फसल विविधीकरण तकनीक से गांव के किसानों की तकदीर बदल रहे हैं दिलबर सिंह

सरकार द्वारा फसल विविधीकरण मॉडल को पंजाब के बहादरपुर गांव के एक किसान ने अपनाकर अपार सफलता अर्जित की है। कर्जे में दबे किसान इस तकनीक से अपनी अर्थव्यवस्था को बहुत हद तक संतुलित कर सकते हैं।

प्रगतिशील किसान दिलबर सिंह ने गेहूं और चावल की खेती के चक्रव्यूह से निकलने के लिए डेरी व्यापार को अपनाने का निर्णय लिया। क्‍योंकि सरकारी मदद के साथ मार्गदर्शन था इसलिए उन्‍हें इस तकनीक को अपनाने में कोई विशेष परेशानी नहीं हुई। कड़े परिश्रम और अपनी सूझबूझ के चलते आज दिलबर सिंह के पास हाइब्रिड प्रजाति की 165 गाय हैं जिनसे वह प्रतिदिन 10 क्विंटल दूध अर्जित कर रहे हैं। दूध के उत्पादों को वह निर्यात भी करते हैं। 

गाय को अपनी वैभवता का प्रतीक मानने वाले दिलबर सिंह बड़े ही गर्व से उनके पास मौजूद साहिवाल प्रजाति की गाय से आने वालों को मिलवाते हैं, जो प्रतिदिन 40 किलो दूध देती है। 

गांव के प्रति अपने कर्तव्यों के प्रति भी दिलबर सिंह खासे सजग हैं। जिसको पूरा करते हुए दिलबर सिंह ने गांव में दो बायोगैस प्लांट लगवाएं हैं। इनसे गाय के गोबर द्वारा बायोगैस उत्पन्न होती है। इस गैस को वह पूरे गांव में निशुल्क दे रहे हैं। जिससे LPG गैस के मूल्य की वृद्धि का गांव वालों पर कोई असर नहीं होता है क्योंकि उनका गांव LPG गैस से मुक्त गांव हैं। 

गाय के गोबर द्वारा वह ऑर्गेनिक खाद भी गांव के किसानों को उपलब्ध करवा रहे हैं। 2011 से निशुल्क बायोगैस गांव में सप्लाई कर कर रहे दिलबर सिंह ने अपने खर्चे पर पूरे गांव में पाइप लाइन बिछाने का कार्य किया है। इतना ही नहीं बायोगैस प्लांट में बचे गाय के गोबर को ₹500 प्रति टैंकर के हिसाब से गांव के किसानों के खेतों में डलवाने का कार्य भी दिलबर सिंह करवाते हैं। 

गायों का दूध निकालने के लिए उनके फार्म पर आधुनिक सुविधाएं मौजूद हैं। पूरा डेरी फॉर्म कंप्यूटराइज्‍ड है। दिलबर सिंह ने डेयरी फार्म के उत्पादों को बेचने के लिए सात केंद्र भी जगह-जगह खोले हैं। समय की मांग को देखते हुए ऑनलाइन आर्डर करके भी इन उत्पादों को मंगवाया जा सकता है। 

पंजाब सरकार ने बहादरपुर गांव को ग्रामीण और फार्म पर्यटन के क्षेत्र में बढ़ावा देने के लिए चुना है। सरकार की इस पहल से दिलबर सिंह बेहद खुश हैं क्योंकि वह भविष्य में फूड इंडस्ट्री में प्रवेश करके ग्रामीण पर्यटन को नई ऊंचाइयों पर ले जाना चाहते हैं। 

हमारे देश के किसानों के पास समस्याएं तो बहुत हैं लेकिन इन समस्याओं से निराश किसान समाधानों की तरफ ध्यान नहीं दे पा रहा है। जो किसान समस्या से ज्यादा समाधान की तरफ बढ़ रहे हैं वह प्रगतिशील किसानों की श्रेणी में आ कर नए आयाम बना रहे हैं।

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