एमबीए के बाद भी उस लड़की ने इंस्पेक्टर बनना पसंद किया ताकि अपराधियों को सबक सीखा सके

जो लोग शांत रहकर कड़ी मेहनत करते हैं, उनकी जय-जयकार सारे विश्व के लोग करते हैं l ऐसे ही राजस्थान के चित्तौड़ की एक लेडी सिंघम है जिसे सारे ऑफिसर उनके साहस, सच्चाई और कठोर परिश्रम के लिए उसकी प्रशंसा करते नहीं थकते l आज हम मिलते हैं राजस्थान राज्य के रोड ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन की एक ऊर्जावान इंस्पेक्टर ललिता खींची से l दोपहर तीन बजे की चिलचिलाती धूप हो या एक बजे की अँधेरी रात, यह मेहनती ऑफिसर हमेशा अपने ड्यूटी पर मुस्तैदी से तैनात रहती हैl 

ललिता कोई साधारण ऑफिसर नहीं है क्योंकि उनके पास बहुत सारी चमकती डिग्रियां भी हैं l एमबीए की डिग्री के साथ अगर वह चाहतीं तो कॉरपोरेट जगत की नौकरी कर विलासिता की ज़िंदगी शानदार ढंग से जी सकती थीं परंतु उन्होंने हमेशा भीड़ से हटकर एक अलग कैरियर को पसंद किया l 

अपने विश्वास को साबित करने के लिए कि महिलाएं किसी भी कठिन परिस्थिति को भी संभाल सकती है और चुनौती भरी भूमिका भी निभा सकती है; उन्होंने यह कैरियर चुना l ललिता ने राजस्थान स्टेट रोड ट्रांसपोर्ट कारपोरेशन में इंस्पेक्टर के पद पर आसीन हुई जहाँ दिन और रात किसी भी समय गाड़ियों की सरप्राइज चेकिंग की जाती थी l रोडवेज बस ऑपरेटर्स कहते हैं कि उन्होंने उन्हें रात के दो बजे भी  सरप्राइज चेकिंग के लिए मुस्तैद खड़े देखा है l उनके रहते कोई भी गलत सामान अपनी गाड़ी में नहीं ले जा सकता था l 

उदयपुर डिपो में वह असिस्टेंट ट्रैफिक इंस्पेक्टर के पद पर आसीन हैं l वह अपने डिपार्टमेन्ट के लिए अपने आप में अनूठे व्यक्तित्व की स्वामिनी रही हैं और अपने सभी महिला ऑफिसर के लिए एक रोल मॉडल की तरह हैं l उनका काम दिल्ली, मध्यप्रदेश, हरियाणा, गुजरात और दूसरे राज्यों की सड़कों से आने वाली सभी गाड़ियों तक रहता है l अपने काम करने के अपने बिंदास तरीके, सख्त दृष्टिकोण और कठिन मेहनत से उन्होंने एक नया नाम पाया है -लेडी सिंघम 

ललिता अपनी नौकरी के लिए सबसे युवा और ज्यादा पढ़ी-लिखी हैं l इसके साथ-साथ काम के प्रति उनकी लगन ही उन्हें निडर रवैया देती है l अभी हाल में ही उन्होंने एक दिन में 46 बस ऑपरेटर्स के खिलाफ रिपोर्ट किया l डिपार्टमेंट के अनुसार एक महीने में 20 रिपोर्ट काफी अच्छा प्रदर्शन माना जाता है l परन्तु ललिता उन सबसे काफ़ी आगे निकल चुकी है l 

शासन प्रबंध के जनरल मैनेजर राकेश राजौरिया कहते हैं कि ललिता के जैसा पूरे जिले में कोई नहीं है l उन्होंने कभी भी किसी भी चेकिंग के आर्डर को नहीं ठुकराया चाहे वह सुबह के चार बजे हों या देर रात हो l यह सभी रोडवेज़ कर्मचारियों के लिए एक उदाहरण पेश करती हैं l  

 

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