"मैंने सोचा पापा हैं, प्यार कर रहे होंगे" दुर्व्यवहार से पीड़ित एक लड़की की प्रेरणादायक कहानी

कहते हैं हमारी जिंदगी की दिशा और दशा हमारे द्वारा किये गए फैसलों से तय होती। हम जिंदगी में क्या हासिल करेंगे यह हमारे द्वारा चुनी गयी राह पर निर्भर होता है। हमें जिंदगी में कभी न कभी दो या दो से अधिक विकल्पों में से चुनना होता है, और अगर हम सही विकल्प चुनते हैं तो हम न केवल खुद को बेहतर बनाते हैं बल्कि समाज को बेहतर बनाने का काम भी करते हैं। आज हम आपको शीतल जैन नाम की एक ऐसी युवती की कहानी से अवगत कराने जा रहे हैं जिन्होंने अपनी जिंदगी में गलत राह चुनने के हज़ार कारण होने के बावजूद एक बेहतर राह चुनी और आज न सिर्फ उसने अपने लिए एक बेहतर मुकाम हासिल किया है बल्कि औरों के लिए भी मिसाल पेश कर रही हैं।

भारत के दूसरे सबसे बड़े रेड लाइट जिले में जन्मी शीतल के सौतेले पिता उसके साथ यौन दुर्व्यवहार करते थे और उनकी माँ ने उन्हें कुछ साल बाद घर से निकाल दिया था। बावजूद इसके उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और अपनी जुनून से आज वो एक सफल ‘ड्रमर‘ हैं। वो अमेरिका के लेविन स्कूल ऑफ़ म्यूजिक से पढ़ाई कर चुकी हैं और खुद एनजीओ में बच्चों को पढ़ाती हैं। केनफ़ोलिओज़ से बात करते हुए शीतल ने अपनी जिंदगी से जुड़े कुछ अनछुए पहलुओं पर बात की। 

शीतल की नानी को उनके पति कमाठीपुरा ले आये जब उनके पेट में शीतल की माँ मधु थी। उन्होंने मधु को कभी पढ़ने नहीं दिया। मधु ने शीतल के पिता, जिससे वो प्यार करती थी, से 13 वर्ष की उम्र में शादी की और शीतल का जन्म ठीक एक साल बाद प्रीमैच्योर बेबी के तौर पर हुआ। शीतल के पिता ने उनकी माँ से झूठ बोलकर शादी की और फिर उन्हें छोड़ कर किसी और के पास चले गए।

उनकी माँ, मधु ने बार डांसर की नौकरी की, दूसरी शादी की और एक बेटे, आदित्य को जन्म दिया। शीतल अपने सौतेले पिता को बहुत प्यार करती थीं क्योंकि उन्हें अपने असली पिता के बारे में कुछ मालूम नहीं था।

sflnbahlcy8g5uur6tw4q3deibwbl86n.jpg

अब्यूज़ की शुरुआत

बचपन में शीतल को गोवा के एक हॉस्टल में भेज दिया गया था जहाँ वो पढ़ती थी। छुट्टियों में उनके पिता उनको घर ले आते थे। उन्हें 7 साल की उम्र के तमाम किस्से याद हैं जहाँ वो सुबह सोकर उठती थी तो खुद को नग्नावस्था में पाती थी।

“एक दिन सोते हुए अचानक मैंने अपने पिता का हाथ अपने प्राइवेट हिस्सों पर महसूस किया. मैं गहरी नींद में होने का नाटक कर रही थी लेकिन मुझे अत्यधिक कष्ट हो रहा था। मैंने सोचा पापा हैं, प्यार कर रहे होंगे“, वह रोते हुए कहती हैं। उनके पिता ने उसके बाद उन्हें कपड़े पहन लेने को कहा। तब उन्हें एहसास हुआ कि सबकुछ ठीक नहीं है और उसके बाद वो अपने पिता से एक दूरी रखने लगी। 

शीतल को चौथी कक्षा के बाद उनकी पढ़ाई छुड़वा दी गयी। उनकी माँ ने नौकरी छोड़ दी और उनके पिता ड्रग्स लेने लगे। जब शीतल 12 वर्ष की हुई, तब उनके सौतेले पिता ने घर बार छोड़कर किसी और से शादी कर ली।

बेघर हुई लेकिन उम्मीद से खाली नहीं

शीतल की माँ कुछ समय के पश्चात दिमागी रूप से अस्थिर हो गयी और उन्होंने शीतल को घर से निकाल दिया। शीतल को पड़ोसियों का साथ मिला लेकिन बदले में वो उससे तमाम तरह के काम करवाते और उसे मारते भी थे। लेकिन जल्द ही शीतल की किस्मत का ताला खुल गया और उन्हें ‘क्रांति‘ का साथ मिला जो मुंबई में सेक्स–वर्कर्स के बच्चों के लिए काम करने वाली एक संस्था है।

बचपन में शीतल गणपति विसर्जन के दौरान ड्रम्स को बजते देखती थी जो उन्हें बहुत प्रभावित करता था। ‘क्रांति’ के साथ के दौरान उन्होंने ड्रम्स बजाना सीखा और उसे ही अपने करियर के रूप में चुना।

dxqdnntc9mldempmslycagdbsj4zsrrp.jpgसुनहरा वर्तमान

कुछ दिनों के बाद उनकी जिंदगी में उम्मीद की रोशनी जली, जब उन्हें अमेरिका में ड्रम्स सीखने के एक दीर्घ कोर्स की स्कॉलरशिप मिली। भारत लौटने के पश्चात वो ‘ताल इंक कंपनी‘ से एक सर्किल फेसिलिटेटर के रूप में जुड़ गयी। वो कई शो करने यूके भी जा चुकी हैं। शीतल रेड लाइट डिस्ट्रिक्ट में रह रहे बच्चों के लिए कुछ करना चाहती थी। वो अपने दोस्तों के साथ तमाम स्कूलों में जाकर फ्री वर्कशॉप का आयोजन करने लगी।

शीतल अभी बैंगलोर के, ‘मेक अ डिफरेंस‘ एनजीओ के साथ काम कर रही हैं। उन्होंने अपने भाई, आदित्य को कोल्हापुर की एक संस्था में पढ़ने भी भेजा है। अपनी माँ को उन्होंने ‘क्रांति‘ के ‘रिहैब केंद्र‘ में भी भर्ती करवाया है जहाँ उनकी स्थिति में सुधार हो रहा है। वो कहती हैं, “मैं ऐसी जिंदगी का सपना भी नहीं देख सकती थी। आज मैं जैमिंग सेशन के लिए जाती हूँ। मैं MAD में काफी कुछ सीख रही हूँ और मैं खुद को ‘क्रांति‘ के लिए काम करने के लिए तैयार कर रही हूँ“।

शीतल जैसे लोगों की जिंदगी हमे बहुत उम्मीद देती है। वो वास्तव में एक हीरो हैं और हम उन्हें बहुत-बहुत शुभकामनायें देते हैं उनकी आगे की जिंदगी के लिए। 

Meet Aaron Who Rescues Pets Through Telepathy

Meet Aaron Who Rescues Pets Through Telepathy