सेनेटरी पैड से होने वाले प्रदूषण का खात्मा करने के लिए तैयार है इस महिला का अनूठा आविष्कार

आज हम बड़ी तेजी से तरक्की की ओर बढ़ रहे हैं और मानसिक रूप से आजाद हो रहे हैं। हमारे समाज में बहुत ही आवश्यक लेकिन शर्म का विषय समझे जाने वाले मुद्दों पर लोग आज खुलकर अपनी आवाज बुलंद करने लगे हैं। कुछ दिनों से टीवी पर अक्षय कुमार की आने वाली फ़िल्म पैडमैन का प्रोमो दिखाया जा रहा है जिसे लोग बहुत पसंद कर रहे हैं। साथ ही लोग सेनेटरी नैपकिन के उपयोग और महिला स्वास्थ्य के विषय में खुलकर बात कर रहे हैं। हमारी आज की कहानी भी कुछ ऐसी ही है जिसने समाज को नयी दिशा दी और ये साबित किया कि जिस-जिस पर ये जग हँसा है उन्होंने ही इतिहास रचा है। हम बात कर रहे हैं बेंगलुरु की सामाजिक कार्यकर्ता निशा नाजरे की जिन्होंने सेनेटरी नैपकिन डिस्पोज करने की मशीन बनाई है।

सेनेटरी नैपकिन प्रत्येक लड़की की आवश्यकता है। लेकिन इनके अधिक बढ़ते उपयोग से देश में हर साल लगभग 113,000 सेनेटरी पैड कचरे में तब्दील होकर पर्यावरण को नुकसान पहुँचा रहे हैं।

निशा ने इस समस्या से छुटकारा पाने के लिए एक ऐसी मशीन का निर्माण किया है जिससे सेनेटरी नैपकिन का उपयोग भी महिलाएं निरंतर कर पाएंगी और पर्यावरण भी दूषित नहीं होगा।

आपको बता दें कि सेनेटरी नैपकिन बनाने में कुछ मात्रा में प्लास्टिक का प्रयोग भी किया जाता है और हम सभी जानते हैं कि प्लास्टिक को नष्ट कर पाना नामुमकिन है इतना ही नहीं प्लास्टिक हजारों साल तक अपनी सामान्य अवस्था में रहते हुए पर्यावरण को नुकसान पहुँचाता रहता है।

लेकिन कहते हैं न “आवश्यकता आविष्कार की जननी होती है” एक बार निशा कुछ कचरे और सेनेटरी पैड को एक सफाई कर्मी को दे रही थी तो अचानक ही उनके मन में ख्याल आया कि एक इंसान के हाथों में इतनी गंदगी क्यों दी जाए? फिर उन्होंने सोचा कि जब हम अपनी ही गंदगी को खुद ही नहीं छूना चाहते हैं तो किसी और के हाथों में उसे क्यों दिया जाए और क्या ऐसा करना सही है?

उसके बाद निशा ने ठान लिया की इस समस्या को अब सुलझाना ही होगा। 3 साल की मेहनत के बाद उनकी कंपनी जुकी फेम केअर प्राइवेट लिमिटेड एक पॉल्यूशन फ्री सेनेटरी डिस्पोज मशीन तैयार करने में सफल हुई।

इसी साल जनवरी 2018 में निशा की बनाई मशीन का परीक्षण शुरू होने वाला है। उसके परीक्षण के बाद निशा की योजना है कि “इन सेनेटरी डिस्पोजल की मशीनों को रेलवे स्टेशन, अपार्टमेंट कॉम्प्लेक्स, स्कूलों और बीबीएमपी के ऑफिसों में लगाया जाए जिससे की इसका उपयोग सरलता से किया जा सकें। उनकी कम्पनी द्वारा बनाई गयी इस मशीन में कई सारे चैंबर्स बनाए गए हैं जिसमें पैड को डालने पर पैड जलने लगते है और पैड से निकलने वाले धुएं को कंट्रोल करने के लिए उसमें पानी का इस्तेमाल किया गया है।”

निशा बताती हैं कि ” हमारी मशीन से बिल्कुल भी प्रदूषण नहीं होता है। बल्कि यह पर्यावरण को दूषित होने से बचाती है।”

निशा नजारे की सेनेटरी डिस्पोज करने की मशीन से पैड आसानी से डिस्पोज हो जाएंगे साथ ही पर्यावरण प्रदूषण की समस्या का भी समाधान होगा। वाकई निशा की सोच ने साबित कर दिया है कि सोच बदलो तभी देश बदलेगा।

 

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