एक ऐसा ऑटो चालक जो दिन में चलता है ऑटो और रात में ऑटो को एम्बुलेंस बना करता हैं जरूरतमंदों की मुफ़्त सेवा

भाग दौड़ भरी ज़िंदगी में आज इंसान के पास खुद के लिए वक़्त नहीं हैं। हर कोई बस पैसा,नाम, शोहरत कमानें के पीछे भाग रहा है। पर इस रेस में भागते-भागते कहीं ना कहीं हमनें अपनीं इंसानियत को ही खो दिया है। आज हम किसी जरूरतमंद को देखते हैं तो मदद करनें के वजाय मुँह फेरनें लगते हैं। कुछ लोग जो मदद करना चाहते हैं उनके पास पर्याप्त सामर्थ नहीं होता और जनके पास सामर्थ होता है वे मदद के लिए आगे नहीं आते। पर पर्याप्त साधन और सामर्थ ही सबकुछ नहीं होता, जरूरत होती हैं तो एक ईमानदार सोच और अच्छी नियत की। आज हम एक ऐसे ही व्यक्ति के बारे में आपको बतानें जा रहे हैं जिसनें दूसरों की मदद और समाज सेवा के लिए अपनी नींद तक की परवाह नहीं की।

हम बात कर रहे हैं मंजूनाथ निंगप्पा पुजारी की। मंजुनाथ कर्नाटक के बेलगाम के रहनें वाले एक साधारण ऑटो चालक हैं। वे ऑटो चला कर ही अपने पुरे परिवार का भरण पोषण करते हैं। मंजुनाथ कैब सर्विस प्रदान करनें वाली कंपनी ओला के लिए ऑटो चलते हैं। दिन में तो वे सामान्य ऑटो चालकों की तरह ऑटों चलते हैं पर रात में उनका ऑटो एक एम्बुलेंस में तब्दील हो जाता है। दरअसल मंजुनाथ जरूरतमंदों के लिए अपनें ऑटों तो एम्बुलेंस के तौर पर चलते हैं और इसके लिए कोई पैसा नहीं लेते। आमतौर पर जब बाकी ऑटो ड्राईवर अपने काम से फ्री होकर घर में आराम करते हैं, तब मंजुनाथ समाजसेवा करते हैं।

मंजुनाथ के दिमाग में यह बात तब आयी जब उनके एक परिचित की हालात गंभीर थी और उन्हें अस्पताल के जाना था। उस वक़्त कोई साधन ना मिल पाने के कारण उन्हें अस्पताल पहुचानें में 2 घंटे लग गए थे। तब मंजुनाथ में सोचा की अमीरों के लिए हर साधन मुहैया होता है पर वक़्त पड़ने पर गरीब को कोई मदद नहीं मिल पाती। पर मंजुनाथ की आर्थिक स्थिति भी अच्छी नहीं थी की वे एक एम्बुलेंस खरीदकर लोगों की मदद करें। तब उन्होंने अपनी माँ की मदद लेकर एक ऑटो लिया। उन्होंने देखा की दिन में लोगों को कोई ना कोई साधन मुहैया हो ही जाता है पर समस्या रात में होती हैं। तो मंजुनाथ दिन में ऑटो चला कर घर का ख़र्च निकलते और रात में लोगों की मदद के लिए एम्बुलेंस चलते।

उनके इस काम में उनकी पत्नी भी उनका पूरा साथ देती हैं। दरअसल मंजुनाथ नें अपनी ऑटों में लोगों के लिए अपना नंबर लिख रखा है ताकि जिसको जरूरत हो वो कॉल कर सके। जब मंजुनाथ ऑटो चला कर घर आते हैं, कोई काम या आराम कर रहे होते हैं तो उस दौरान जो भी फोन आता है उनकी पत्नी ही उठाती हैं। फिर वे मंजुनाथ को सारी डिटेल्स और पता दे देती हैं। और मंजूनाथ अपनी ऑटो एम्बुलेंस लेकर दिए गए पते पर मदद के लिए पहुँच जाते हैं। मंजुनाथ नें मदद के लिए अपना नंबर तो दिया ही है साथ ही साथ वे एक एक गैर सरकारी संगठन आश्रय फाउंडेशन से भी जुड़े हैं। उन्होंने उन्हें इस समस्या के बारे में बताया और कहा की अगर ऐसी कोई भी मदद के लिए कॉल आये तो उन्हें इन्फॉर्म किया जाए। अब आश्रय फाउंडेशन के पास भी आसपास के इलाके के ऐसे किसी जरूरतमंद का फ़ोन आता है तो वे मंजुनाथ को बता देते हैं।

मंजुनाथ ये काम करीब एक साल से लगातार कर रहे हैं। वे कहते हैं  इस काम से मुझे इतनी खुशी मिलती है जितना शायद मुझे किसी दूसरे काम से नहीं मिल सकती। मैं हमेशा से समाज सेवा करना चाहता था, लोगों की मदद करना चाहता था। आज जब मैं किसी जरूरतमंद को अस्पताल छोड़ता हूँ तो जो अंदर से ख़ुशी मिलती है मैं जाहिर नहीं कर सकता, लगता है मैंने किसी के बुरे वक़्त में उसका साथ दिया।

मंजुनाथ समाज को एचआईवी एड्स के प्रति जागरूक भी कर रहे हैं। उन्होंने अपने ऑटो पर ऐसे संदेश लिखवाया हुआ है जो लोगों को इस खतरनाक संक्रमण के प्रति लोगों मो जागरूक करता हैं। इसके अलावा वे अपनी कमाई का एक हिस्सा भी आश्रय फाउंडेशन में लोगों की भलाई के लिए दान देते हैं।

 

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