भूखों को रोटी खिलाने के उद्देश्य से युवाओं नें शुरू किया 'अनोखा बैंक'

आज भारत उन देशों में हैं जहाँ गरीब और भुखमरी सर्वव्यप्त है।दुनिया में भुखमरी बढ़ रही है और भूखे लोगों की करीब 23 फीसदी आबादी भारत में रहती है। सयुंक्त राष्ट्र खाद्य एवं कृषि संगठन की 2017 की रिपोर्ट के अनुसार भारत में कुपोषित लोगों की संख्या 19.07 करोड़ है, जो कि विश्व भर में सबसे अधिक है। आज आपको हर चौक-चौराहे,मंदिर-मस्जिद,बस-ट्रेन कोई भी ऐसी जगह नहीं होगी जहाँ आपको भिखारी ना मिले। यह हमारे देश की बढ़ रहे गरीबी को समझने के लिए काफी है। ना जाने ऐसे कितने लोग हैं जिनको दो जून की रोटी भी नसीब नहीं हो पाती। भूखों में इस दर्द को कुछ युवा देख नहीं पाया और उसे दूर करने के लिए एक पहल की शुरुआत की। आज इसी सोच के साथ भूखों का पेट भर रहा है दरभंगा का 'रोटी बैंक'।

बिहार में एक छोटे सा शहर है दरभंगा, यहाँ में कुछ युवाओं की एक टोली ने गरीबों की भूख मिटाने के लोए कुछ महीने शुरू किया एक अनोखा बैंक "रोटी बैंक"। इस संस्था के एक दर्जन सदस्य पिछले आठ महीने से घर-घर से बची रोटी जमा कर गरीबों को निवाला मुहैया करा रहे हैं। ये युवा रोटी बैंक बनाकर निःस्वार्थ भाव से गरीब, लाचार और बेबस लोगों के पेट की आग बुझाने में लगे हैं। बनारस में रोटी बैंक देखकर कुछ युवाओं नें दरभंगा में भी इसे शुरू करने की ठानी।  यह संस्था हर दिन पांच सौ से अधिक गरीब लोगों को रात का भोजन उनके घर पहुंचाती है। शुरूआत में कुछ लोगों ने इन युवाओं का खूब मजाक उड़ाया। लेकिन कई लोगों के अलावा सोशल मीडिया पर मिले लोगों की सराहना से इन युवाओं को खूब ऊर्जा और प्रेरणा मिली। जिसके बल पर आज यह टीम पूरे जिले में मशहूर हो गयी है, इनसे लाभान्वित लोग इन्हें दुआ देते नहीं थकते।

रोटी बैंक की टीम में कुछ युवा और छात्र जुड़े हुए हैं हो लोगों द्वारा दान किये गए और पार्टियों में बचे खाने को कलेक्ट करके उन्हें गरीबों तक पहुंचाते हैं। दअरसल इन्होंने सोशल मीडिया और बैनर-पोस्टर के जरिये अपने मोबाइल नम्बर को पूरे शहर में फैला दिया है।  उन्होंने लोगो से स्लोगल के माध्यम से अपील की है कि बचे भोजन फेंकें नहीं, सौंप दें रोटी बैंक को। उसमें साफ लिखा है कि आप भी इस सामाजिक और पुण्य के काम में मदद कर सकते हैं।  जसके बाद विभिन्न मोहल्लावासी फोन कर इस टीम के सदस्यों को अपने यहां बचे हुए खाना देने बुलाते हैं। कई रेस्टोरेंट और होटल तो इनके प्रयास के कायल हो गए हैं। ये रोज रात का खाना इन्हें मुहैया कराते हैं। शाम होते ही रोटी बैंक के सदस्यों को लोगों का फोन आना शुरू हो जाता है। 

फोन करने वालों का पता लेकर रोटी बैंक के सदस्य खाना इकट्ठा कर लेते हैं। फिर सभी खानों की पैकिंग करते हैं।इसके बाद रात के अंधेरे में रोटी बैंक के सदस्य निकल पड़ते हैं। जहां भी ऐसे लाचार लोग इन्हें दिखाई देते हैं, फौरन गाड़ी रोक कर उन्हें खाना देते हैं। रोटी बैंक की खास बात यह है कि इसमें काम करने वाले सभी सदस्य या तो छात्र है या अपना कारोबार करते हैं। खुद के काम से निपटने के बाद वे रोटी बैंक का यह नेक काम करते हैं। वार्ड 21 की पार्षद मधुबाला सिन्हा इस कार्य से इतनी प्रभावित हुई कि उन्होंने बर्तनों से सुसज्जित एक मारुति वैन टीम को उपलब्ध कराई है। इसमें खाना ढककर रखने के लिए चार बर्तन अलग से हैं।

इंसानियत का फर्ज निभायेंगे, भूखे को रोटी खिलायेंगे की सोच के साथ आज दरभंगा का यह रोटी बैंक सैकड़ों गरीब और भूखों के लिए किसी बरदान से कम नहीं है। अन्न को फेंकने के बदले भूखे को उपलब्ध कराने की यह पहल बहुत कबीले तारीफ है। आज देश के हर हिस्से में इस तरह के नेक पहल की आवश्यकता है।

(यह कहानी संदीप कपूर द्वारा सबमिट किया गया है)

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