कॉलेज ड्रॉप-आउट ने देश भर में बुक-स्टोर की श्रृंखला खोली और पुस्तक प्रेमियों के लिए शानदार ब्रांड खड़ा किया

जिनके पास विज़न होता है उनमें अनिश्चितता के पार और भविष्य के गर्भ में देखने की कला होती है, ऐसी दृष्टि जो साधारण लोगों के पास नहीं होती l आज हम जिनकी कहानी लेकर आये हैं उन्होंने एक बुक-स्टोर की श्रृंखला बनाई l लोग उन्हें मूर्ख समझते और कहते कि पुस्तकें बेचना अपने पैर पर कुल्हाड़ी मारने जैसा है l  इस बिज़नेस में नुकसान ही नुकसान हैl  परंतु इस व्यक्ति की सोच थी कि चाहे कितनी भी आलोचना और चुनौतियाँ सामने आ जाएँ अपने पथ पर अडिग रहना l बिना किसी मैनजमेंट की डिग्री के और बिना बिज़नेस पृष्ठभूमि के इन्होंने भारत की सबसे बड़ी बुक-स्टोर की श्रृंखला बना डाली l इनकी इस लड़ी में  83 मोती गुथे हुए हैं l 

यह कहानी एक इंजिनीरिंग कॉलेज के ड्रॉप-आउट आर श्रीराम की है जिन्होंने बहुत से काम में अपना हाथ आज़माया एडवेर्टाइज़िंग, मार्किट रिसर्च और जर्नलिज्म परंतु वह सफल नहीं हो पाए l फिर उन्होंने 1988 में चेन्नई में एक बुक-स्टोर खोला जिसका नाम लैंडमार्क रखा और इस काम में वे पूरी तरीके से आनंद लेने लगे l वह ग्राहकों के साथ बातचीत कर उनकी  आवश्यकताओं को समझने का प्रयास करते l दिन-ब-दिन उनका बुक-स्टोर पुस्तक प्रेमियों के लिए पसंदीदा बनता चला गया l 

एक दिन एक ग्राहक रामप्रसाद श्रीराम के पास आये  कहा कि आप हैदराबाद में एक बुक-स्टोर खोलें l श्रीराम में इतना साहस नहीं था कि वे अकेले इस दुष्कर कार्य को संपन्न कर पातेl तब उन्होंने अपने साथ काम करने वाले दो साथियों अनीता और सुदर्शन के साथ बात की और उनसे मदद मांगी l दोनों तुरंत ही तैयार हो गए l तीनों ने मिलकर 1989 में हैदराबाद में वाल्देन नाम का एक बुक-स्टोर खोला l और यहाँ से उनके  आंत्रप्रेन्योरशिप  की यात्रा शुरू हुई l 

“शुक्र है कि वाल्देन जल्द ही सफलता की राह पर चल पड़ा और मुझमें यह कहने के लिए विश्वास जगाया कि “अब आगे क्या” और मुझे उससे प्रेरणा मिली कि मैं अपना खुद के  बुक-स्टोर की श्रृंखला खोलूँ l  -श्रीराम 

पहले बैंगलोर का हिग्गिन बोथम्स, मुम्बई का स्ट्रैंड, दिल्ली का ओम ऐसे कुछ थोड़े ही बुक-शॉप थे पर कोई भी शॉप राष्ट्रीय स्तर का नहीं था l श्रीराम ने इसी अवसर का लाभ उठाया और बुक-स्टोर की श्रृंखला खोलने का निश्चय किया l  

इसके लिए श्रीराम ने फ्रैंचाइज़ी मॉडल पर काम किया l उन्हें कोई भी बिज़नेस के बारे में सिखाने वाला नहीं था परंतु उन्होंने पुस्तकें पढ़-पढ़ कर जरूरी ज्ञान हासिल किया l  अपना बुक-स्टोर खोलने के लिए श्रीराम ने मुम्बई की ओर रुख किया पर यह इतना आसान नहीं  था l बैंक भी सिक्योरिटी चाहता था l तब उन्हें मुम्बई के एक पब्लिशर दीपक मीरचंदानी मिले l उनके साथ श्रीराम बुक-स्टोर के एक नए संकल्पना पर विचार-विमर्श किया और उन्हें अपने विश्वास में लिया l मीरचंदानी राज़ी हो गए और बिज़नेस के  लिए पूंजी भी मुहैय्या कराया l 1992 में अनीता और श्रीराम ने मिलकर मुम्बई में  क्रॉस-वर्ड नामक बुक-स्टोर शुरू किया l 

सफलता पूर्वक इस कंपनी के 15 साल बाद लोगों की यह सोच बदल बदल गई और उन्होंने यह माना कि बुक स्टोर की श्रृंखला के बिज़नेस में भी फायदा है l उसने अपनी सारे ब्रांच और बिज़नेस को शॉपर स्टॉप को बेच दिया l आगे चल कर  उन्होंने “नेक्स्ट प्रैक्टिस रिटेल” नाम से कंसल्टेंसी फर्म खोला l 

एक कॉलेज ड्रॉपआउट जिसने भारत के सबसे बड़े  बुक-स्टोर की श्रृंखला की नींव रखी l इस बुक-स्टोर की देश भर में 83 ब्रांचेस हैं l क्रॉसवर्ड पायरेसी की समस्या से निज़ात दिलाता हैl यह एक महान व्यवसाय का निर्माण करता है और साथ ही साथ हजारों पुस्तक प्रेमियों के  आदर्श  का निर्माण करता है l 

 

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