गरीबी को हराकर IIT क्रैक करने वाला यह लड़का अब गांवों की दशा और दिशा बदल रहा है

हम यह जानते हैं कि लगन व कड़ी मेहनत के बाद अगर कोई मनचाही कामयाबी मिले तो तमाम लोग आत्मकेन्द्रित से हो जाते हैं। वे सभी अपने लिए वो सारा कुछ हासिल कर लेना चाहते हैं, जो अब तक उनको असम्भव मालूम पड़ता था। हालाँकि अक्सर ही ऐसा नहीं होता क्योंंकि तमाम लोग समाज के प्रति सम्वेदनशील भी होते हैं, जो अपनी कामयाबी को, अपने निजी सपने को पूरा करने में इस्तेमाल करने के बजाय उसे अपने जैसे वंचितों में बांट देना चाहते हैं। एक ऐसा युवा जो आइआइटी मुंबई में दाखिला पाने के बाद अपना भविष्य उज्ज्वल कर सकता है, अपने घर-परिवार की रंगत बदल सकता है, बैंक बैलेंस जुटा सकता है, लेकिन वो ऐसा करने के बजाये समाज की भलाई के लिए कार्य करने का सोचता है, क्या ऐसा हो सकता है? जी हाँ, ऐसा हो सकता है और हुआ है, और आज ऐसे ही एक व्यक्ति के बारे में हम आपको बताने जा रहे हैं। यह कहानी है उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले के निवासी बृजेश सरोज की, जिन्होंने झुग्गी में रहने वालों का भविष्य सँवारने की बात सोची और समदर्शी फाउंडेशन नाम से एक संस्था की शुरुआत की, जहाँ आज सैकड़ों बच्चों का सुनेहरा भविष्य गढा जा रहा है। आइये उनके बारे में विस्तार से जानते हैं। 

गरीबी में बिताया बचपन, प्रतिभा रही पैसों की मोहताज़ फिर मिली लोगों से मदद

यूपी के प्रतापगढ़ जिले के बृजेश के पिता सूरत में बुनकर का काम करते हैं, पैसों के अभाव के कारण छोटी उम्र में ही बृजेश को काम करना पड़ा। उन्होंने कभी  होटल में काम किया तो कभी टेंट लगाकर पैसे कमाए, लेकिन हार नहीं मानीं, सपने देखना नहीं छोड़ा। हाई स्कूल में 92 प्रतिशत और 12वीं में 95 प्रतिशत पाने वाले ब्रिजेश ने कुछ पैसे जुटाकर आनंद सर की सुपर क्लास ज्वाइन की और एक ही साल बाद वे आइआइटी मुंबई में सेलेक्ट हो गए। सिलेक्शन के बाद असली जंग शुरू हुई, जब उन्हें दाखिला लेने के लिए पैसे जुटाने पड़े। ऐसे समय में मीडिया ने उनका साथ दिया, नेशनल कवरेज मिलने के बाद उन्हें कई नेताओं ने और सेलिब्रिटीज ने सम्पर्क किया, और तो और उन्हें फंड देने के लिए विदेश से भी कॉल आये। उन्हें उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने बुलाया और सहायता की। बृजेश के साथ-साथ उनके गाँव में भी विकास हुआ, वहां सडकें बनीं, बिजली पहुंची।

नीच जाती के होने के कारण मिला असम्मान, ठान लिया कि कुछ करके दिखाएंगे

बृजेश कहते हैं कि नीच जाति होने के कारण गाँव में उन्हें और उनके परिवार को सम्मान नहीं मिलता था, लेकिन उन्होंने ठान लिया था कि एक दिन वो सब बदल देंगे। इस दौरान बृजेश को आमिर खान ने भी बुलाया और सहायता की और जल्द ही बृजेश पर एक फिल्म भी बनने वाली है। अब पिछले 3 साल से बृजेश मुंबई में हैं और जब उनका दाखिला हुआ तब उन्होंने ठान लिया था कि वो अपने जैसे तमाम बच्चों का भविष्य सुधारेंगे, ताकि जो उनके साथ हुआ, वो किसी और के साथ न हो। वो कहते हैं, "मुझे तो मीडिया के कारण फंड्स मिल गए लेकिन ऐसा हर किसी के साथ नहीं होता, इसीलिए मैंने समदर्शी नाम से संस्था बनाई, समदर्शी मतलब सब बराबर।" वो आगे कहते हैं, "मेरे एनजीओ में हर जाति धर्म के बच्चे पढने आते हैं, मैं उन्हें पढ़ाकर उनका दाखिला सरकारी स्कूल में करवाता हूँ।"

तीन गांव भी गोद लिये, मुहैया करा रहे हैं मूलभूत सुविधाएँ

इतना ही नहीं उन्होंने कसारा में तीन गांवों को गोद ले रखा है, जहाँ वो सारी बुनियादी सुविधाएँ पहुंचाते हैं। वो बताते हैं कि वे गाँव पहाड़ पर हैं जिस वजह से वहां रह रहे लोगों को पानी और तमाम चीजों के लिए नीचे जाना पड़ता था। बृजेश ने वहां पम्पिंग की सुविधा की ताकि गाँव वालों को पानी लेने नीचे न जाना पड़े और चक्की लगवाई ताकि उन्हें आटा भी वहीँ मिल जाए, बृजेश कहते हैं मैं प्लेसमेंट लेकर सिर्फ अपना भविष्य और परिवार की दशा ही नहीं सुधारना चाहता, मैं सिस्टम में आना चाहता हूँ ताकि समाज बदल सकूँ और लोगों को सरकार और सिस्टम पर भरोसा दोबारा आ सके।

जहाँ आज के समय में तमाम युवा प्लेसमेंट लेकर विदेश जाते हैं वहीँ बृजेश जैसे युवा अपने देश में रहकर सिस्टम में बदलाव लाना चाहते हैं, ऐसे युवा ही असल मायने में किसी भी देश- समाज के सच्चे निधि हो सकते हैं। बृजेश जैसी सोच वाले लोग ही नई पीढ़ी को और बेहतर बनाने में सच्चे मार्गदर्शक भी साबित हो सकते हैं। बृजेश के कारण आज तमाम बच्चों को मुफ्त में शिक्षा मिल रही है जिससे आगे उनका दाखिला किसी अच्छे संस्थान में किया जा सकेगा। बृजेश ने बचपन से ही गरीबी देखी, पैसे और सुख-सुविधा का अभाव रहा लेकिन उन्होंने उन परिस्थितियों से हार नहीं मानीं और आज वो अपने सपनों की मंजिल पाने में बस कुछ ही दूर हैं।

 

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