दर्जनों बार हुई रिजेक्ट पर हार नहीं मानी, महज 34 की उम्र में सीईओ बन रचा इतिहास

विफलता से कभी निराश नहीं होना चाहिए। वास्तव में विफलता सफलता से ज्यादा महत्वपूर्ण होती है। हमारे इतिहास में जितने भी बिजनेसमेन, साइंटिस्ट या महापुरूष हुए है, जीवन में सफल होने से पहले निरंतर कई बार विफल हुए है। जब हम बहुत सारे काम कर रहे हों तो जरुरी नहीं सब सही ही होंगे। लेकिन अगर आप इस वजह से प्रयास करना छोड़ देंगें तो कभी सफल नहीं हो सकते। आज हम एक ऐसी ही शख्सियत की बात करनें जा रहे हैं जिन्होंने कई बार रिजेक्ट होने के बाद भी हार नहीं मानी। आज उन्हें एक जाने माने संस्थान नें अपनी कंपनी का सीईओ बनाया है।

इनका नाम है अंजली सूद। अंजलि  का जन्म यूएस के मिशिगन में स्थित फ्लिंट नामक शहर में हुआ था। तीन साल के उम्र में ही उन्होंने नाटककार बनने का सपना देखा और अपने भाई और बहन से नाटक किया करती थीं। वे अपने बेसमेंट में दो दर्शकों के लिए प्रदर्शन किया करती थी और वे थे उनके माता-पिता। आज अंजली वीमिओ नामक जाने-मानें वीडियो पोर्टल की सीईओ यानी मुख्य कार्यकारी अधिकारी हैं। मात्र 34 साल की उम्र में अंजली सूद दुनिया के सबसे बड़े ऑनलाइन ऐड फ्री वीडियो प्लेटफार्म वीमियो की सीईओ बन गयी हैं। इसके साथ ही वह किसी भी आईएसी (IAC) ब्रांड के सबसे कम उम्र के मुख्य कार्यकारी अधिकारी बन गईं हैं। ग्लोबल मार्केटिंग के वीपी के रूप में शामिल हुईं और तीन वर्षों के बाद जुलाई 2017 मे उन्हें कंपनी का शीर्ष पद दिया गया।

पर अंजली का यह सफर इतना आसान नहीं था। एक वक्त अंजलि एक इन्वेस्टमेंट बैंकर बनने की कोशिश में लगी थी। पेंसिल्वेनिया के व्हार्टन बिजनेस स्कूल विश्वविद्यालय से पढ़ाई करनें के बाद उन्होंने इन्वेस्टमेंट बैंकिंग में दर्जनों नौकरियों के लिए आवेदन भी किया। पर उन्हें किसी नें भी नौकरी नहीं दिया।

अंजली नें एक इंटरव्यू में कहा कि -
"मुझे हर एक बड़े निवेश बैंक से खारिज कर दिया गया। मुझे साक्षात्कार में जो बोला गया वह मैं आज भी नहीं भूल पाई हूँ, उन्होंने मुझे बताया कि मैं बैंकर नहीं बन सकती क्योंकि मेरा व्यक्तित्व बैंकर जैसा नहीं है।" "वह निश्चित रूप से मेरे लिए बहुत निराशा भरा दौर था।"

नकारात्मक प्रतिक्रिया के बावजूद, अंजली नें इन्वेस्टमेंट बैंकिंग में नौकरी की तलाश में हार नहीं मानी। आखिरकार उसने एक छोटी फर्म, सैगेंट एडवाइजर्स के लिए एक विश्लेषक के रूप में नौकरी मिली। इस कंपनी में अंजली ने काम करने के हर एक बारीकियों को सीखा जिसनें बाद में उनके सफल होने में उनकी मदद की।

सागेंट में कुछ साल काम करने के बाद अंजली ने अन्य विकल्पों की भी तलाश शुरू कर दी। इस दौरान उन्होंने हार्वर्ड बिजनेस स्कूल से डिग्री भी हासिल की। उसके बाद उन्होंने मशहूर शॉपिंग पोर्टल अमेज़न को जॉइन कर लिया। उन्होंने वहाँ कुछ वर्षों तक विभिन्न पदों पर काम किया। उस वक़्त लोगों नें उन्हें सलाह दिया कि वे अपना दिमाग ज्यादा विचलित ना करें और अमेज़न के साथ ही टिके रहें। अमेज़न एक बड़ी कंपनी थी इस लिहाज से लोगों के राय भी सही थे। पर अंजली सूद को एक लीडर बनना था जहां वे खुद के डिसिजन्स ले सकें। उन्हें विमिओ से ऑफर मिला और उन्होंने इसे स्वीकार कर लिया। उन्होंने अमेज़न को छोड़ विमिओ जॉइन कर लिया। जहां उन्होंने गोलाबल मार्केटिंग विभाग के हेड के रूप में शुरुआत की।

इस दौरान अंजली नें विमिओ को आगे बढ़ने के लिए बहुत प्रयास किये। वे लगातार ऐसे ऐसे आईडिया दिया करती थी जिससे प्लेटफार्म को इम्प्रूव करने में बहुत फायदा हुआ। कंपनी के लिए उनकी मेहनत और लगन का कितना बड़ा इनाम उन्हें मिलने वाला है उन्होने कभी सोचा भी नहीं होगा। कंपनी के बोर्ड मेंबर्स उनकी सोच से इतने पर प्रभावित हुए कि अंजली सूद को कंपनी का सीईओ बनानें का फैसला लिया गया। जुलाई 2017 में उन्हें यह पद दिया गया। इसके बाद से अंजली लगातार विमिओ को यूजर फ्रेंडली और क्रिएटर फ्रेंडली प्लेटफार्म बनने में लगी हैं।

अंजली सूद की कहानी हमें विफलता से लड़ने का सार देती है। चाहे कितनी भी मुश्किलें आये अगर आपका हौसला बुलंद होगा तो कामियाबी आपके कदम जरूर चूमेगी।

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