बेटियों ने उठाया बीड़ा, समाज को दिखाई परिवर्तन की राह, आज पूरा गाँव है शराब मुक्त

हमारे देश में नारी शक्ति को जो पहचान हासिल होती है, उससे पूरी दुनिया को काफी कुछ सीखने को मिल सकता है। इस बात में कोई दो राय नहीं है कि भारत की बेटियां अपने हुनर से पूरे विश्व में अपने देश का परचम लहराती आई हैं। फिर चाहे वो खेल हो, राजनीती हो या स्वस्थ्य का क्षेत्र हो, हर तरफ महिलाओं ने अपना लोहा मनवाया है। यह भी सत्य है कि हमारे देश में बेटियों ने हर वो चीज़ संभव करके दिखाई है जिसके लिए समाज में उनकी प्रशंसा हुई और उन्हें पहचान मिली है। इसका केवल एक ही कारण है, और वो है देश की बेटियों में मौजूद अपार क्षमता, उत्सुकता एवं जागरूकता। यही नहीं, उनमे जज्बे और हौसले की भी कमी नहीं है, और यही वजह है कि अक्सर इन्ही बेटियों के कारण समाज में परिवर्तन की लहर चल पड़ती है। जरुरत होती है तो बस उनमें वो हिम्मत जगाने की और उन्हें उचित मौके देने की और फिर वो बुलंदियों पर पहुंचने में देर नहीं लगाती। जहाँ एक महिला पूरे परिवार की किस्मत बदल सकती है, तो फिर सोचिये कई बेटियां मिलकर समाज को सकारात्मकता की कितनी बेहतर राह पर ले जा सकती हैं।  ऐसी ही कुछ बेटियों की कहानी से आपका परिचय आज हम कराने जा रहे हैं। यहाँ कहानी है तमिल नाडु के थेंनामदेवी गाँव की, जहाँ नवयुवतियों के एक समूह ने अपने गाँव में फैली शराब की बुरी आदत का खात्मा करने का सोचा और आज इन नवयुवतियों के कारण तमाम बच्चों एवं महिलाआं की जिंदगी संवर रही है। आइये इस बारे में विस्तार से पढ़ते हैं।

गाँव में लोगों को थी शराब पीने की बुरी आदत, जिसके कारण महिलाएं हो रही थी विधवा

तमिल नाडु के थेंनामदेवी गाँव में लोगों को शराब पीने की बुरी लत थी, आंकड़ों के मुताबिक यहाँ रह रहे 150 पुरुषों में से ज्यादातर पुरुष इस बुरी आदत का शिकार थे। मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि, इस गाँव में 90 महिलाएं विधवा हैं, जिनके पति शराब पीने के कारण गंभीर बीमारी का शिकार हुए और उनकी मृत्यु हो गयी। इस गाँव में अशिक्षा एवं बेरोजगारी मुख्या समस्या हैं, जिसके कारण लोगों को शराब की बुरी लत लग चुकी थी। जिसके कारण परिवार टूट रहे थे, बच्चे घर की कलह के कारण घर छोड़कर शहर की ओर भाग रहे थे। लगभग 1 वर्ष पहले जब यह समस्या अपनी चरम सीमा पर आ गयी तो इस गाँव की बेटियों ने सोचा क्यों न वो आगे आएं और गाँव के लोगों को बदलने का प्रयास करें। इन युवतियों ने सोचा की क्यों न पूरे समुदाय के लिए कुछ अलग किया जाए और फिर वो चल पड़ी उस राह पर जहाँ वो आशा की एक नयी किरण को जगा सकें।

घर के माहौल से तंग आकर तमाम बच्चे घर से भाग चुके थे

इस गाँव में आये दिन घरों में मारपीट, महिलाओं एवं बच्चों से दुर्व्यवहार की घटना होती रहती थी। और इसी कारण बेहतर जिंदगी की तलाश में इन घरों के बच्चे घर से भागने लगे। जिनमे से बहुतों का आजतक पता भी नहीं लग पाया है। आंकड़ों के मुताबिक तकरीबन 150 बच्चे अबतक घर छोड़कर भागने का प्रयास कर चुके हैं।  एक समाज सेवी संगठन ने जब इस विषय में थोड़ी जांच की तो पता चला कि इस इलाके के कई बच्चे बेहद ही कष्टदायक हालत में पास वाले रेलवे स्टेशन पर मिले, कुछ के कपडे फटे थे तो कुछ भीख मांग रहे थे। और जब स्टेशन से रिकॉर्ड खंगाले गए तो पता लगा कि इस गाँव के ज्यादातर बच्चे इसी स्टेशन से ट्रेन पकड़कर शहर की ओरे चले गए हैं।

बेटियों ने उठाया बीड़ा, समाज को दिखाई परिवर्तन की राह

गाँव में फैली इस बुरी आदत से आजिज आकर यहाँ की बेटियों ने गाँव की कायापलट करने की सोची, इसी क्रम में उन्होंने 'यंग गर्ल्स क्लब' नाम का एक समूह बनाया है।  यह नवयुतियों का एक समूह है, जोकि इस बुरी आदत से ग्रस्त पुरुषों की बेटियां हैं। इन बेटियों ने इस गाँव में सबसे पहले तो स्ट्रीट लाइट्स की मरम्मत करवाई, उसके बाद यह सुनिश्चित करवाया कि स्वास्थ्य से जुडी सुविधाएं शहर से गाँव तक आ पहुंचे। उनके चेष्टा से आज वहां एक पुस्तकालय का निर्माण भी हो रहा है। इन बेटियों को देखते हुए अब तमाम सामाजिक संस्थाएं एवं नेतागण भी उनकी मदद को आगे आ रहे हैं। इन बेटियों ने घर से भाग रहे और अचानक लापता हो रहे बच्चों की मदद करने का भी बीड़ा उठाया है और जो भी गुमशुदा बच्चों कि तलाश हो पायी है उनका दाखिला विद्यालय में कराकर उन्हें शिक्षा के अवसर दिए जा रहे हैं। वो यहाँ बच्चों को घर पर जाकर शिक्षित भी कर रही हैं। यही नहीं, इस गाँव में डॉक्टर्स की मदद से शराब की लत से ग्रसित पुरुषों का परामर्श भी किया जा रहा है जिससे वो इस बुरी लत को छोड़कर अपने परिवार के प्रति अपनी जिम्मेदारी को समझ सकें।

इस क्लब की बेटियां समय समय पर मीटिंग करके, गाँव को और बेहतर बनाने पर करती हैं चर्चा

इस समूह में शामिल बेटियां इस बात को भली भांति समझती हैं कि उनका काम अभी पूरा नहीं हुआ है और उन्हें आगे भी गाँव में तमाम काम करने हैं, जिसलिये वो समय समय पर एक मीटिंग करके गाँव में जरुरी सुधार से जुडी चर्चा करती हैं और कार्य-योजनाएं बनाती हैं। इस समूह में बेटियां अपने अपने मुद्दे उठाती हैं और उस फिर सम्पूर्ण समूह उस मुद्दे पर एक स्वस्थ बहस करता है, जिसके बाद ही कोई निर्णय लिया जाता है। यहाँ जरुरत की चीज़ें समाज सेवी संगठन उपलब्ध कराते हैं और फिर यह समूह उन चीज़ों का उचित इस्तेमाल करता है और इसी प्रकार यह बेटियां गाँव के साथ साथ समाज के काम आ रही हैं।

वास्तव में ऐसी बेटियां हम सबके लिए मिसाल हैं, और हमे इनसे बहुत कुछ सीखने को मिल सकता है। इनकी कहानी से हमे एक आवश्यक सीख भी मिलती है कि, जब आप किसी समस्या से जूझ रहे हैं तो कई बार आपको खुद उठकर उस समस्या का हल निकालना होता है, क्यूंकि हो सकता है कि कोई और भी उसी समस्या का हल ढूंढने के लिए बस आप जैसे ही किसी व्यक्ति का सहारा देख रहा हो। यह सच है कि हमे जरुरत होती है तो बस उठ कर खड़े हो जाने की और फिर परिवर्तन लाने के इस कारवां में तमाम लोग हमारे साथ जुड़ते ही चले जाते हैं। हम इन बेटियों को सलाम करते हैं और उम्मीद करते हैं कि बहुत जल्द इस गाँव का कायापलट पूरी तरह से हो जायेगा और इससे प्रेरणा लेकर अन्य गाँव और समाज के विभिन्न तबके से ताल्लुक रखने वाले लोग भी ऐसे ही तमाम सकारात्मक परिवर्तन को अंजाम देंगे।

Meet Aaron Who Rescues Pets Through Telepathy

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