"जहाँ चाह, वहाँ राह" इस कथन को साबित करती है, मुश्किल हालातों का सामना करते हुए UPSC क्रैक करने वाली मोनिका की कहानी

मुश्किल हालात हम सब के जीवन में आते हैं लेकिन फर्क सिर्फ इतना है की कोई उन हालातों के आगे घुटने टेक लेता है तो कोई उनका सामना करने का निश्चय कर लेता है। और जो इन मुश्किल हालातों का सामना करते हैं, आखिर में वही मंजिल को प्राप्त करते हैं। यह भी सच है कि हमारे जीवन में हमारे सामने आने वाले कष्टों से ही हमारा परिमार्जन होता है। जो उन कष्टों को सह नहीं पाते वो शायद मुकाम पाने की दिशा में आगे बढ़ भी नहीं पाते। हमे हमारे हौसले के बलबूते खुद की परेशानियों से जूझना जिस रोज आ जाता है, जीवन में मंज़िल की राह उसी दिन आसान हो जाती है। आज की कहानी भी ऐसी ही एक लड़की की है जिसने तमाम परेशानियों के बीच भी अपनी हिम्मत को बुलंद रखते हुए जीवन में एक बड़ा मुकाम हासिल किया। हम जानते हैं कि हाल ही में यूपीएससी के परिणामों की घोषणा हुई है और इन्हीं परिणामों के साथ कई कहानियां जुड़ कर इतिहास बन गयी हैं जो आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा प्रदान करेगी। कुछ ऐसी ही प्रेरणादायक दास्ताँ है यूपीएससी में 577 वीं रैंक हासिल करने वाली देहरादून की डॉ. मोनिका राणा की। आइये जानते हैं कि आखिर कैसे विपरीत परिस्थितियों में होने के बावजूद उन्होंने यह सफलता अपने नाम की।

बचपन से थीं होनहार, पिता का सपना था उन्हें अधिकारी बनते देखना

मूल रूप से ग्राम नाडा लाखामंडल चकराता निवासी मोनिका बचपन से हो पढ़ाई में बहुत होशियार थी जिसके चलते उनके माता पिता ने एक सपना देखा कि एक दिन उनकी बेटी प्रशासनिक अधिकारी बनेगी। मोनिका ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा दून के स्कॉलर्स होम से पूरी की, उसके बाद कक्षा छठी से 12वीं की शिक्षा उन्होंने सेंट जोसेफ्स स्कूल से पूरी की। लेकिन तभी समय ने करवट ली और मोनिका के पिता गोपाल सिंह राणा और मां इंदिरा राणा की साल 2012 में लाखामंडल में एक सड़क दुर्घटना में मृत्यु हो गई। माता पिता की मृत्यु ने मोनिका और उनके पूरे परिवार को बिखेर दिया। लेकिन उस दुःख की घड़ी में मोनिका की बहन दिव्या राणा ने उनका हौसला बढ़ाया जो कि दिल्ली के यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया में मैनेजर पद पर कार्यरत हैं। उसके बाद डॉक्टर बनने का लक्ष्य लेकर मोनिका ने साल 2015 में मद्रास मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस की पढ़ाई की। मोनिका बताती हैं कि, "मम्मी पापा को खोने के बाद मैं बिलकुल टूट गयी थी और ऐसे समय में मेरे पास एक ही लक्ष्य था और वो था बहुत पढाई करना। ऐसा करते हुए मैंने ठान लिया था कि मुझे उनके हर सपने को अब पूरा करना है। एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी करने के बाद मैं वापस अपनी बुआ मीरा तोमर के यहाँ आ गई और यूपीएससी की तैयारी शुरू कर दी।"

हर हाल में अफ़सर बनना था उनका एकमात्र लक्ष्य

अपने माता पिता की मृत्यु के बाद उनके सपने को पूरा करना मोनिका ने अपने जीवन का एकमात्र लक्ष्य बना दिया और कठिन लगन और मेहनत के साथ इस प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी। मोनिका ने वेदांता कोचिंग सेंटर से कोचिंग की उसके बाद वह दिल्ली चली गई जहां उन्होंने श्रीराम सेंटर से कोचिंग कर यूपीएससी एग्जाम में यह सफलता प्राप्त की। जब उनकी यूपीएससी में 577 रैंक आई तो उनके घर में रिश्तेदार आकर बधाई देने लगे पर मोनिका को तो सबसे ज्यादा अपने माता-पिता याद आ रहे थे। वो उन्हें याद करते हुए काफी भावुक नजर आई। मोनिका ने बताया कि, "काश मेरे माता-पिता आज जिंदा होते तो वह बहुत ज्यादा खुश होते क्योंकि आज मैंने उनके सपने को पूरा कर दिया है। वो मुझे अफ़सर बनकर खुद के पैरों पर खड़े होते देखना चाहते थे और आज यह मैंने कर दिखाया है।"

मोनिका की सफलता के बारे में जान कर यह लगता है कि अगर व्यक्ति चाह ले तो वो हर असंभव लगते कार्य को भी पूरा कर लेता है। माता पिता की मृत्यु के बाद वो चाहती तो हार मानकर इसे अपनी नियति समझ सकती थी लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं सोचा और मेहनत करते हुए यह मुकाम हासिल कर लिया। मोनिका के माता पिता आज जहाँ कहीं भी होंगे, वो अपनी बेटी की सफलता पर गर्व अवश्य कर रहे होंगे की उसने मुश्किल हालातों का सामना करके आखिरकार यह सफलता अर्जित कर ली। मोनिका के साहस, निश्चय और कठिन परिश्रम को सलाम है। 

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