14 बार असफल होने के बाद मिले एक शानदार आइडिया से तीन दोस्तों ने बना ली करोड़ों की कंपनी

मातृभूमि की भाषा यानी मातृभाषा का महत्व अन्य सभी भाषाओं से अधिक होता है। भारत के विभिन्न प्रांतों में रहने वाले लोग सबसे ज्यादा संतुष्ट और खुश अपने राज्य की भाषा में बात कर के ही होते हैं। हालांकि सोशल मीडिया की बात करें तो हमारे देश में अभी अंग्रेजी का ज्यादा चलन है। लेकिन बदलती तकनीक के बदलते समीकरणों के बीच शेयरचैट नामक एक ऐप विकसित हुआ है जिसे क्षेत्रीय भाषाओं को ध्यान में रखकर बनाया गया है।

यहां शहरी लोग और गांव के लोग अपनी-अपनी भाषाओं में अपने कंटेंट को शेयर कर रहे हैं। क्षेत्रीय भाषाओं का प्रयोग करने वाले लोगों के लिए तो शेयरचैट जैसे वरदान ही है। शेयर चैट के आविष्कारक, फरीद एहसान लखनऊ से, भानु प्रताप सिंह गोरखपुर से और अंकुश सचदेवा गाजियाबाद से हैं, जो कि आईआईटी, कानपुर से इंजीनियरिंग की पढ़ाई भी कर रहे हैं।

अंकुश ने केनफ़ोलिओज़ से खास बातचीत में बताया कि शेयरचैट तक पहुंचने की कहानी बेहद दिलचस्प है। इससे पहले तीनों दोस्त 13 अलग-अलग ऐप्‍स पर काम कर थक चुके थे। आखिर में एक ऐप ‘ओपिनियन’ नाम से बनाई। यह तर्क-वितर्क और तीखी नोंकझोंक का प्लेटफार्म था जहां विभिन्न विषयों पर यूजर्स अपने विचार रखते थे। 28 नवंबर 2014 को एक अजीब वाकया हुआ। ओपिनियन ऐप में डिस्‍कशन के दौरान सचिन तेंदुलकर के बारे में एक यूजर ने लिखा कि वो सचिन के चहेतों का एक व्हाट्सअप ग्रुप बना रहा है, फिर क्या था हजारों लोगों ने पब्लिक प्लेटफॉर्म पर अपने फोन नंबर भेजने शुरू कर दिए। अंकुश ने इन्‍हीं नंबरों में से एक हजार नंबर लिए और 100-100 लोगों के 10 ग्रुप सचिन के ही अलग-अलग नामों से बना दिए। इसके बाद 1 घंटे के लिए लंच करने चले गए। वापस आकर अपने फोन को देख कर अंकुश हैरान रह गए। हरेक ग्रुप पर 500 से 700 नोटिफिकेशन आए हुए थे। यूजर्स एक दूसरे से जानकारी वीडियो या ऑडियो के माध्यम से मांगी थी। वह देने की कोशिश दूसरे व्यक्ति ने की थी। एक घंटे में बिना किसी प्रयास के 1000 लोगों के ग्रुप पर बिग डाटा कलेक्‍शन हुआ था। सबसे खास बात यह थी कि यह सारा डिस्कशन इंग्लिश में नहीं देसी भाषाओं में था।

बस यही से जन्‍म हुआ शेयरचैट का आइडिया। अंकुश, भानु, फरीद ने क्षेत्रीय भाषाओं का प्रयोग करने वाली ऐप शेयरचैट को लॉन्च किया। पिछली 14 असफलताओं ने शानदार सफलता के रास्ते की रुकावटों को हटा दिया था।

अंकुश के अनुसार शेयरचैट एक करोड़ 80 लाख बार डाउनलोड किया जा चुका है। ज्‍यादातर यूजर्स 18 से 25 साल तक की उम्र के हैं। खबरें, चुटकुले, वीडियो, ज्योतिष, मनोरंजन अनेकों जानकारियां शेयरचैट में समाई हैं। व्हाट्सअप पर शेयरचैट के तकरीबन दस करोड़ कंटेंट महज एक महीने में शेयर हो गये। सबसे मजेदार बात यह है शेयर चैट पर लोग लाइव वीडियोस बनाकर भी शेयर करते हैं जैसे कि अंकुश ने हमें बताया कि बिहार में आई बाढ़ के समय उन्हें ऐसे अनेक वीडियो मिले जो सोशल मीडिया में कहीं भी उपलब्ध नहीं थे।

शेयरचैट अभी 10 भाषाओं में उपलब्ध है हिंदी, मराठी, मलयालम, तेलुगु, ओड़िआ, कन्नड़, गुजराती, पंजाबी, तमिल और बंगाली। फोर्ब्‍स 30 अंडर 30 में सोशल मीडिया मोबाइल टेक एंड कम्युनिकेशन कैटेगरी में अपनी जगह बनाने वाले तीनों IIT इंजीनियर अंकुश, फरीद और भानू की इस देसी खोज को पूरा भारत पसंद कर रहा है क्योंकि ‘’इसमें अपनापन है’’। अंकुश के अनुसार अभी वह आमदनी पर ध्यान न देकर अपने यूजर्स की संख्या को बढ़ाना चाहते हैं ताकि पूरे भारत के लोगों की यह पहली पसंद हो इसलिए बाकी भाषाओं में बनाने की तैयारी भी चल रही है।

आपकी जानकारी के लिए बताना चाहते हैं कि शेयरचैट ने अबतक 150 करोड़ से भी ज्यादा की फंडिंग उठाई है और निरंतर अपने कारोबार का विस्तार कर रहे हैं।

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