब काफी सालो से साथ काम करने के कारण कारीगर भी कनिका की पसंद को जान चुके है।

कनिका कहती है कि " अगर आपका काम अच्छा है तो मार्केटिंग की कोई जरूरत नहीं होती है " । इसलिये आज तक उन्होने अपनी कंपनी का कोई पम्पलेट नहीं छपवाया और न ही कोई होर्डिंग लगवायी। आगे वह कहती है कि  मेरे जितने भी ग्राहक है वे एक दूसरे से मिली जानकारी के बाद ही मेरे पास आते है। मेरा मानना है कि “अगर  मुझमे हुनर है और मै लोगो के लिए अच्छा डिज़ाइन न बना पाऊ तो वह मेरे पास नहीं आयंगे”। कनिका पिछले डेढ़ साल से बड़े ही प्रोजेक्ट ले रही है लेकिन अगर किसी का बजट काम है तो वह एक कमरे के लिये भी डिज़ाइन करती है। अपने भविष्य की योजनाओ की जानकारी देते हुए कनिका बताती है की मेरी इच्छा अब होटल और हॉस्पिटैलिटी इंडस्ट्री में आगे बढ़ने की है। अभी भी इस क्षेत्र में काम करने की काफी आवश्यकता है।

आगे बढ़ने की चाह तो हर इंसान में होती है। लेकिन दूसरो के हुनर को अपने साथ लेकर आगे बढ़ना सच्ची काबिलयत की निशानी होती है और इसी काबिलियत का बेहतरीन प्रदर्शन कनिका गुप्ता ने किया है। 

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