पूर्वोत्तर की संस्कृति से दुनिया को अबगत करने के लिए इस शख्स नें शुरू किया अनूठा स्टार्टअप

हमारे भारतीय परिवारों के लिए हमारी संस्कृति एक अभिन्न अंग है। भारत के अलग अलग क्षेत्रों, वर्गों की अपनी-अपनी एक अलग सांस्कृतिक पहचान हैं। कहते हैं भारत में कोस-कोस पर बदले पानी, चार कोस पर वाणी। यही हमारी संस्कृति की खासियत भी है और हमें उसपर गर्व भी है। क्योंकि हमारी संस्कृति हमारी पहचान है।
लेकिन अफसोस की बात है कि, भारत के पूर्वोत्तर राज्यों जिसे सात बहनें भी कहा जाता है, उन्हें सांस्कृतिक रूप से पहचान का और तबज्जो नहीं मिलती है। पिछले कई सालों उन राज्यो के साथ अलग और पराये की तरह बर्ताब किया जा रहा है।

अगर आप भारत के पूर्वोत्तर राज्यों में जाते हैं, तो आपको वहां  बहुत ही सुन्दर संस्कृतियों के साथ आश्चर्यचकित कर देने वाली विविधता देखने को मिलती है। हर क्षेत्र मो अपनी अलग संस्कृति है, संगीत में भी कई विविधताएँ हैं। पूर्वोत्तर भारत सांस्कृतिक दृष्टिकोण से भारत के अन्य राज्यों से भिन्न है। प्रत्येक जनजाति की अपनी विशेष तकनीक और हस्तकला का तरीका होता है। हर किसी का खानपान और पहनने का तरीका अलग।

पर एक उद्यमी के प्रयासों की वजह से आज पूर्वोत्तर के संस्कृति को पहचान मिल रही है। इनका नाम है ध्रुवा ज्योति डेका, जिन्होंने पूर्वोत्तर के संस्कृति में निवेश की दिलचस्पी दिखाई। आज, उनके स्टार्टअप के कारण, पूर्वोत्तर संस्कृतियों को एक अलग पहचान मिल रही है। ध्रुबा, जिन्होंने पांडिचेरी विश्वविद्यालय से रसायन विज्ञान में एमएससी किया था। वे मूलतः असम के बारपेटा जिले के सार्थेबारी गांव के रहने वाले हैं। यह ऐसा क्षेत्र है जो अपने ब्रास और बेल धातु के हस्तकला के लिए प्रसिद्ध है। 

2017 में उन्होंने ब्रह्मपुत्र फैबल्स नाम से अपना स्वयं का स्टार्टअप शुरू किया। यह एक ई-कॉमर्स पोर्टल है जिस पर पूर्वोत्तर राज्यों के पौराणिक और परंपरागत हस्तशिल्प की चीज़ें बेची जाती हैं। उन्हें यह आईडिया पहली बार अपने कॉलेज के फेस्ट के दौरान आया, जिसमें उन्होंने और उसके दोस्तों ने अपने राज्यों से पारंपरिक उत्पादों को बेचने के लिए स्टॉल लगाये थे।

पर ध्रुवा पूर्वोत्तर राज्यों के पारंपरिक वस्तुओं की अविश्वसनीय मांग को देख आश्चर्यचकित थे। उनकी मां भी इन स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देती थी। यह इस बात नें उनके अंदर एक साहस भर दिया और उन्होंने लक्ष्य बनाया की वे इस हैंडीक्राफ्ट को देश भर में प्रचारित प्रसारित करेंगे और ग्राहकों को आसान तरीके से पहुँच बनाएंगे। ताकि ज्यादा से ज्यादा ग्राहक उनके उत्पाद को देख व खरीद सकें। यह स्टार्टअप का आईडिया बहुत ही अच्छा था लेकिन इसके रास्ते में चुनौतियों और बाधाएं भी थीं।

ध्रुबा ने एक बेबसाइट को बताया कि,
"चूंकि मैं ई-कॉमर्स से पूरी तरह अनभिज्ञ था, पर मुझे एहसास हुआ कि इसे इंटरनेट पर ले जाना चाहिए। मुझे वेबसाइट बननें में मदद करने के लिए किसी की आवश्यकता थी। इसलिए मैंने इसे सोशल मीडिया पर इसे डाल दिया और मेरे स्कूलों में से एक मित्र नें वेबसाइट विकसित करने की पेशकश की"

उन्होंने पहले अपने गांव से स्थानीय कारीगरों से संपर्क किया। अन्य पूर्वोत्तर राज्यों के उनके कॉलेज के दोस्तों ने उन्हें विभिन्न क्षेत्रों से कारीगरों की खोज करनें में मदद की। अपनी जमा पूंजी और एक छोटे से लोन से उन्होने अपने स्टार्टअप को शुरू किया।

उन्होंने कहा कि
"अब तक मैंने वेबसाइट के लिए किसी तरह का एड या प्रोमोशन नहीं किया, मुझे इसकी आवश्यकता ही नहीं पड़ी। सोशल मीडिया का लाभ यह है कि कोई भी खुद के उत्पाद मल निर्बाध रूप से बाजार में बेच सकता है।"

"मैं गर्व से बता सकता हूं कि एक वर्ष की अवधि में ही हमने भारत के लगभग हर राज्य में ग्राहकों को अपने उत्पादों को भेजने में कामयाबी हासिल की है"

आज ध्रुवा के प्रयासों की वजह से ही ब्रह्मपुत्र फैबल्स को आईआईएम कलकत्ता इनोवेशन पार्क द्वारा देश भर में टॉप 3,000 स्टार्ट-अप / स्मार्ट आईडिया में से एक के रूप में चुना गया है। ध्रुवा की भविष्य की रणनीति में सभी उत्तरपूर्वी पारंपरिक उत्पादों को ऑनलाइन बेचने के साथ-साथ वाटर हाईकैंथ और जूट के बैग को बढ़ावा देना भी शामिल हैं। उनका कहना है कि वे देश के हर राज्य तक इन परंपरा और संस्कृति को पहुंचाना चाहते हैं। वे ब्रह्मपुत्र फैबल्स को एक क्षेत्रीय ऑनलाइन साइट नहीं बल्कि हैंडीक्राफ्ट में एक राष्ट्रीय व चर्चित ई-कॉमर्स साइट बनाना चाहते हैं। ध्रुवा का कहना है कि वे यह केवल व्यापार और मुनाफे के लिए नहीं कर रहे हैं। बल्कि ब्रह्मपुत्र फैबल्स पूरे देश के लोगों को अपनी सांस्कृतिक प्रथाओं से अबगत करने के उद्देश्य से खुला है।  जिससे आज के युवाओं को भी उन संस्कृतियों के प्रति जागरूकता और समझ हो सके। साथ ही उन कारीगरों को भी मुनाफा मिल सके जिन्होंने इन परंपरागत हस्तकलाओं को अबतक ज़िंदा रखा है।

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