इन दो लड़कियों ने फेसबुक के जरिये योजना बनाकर किया मानव तस्करों का सफ़ाया

जिन्दगी में कुछ अलग करने की कोई तय उम्र नहीं होती। और समाज बदलने के लिए जरूरी नहीं कि आपको किसी और के साथ की जरूरत पड़े। इसके लिए एक अकेला इंसान भी काफी है। लेकिन हाँ, यह जरूर है कि समाज की बुराइयां मिटाने की राह की ओर अगर आप चल पड़े हैं तो आपको अपने इरादे मजबूत और इरादा फौलाद जैसा कठोर करना पड़ता है और फिर समाज में परिवर्तन देर सवेर हो ही जाता है। 

17 साल की शिवानी और 18 साल की तेजस्विनी ने इस बात को अपनी जिंदगी में सिद्ध करके दिखाया है। इन दोनों की सूझ-बूझ के कारण कई लड़कियां आज देह व्यापार में जाने से बच गयीं हैं, जिस वजह से कई मासूमों की जिंदगी बर्बाद होने से बचाई जा चुकी है। मासूम बच्चियों को देह व्यापार में धकेलने वाले दलालों को इन दोनों बेटियों ने पुलिस की मदद से गिरफ्तार करवाके, उनके व्यापार का पूर्ण रूप से खात्मा करने में एक अहम योगदान दिया है। उनके इस साहसी कार्य के लिए इन्हें इस साल गणतंत्र दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री द्वारा सम्मानित भी किया गया है। तेजस्विनी और शिवानी के साथ साथ देश के अन्य 25 बच्चों को भी इस मौके पर सम्मानित किया गया। 

फेसबुक के जरिये योजना बनाकर किया तस्करों से संपर्क

ये बात किसी से छिपी नहीं कि सबसे ज्यादा तस्करी का शिकार नेपाल की युवतियां होती हैं। दार्जिलिंग की इन दोनों लड़कियों ने अपनी बहादुरी से नेपाल की गरीब युवतियों को देह व्यापार में धकेलने वाले गिरोह के चंगुल से छुड़वाया। इन दोनों बेटियों ने अपनी सूझ-बूझ से और उन तस्करों को पुलिस के हवाले करने के मकसद से उनसे फेसबुक के जरिये सम्पर्क किया और उनको अपनी फ्रेंड लिस्ट में जोड़ा। सबसे पहले इन दोनों लड़कियों ने इनसे सम्पर्क बढ़ाया, उन्हें भरोसे में लिया और अंत में उन तस्करों को वो यकीन दिलवाने में कामयाब रहीं कि वो दोनो उन तस्करों के बुलावे पर घर से भागने के लिए तैयार हैं। दोनो बेटियों को इस पूरी योजना में पुलिस का पूरा साथ मिला और अंततः बेटियों की सूझ-बूझ और पुलिस की सहायता से इन तस्करों का भांडा फ़ूट ही गया। लेकिन यह सुनने में जितना आसान लग रहा है दरअसल यह कार्य को अंजाम देना उतना आसान नहीं था और इसके लिए उन बेटियों को वो हर काम करने पड़े जिससे वो उन तस्करों को उनपर भरोसा दिलाने में कामयाब रहीं। यहां तक कि तेजस्विनी और शिवानी को अपनी तस्वीरें उन तस्करों को भेजनी पड़ी जिससे तस्करों को यह भरोसा हो जाये कि वो लड़कियां उनके काम आ सकती हैं। तस्करों ने उन्हें यह बताया कि उन दोनों को सभी ग्राहकों की हर मांग को पूरा करना होगा, और उन्हें शारीरिक रूप से संतुष्ट करना पड़ेगा। तेजस्विनी और शिवानी उनकी हर बात में हाँ में हाँ मिलाती रहीं। इसके लिए शिवानी और तेजस्विनी को अपने घर वालों को भी यह भरोसा दिलाना पड़ा कि वो कोई गलत काम नहीं कर रहीं बल्कि उनके प्रयासों से तमाम लड़कियों की जिन्दगी बच सकती है। 

और ऐसे फूटा रैकेट का भांडा

तमाम तरह से भरोसा दिलाने के पश्चयात आखिरकार दोनो के घरवाले भी मान गए। दोनो बेटियों ने तस्करों से फेसबुक पर बातचीत किया जिसके बाद उन दोनों को उक्त आरोपियों ने पश्चिम बंगाल के न्यू जलपाईगुड़ी बुलाया। जब वो दोनो उनके बताए स्थान पर पहुंची तो उन्हें एक महिला अपने साथ लेने आई। बस फिर क्या था, योजना के हिसाब से वहां पहले से मौजूद पुलिस ने उस महिला को अपनी गिरफ्त में लिया और उनसे बाकी तस्करों का ठिकाना पता किया। पुलिस उन सभी तस्करों तक पहुंची और सभी को गिरफ्तार किया। इस दौरान नेपाल से लापता हुई एक युवती भी पुलिस को मिली। अपने इस बहादुरी के लिए शिवानी और तेजस्विनी को गणतंत्र दिवस के दिन बहादुरी के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सम्मानित किया और आज उनकी प्रशंसा पूरे देश में हो रही है। उन्हें मेडल, सर्टिफिकेट के साथ साथ इनामी धनराशि भी मिली है। इतना ही नहीं अब सरकार इन दोनों बेटियों की आगे की पढ़ाई का खर्च भी उठाएगी। तेजस्विनी और शिवानी की सूझ बूझ से कई लड़कियां नरक की जिन्दगी में जाने से बच गयीं। यह बहादुरी का कार्य करके इन दोनों बेटियों ने समाज को यह सीख दी है कि अगर औऱ लड़कियां भी इसी तरह हिम्मत दिखाएँ तो एक दिन जड़ से इन तस्करों का व्यापार बंद हो जाएगा।

वास्तव में दोनो बेटियों की बहादुरी का यह किस्सा हमे यह प्रेरणा देता है कि अगर हम सब समाज की बुराइयों को खत्म करने के लिए खुद से बीड़ा उठाएंगे तो समाज बदल सकता है और इसमें मौजूद बुराइयां मिट सकती हैं। जरूरी है तो बस समाज को बदलने का इरादा करना और जरूरी हौसला बरकरार रखना और फिर समाज में अच्छाई का एक व्यापक संदेश फैलाया जा सकता है।

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