समाज में जागरूकता की ख़ातिर ये कांस्टेबल चला रहे हैं मुहिम, अपने पैसों से लोगों के बीच बांटते हेलमेट

आपको सड़क हादसों की ना जानें कितनी ख़बरें रोजाना सुनने को मिलती होंगी। आपको भी ये आम लगता होगा पर इसके आंकड़े बहुत भयावह है। देश में हर रोज़ सिर्फ सड़क हादसे से करीब 400 से अधिक लोगों की जान चली जाती है। और इसके करीब 90 प्रतिशत जानें हेलमेट ना पहनने की वजह से होती है। आपकी एक छोटी ही लापरवाही आपकी जान तक तक ले सकती है। सरकार नें भी इसके खिलाफ बहुत सारे नियम-कानून बनाये हैं पर बावजूद इसके लोग लोग इन नियमों को तोड़ खुद की जान खतरे में डालते हैं। रोजना सड़कों पर बिना हेलमेट के दो पहिया वाहन से सफ़र करने वालों के चालन तो पुलिस काट लेती हैं पर उसके बाद भी ना लोग सुधरते हैं ना पुलिस ध्यान देती है। हर कोई बस खानापूर्ति करने में लगा है। पर एक ऐसा पुलिस कांस्टेबल भी है जो चालान तो कटता ही है पर लोगों को जागरूक करनें के लिए अपनें पैसों से हेलमेट भी बटता है।

इनका नाम है कांस्टेबल संदीप कुमार। संदीप मूल रूप से बिहार से छपरा जिले के देवपुरा गाँव के रहनें वाले हैं। संदीप अभी दिल्ली पुलिस में कांस्टेबल के पद पर कार्यरत हैं। दिल्ली आर्म्ड पुलिस की 5वीं वाहिनी में सिपाही संदीप कुमार वर्ष 2003 में दिल्ली पुलिस में भर्ती हुए थीं
लोग उन्हें "हेलमेट मैन" के नाम से जानते हैं। दरअसल संदीप हेलमेट के प्रति लोगो को जागरूक करनें की मुहीम चला रहे हैं। वे लोगों का चालान तो काटते ही हैं पर उसके बाद लोगों को खुद समझते हैं और हेलमेट पहनने की सलाह देते हैं। यातायात पुलिस पर अक्सर ऐसे आरोप लगते रहते हैं की वे यातायात के नियमों का ठीक से पालन नहीं करवाते और घुस लेकर लोगों को छोड़ देते हैं। वहीं दूसरी ओर संदीप पुलिस की छवि को न सिर्फ सुधार रहे हैं बल्कि सामाजिक जागरूकता लानें का काम भी कर रहे हैं।

संदीप लोगों को सिर्फ जागरूक नहीं करते बल्कि लोगों को मुफ़्त में हेलमेट भी बाटते हैं। संदीप अबतक बहुत सारे लोगों को हेलमेट बाट चुके हैं। वे किसी भी विशेष मौके खास कर भाई दूज, रक्षा बंधन आदि पर सड़कों पर निकल कर लोगों को खुद के पैसों से हेलमेट का वितरण करते हैं। यहाँ तक की वे जब कसी के फंक्शन या जन्मदिन में भी जाते हैं तो हेलमेट ही गिफ्ट करते हैं। उसके दो जुड़वाँ बच्चे यश और कीर्ति के जन्मदिवस के मौके पर उन्होंने पीतमपुरा के मधुबन चौक पर बगैर हेलमेट के बाइक पर सवार युवतियों को हेलमेट बांटे थे। सिर्फ दिल्ली में ही नहीं संदीप अपनें गाँव देवपुरा में भी लोगों को हेलमेट बाट चुके हैं और जब भी जाते हैं लोगों को इसके प्रति जागरूक जरूर करते हैं।

दरअसल वर्ष 2015 में उनके गाँव का एक  परिचित 19 वर्षीय युवा रंजीत की मौत सड़क हादसे में हो गई थी। वह भी बगैर हेलमेट पहनें गाड़ी चला रहा था। इस घटना से संदीप बहुत आहत हुए थे। इसके बाद संदीप नें गाँव के हर घर में जागरूकता फैलाई और जिनके पास हेलमेट नहीं था उसे हेलमेट बाटा। संदीप का मानना है की दोपहिया चालकों की इतनी मौत का मुख्य कारण हेड इंजरी होती हैं। लोग अगर हेलमेट पहनें तो उनकी जान बच सकती है। उन्होनें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व परिवहन मंत्री को इस मामले में पत्र भी लिखा। जिसमें उन्होनें गुज़ारिश की है कि बगैर हेलमेट चालकों को चालान करनें के बजाय उन्हें हेलमेट देने भी व्यवस्था की जाये।

संदीप के ऐसी सोचा और समाज के प्रति उनका प्रेम सच में क़ाबिले तारीफ है। आज संदीप के काम को ना केवल सराहा जा रहा हैं बल्कि वे एक रोल मॉडल से रूप में आगे आये हैं।

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