15 वर्ष में 13 स्‍थानांतरण, इस आईएएस अफसर की कहानी अपने आप में एक मिसाल है

देश के गंभीर पद पर कार्यरत अधिकारियों को ईमानदारी के कारण यदि स्‍थानांतरण झेलने पड़ें तो आम जनता का प्रेम उन्‍हें स्‍वत: ही मिल जाता है। ऐसी ही आईएएस ऑफिसर मुग्‍धा सिन्‍हा के बारे में आज हम जानेंगे जिन्‍होंने 15 वर्षों में 13 स्‍थानांतरण आर्डर का सामना किया। 

मुग्धा सिन्हा 1999 बैच की राजस्थान कैडर की आईएएस ऑफिसर हैं। जब ये कलेक्टर बनकर राजस्थान की झुंझनु जिले गईं थीं तो ये उस जिले की तब तक की पहली महिला कलेक्टर थी। मुग्धा सिन्हा ने अपनी पढ़ाई देश के सबसे प्रतिष्ठित कॉलेज जेएनयू से पूरी की है। इन्होंने जेएनयू से इंटरनेशनल रिलेशन में मास्टर और इंटरनेशनल डिप्लोमेसी में एमफिल किया है।

18 साल तक राजस्थान में आईएएस ऑफिसर की भूमिका को मुग्धा एक प्रेरक लीडर की तरह सीखने और देशवासियों में बांटने का निरंतर सफर मानती हैं। कार्य की कठिनता को आनंददायक और चुनौतीपूर्ण दोनों ही विशेषणों से संजोकर अपनी कार्यकुशलता के अनेकों उदाहरण उन्होंने प्रस्तुत किए हैं। सरकारी योजनाओं को जिले के प्रत्येक आम आदमी तक पहुंचाने में उन्हें देशवासियों की सरकार से अपेक्षाओं के बारे में खासी जानकारी मिली। 

केंद्रीय सरकार के टेक्सटाइल और वाणिज्य विभाग में कार्य करते हुए अंतर्राष्ट्रीय व्यापार और इंडस्ट्री में उन्हें विभिन्न महत्वपूर्ण योजनाओं के निर्माण का मौका भी मिला। 

राजस्थान के चार विभिन्न जिलों में काम करते हुए उन्होंने अनेक चुनौतियों का सामना किया। बूंदी जिले में कार्य करते हुए गांव वासियों के सहयोग से पर्यटन को बढ़ावा दिया। ‘शिक्षा आपके द्वार’ अभियान चलाकर बच्चों का स्कूलों में रजिस्ट्रेशन करवाया। ‘सारथी योजना’ को उन क्षेत्रों में लागू किया जहां तक सरकारी योजनाएं अभी तक नहीं पहुंच पाई थी। हनुमानगढ़ और श्रीगंगानगर क्षेत्रों में मनरेगा मजदूरों को नहर खुदाई के लिए अवसर देकर दोनों समस्याओं को सुलझाया। झुंझुनू क्षेत्र में जमीन एवं खनन माफिया के खिलाफ कार्य करने पर मुग्धा को ट्रांसफर आर्डर का सामना करना पड़ा। 

भविष्य में IAS ऑफिसर बनने वाले युवाओं के लिए मुग्धा का यह संदेश है कि आईएएस बनकर आप ईमानदारी, सत्यता, न्यायपूर्ण ढंग से अपने कर्तव्य को निभा कर आने वाली पीढ़ियों के लिए तो मिसाल कायम करते ही हैं साथ ही आम आदमी का साथ आप की राजनीतिक हार को भी जीत में बदल देता है। अपने कर्तव्य की राह में स्वयं की चेतना और देश के संविधान को अपना मार्गदर्शक मानकर कार्य करेंगे तो हमेशा पाएंगे सत्य परेशान हो सकता है पराजित नहीं 

बूंदी जिले के एक मंदिर में लिखें इस संदेश को मुग्धा अपने जीवन की प्रेरणा मानती हैं 

जो अपने पद पर रहकर काम करते हैं वह कभी ना कभी भूतपूर्व हो जाते हैं लेकिन जो अपने कर्म से काम करते हैं वह सदैव अभूतपूर्व कहलाते हैं

वर्तमान में मुग्धा दिल्‍ली मुंबई औद्योगिक कॉरिडोर की कमिश्नर हैं इससे पहले राजस्‍थान राज्‍य औद्योगिक विकास एवं निवेश निगम में एम डी के पद पर रह कर अपने अनुभवों से राज्य में होने वाले निवेश और औद्योगिकरण को बढ़ाने के लिए प्रयासरत हैं। 

जीवन की कठिन परिस्थितियों को अपने प्रेरणात्मक विचारों से रोचक अनुभवों में बदलने वाली अद्भुत व्यक्तित्व और प्रतिभा की धनी मुग्धा सिन्हा की कार्य निष्ठा देश के विकास की महत्पूर्ण कड़ी है।

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