नामी कंपनियों की नौकरी छोड़कर ई-बुक्स के ज़रिये सफल स्टार्टअप बनाने वाली जया

मनुष्य की सबसे अच्छे दोस्तों में पुस्तकों का स्थान सबसे अहम है। डिजिटल युग में जहां सब चीजों का कंप्यूटरीकरण हो रहा है ऐसे में मनुष्य के सबसे अच्छे दोस्तों में से एक किताबों को डिजिटल बनाने के आईडिया को लेकर पोथी डॉट कॉम की शुरुआत करने वाली जया झा को अपनी सफलता का अंदाजा भली-भांति था। गूगल और IBM जैसी बड़ी कंपनियों के साथ काम कर चुकीं जया ने कानपुर से आईआईटी और एमबीए आईआईएम लखनऊ से किया है जया के मन में हमेशा अपने बल पर कुछ करने की भावना का यह नतीजा रहा की जॉब करते हुए भी उन्होंने अपना स्‍टार्टअप शुरू करने के लिए हमेशा सही मौके का इंतजार किया।

2008 में जया ने ई बुक्स के महत्‍व को आगे आने वाले समय में समझते हुए अपने साथी अभय अग्रवाल की सहायता से इंस्टास्क्राइब शुरू किया है जहां लेखक और पब्लिशर्स इस प्‍लेटफार्म के माध्यम से ही बुक पब्लिश कर सकते हैं इसका तरीका भी बिलकुल सरल बनाया गया है।

पोथी की शुरुआत भी रीडर्स और लेखकों की जरूरत को समझते हुए की गई। यहां दिखाई गई बुक्स को प्रिंट करवाया जा सकता है। लेखक यहां हजारों किताबें छपवाए बिना अपनी बुक की एडवरटाइजिंग करके मांग के अनुसार ई बुक्स को पब्लिश करवा सकते हैं। व्यक्ति विशेष, संस्थाएं, एनजीओ और पब्लिशर्स सभी के लिए प्लेटफार्म सुविधा प्रदान कर रहा है। इंस्टास्क्राइब पर साइन अप करने वाले यूजर्स निशुल्क 3 महीने तक इसे प्रयोग में ला सकते हैं हां अगर वह देना चाहे तो अपनी इच्छा से जो शुल्क चाहते हैं वह दे सकते हैं। पोथी और इंस्टास्क्राइब को अपने पांच साथियों के अलावा कुछ एडिटिंग, डिजाइनिंग एवं तकनीकी क्षेत्र के फ्रीलांसर्स के साथ जया संभाल रही हैं।

बिहार की रहने वाली जया के पिता बैंक से रिटायर्ड मध्यम वर्गीय सर्विस क्लास परिवार के बच्चों की तरह जया में यह विचार कूट-कूटकर भरे गए थे कि अपने ज्ञान और मेहनत के बल पर ही तुम्हें जीवन में कुछ करना है भाग्य में अचानक मिलने ऐसा कुछ नहीं है उच्च शिक्षा के लिए हॉस्टल में रहकर जया ने जो लालन पोषण और त्याग अपने माता पिता से पाया उसी के कारण वह आज कुछ अलग हटकर कर पाईं क्योंकि इन बीते सालों में जया की निर्णय लेने की क्षमता बहुत निखर चुकी थी।

पब्लिशिंग की जहां तक बात करें तो विचारों को किताबों के रूप में परिवर्तित करना कोई आसान काम नहीं है। पहले विचारों को लिखना, फिर संजोना, फिर गलतियां दूर करके प्रिंट करने तक एक पुस्तक को एक नहीं अनेक क्रियाओं से गुजरना पड़ता है। ई बुक एक पुस्तक का डिजिटल रूप मात्र है इसीलिए ई बुक तक पहुंचने के लिए भी यह सब क्रियाएं तो करनी ही पड़ती हैं। ऐसे में यूजर्स की जरुरत समझकर सौम्‍य भाव से उन्हें पूरा करना जया अब अच्छी तरह से सीख चुकी हैं।

कोई भी काम कर गुजरने के लिए बस इतना सोचना ही काफी है कि “मुझे यह काम करना अच्छा लगता है” ऐसा मानना है जया का।

Share This Article
537