16 की उम्र में की थी शुरुआत, आज यह लड़की 20 से ज्यादा बैंकों के लिए कर रही है लोन की वसूली

वसूली शब्द का अर्थ होता है पैसे की वसूली। यह शब्द सुनकर अचानक हमारे दिमाग में एक हट्टा-कट्टा, बड़ी कद-काठी और गुस्से से भरा हुआ संजय दत्त जैसा काला पठानी सूट पहने और माथे पर एक लाल रंग का टीका लगाए किसी व्यक्ति की छवि उभरती है। वह व्यक्ति जो हर साल भारतीय बैंक की 500 करोड़ रूपये से अधिक की वसूली करता है वह संजय दत्त जैसा बिलकुल भी नहीं दिखता बल्कि वह इंदौर की एक महिला है जो विश्वास करती है कि लोगों को डरा कर पैसे वसूलने से ज्यादा प्रभावी बातचीत के द्वारा होता है।

आज हम मिलते है 30 वर्षीय मंजू भाटिया से जो पैसे की वसूली के लिए पुराने तरीकों, जिसमे लोगों को डरा-धमका के पैसे वसूले जाते थे, पर निर्भर नहीं है। वह बैंकों के लिए लगभग 14 सालों से पैसों की वसूली कर रही है और महिलाओं की एक टीम के साथ मिलकर यह अद्भुत काम करती हैं। इनकी टीम का नाम वसूली रिकवरी है।

मंजू ने यह काम 16 साल की उम्र में अपनी बारहवीं की परीक्षा पूरी करने के बाद शुरू कर दिया था। उन्होंने पहले अपने पारिवारिक मित्र की फार्मास्यूटिकल कंपनी में बतौर रिसेप्शनिस्ट की नौकरी की। वहाँ उन्होंने जल्द ही एकाउंट के दांव-पेंच, ट्रेडिंग और लोन की वसूली करना भली-भाँति सीख लिया। आमतौर लोग अपने काम की शुरुआत निचले स्तर से करते हैं लेकिन मंजू ने अपने साहस के कारण एक हाई-प्रोफाइल मंत्री से वसूली कर अपने काम का श्रीगणेश किया। मंजू ने मंत्री के साथ एक मीटिंग की और उन्हें बताया कि आप अपने ऋण के बारे में भूल गए हैं और उनके ऋण भुगतान का समय आ गया है।

यह उनके लिए जीत का समय था। उन्हें महसूस हुआ कि अधिकतर केस बैंक और उनके ग्राहकों के बीच संवादहीनता की वजह से हो रहा है और मंजू दोनों के बीच की कड़ी बन रही थी। उन्हें लगा कि यही वह काम है जिसे वह पूरी जिंदगी करना चाहती है। एक क्लाइंट से 25000 रूपये लेकर अपने कुछ कर्मचारियों के साथ मिलकर यह काम शुरू किया।

हम महिलाओं में पुरुषों की तुलना में सहमत करने की शक्ति और नैतिकता कुछ अधिक होती है और यही वह वजह है जिससे हम आगे बढ़ पाए हैं। अगर हम सफल नहीं होते तो भी हम अपना शत-प्रतिशत ही देते। — मंजू

आज मंजू के पास 200 वसूली एजेंट है और सभी महिलाएं हैं और भारत के लगभग 26 जगहों में फैले हुए हैं। इनकी कंपनी ने यह सिद्ध कर दिया है कि वसूली का काम गुस्सैल, हट्टे-कट्टे पुरुष ही नहीं कर सकते जो लोगों को डरा धमका कर पैसे वसूलते हैं। मंजू लगभग 20 पब्लिक सेक्टर बैंकों के लिए काम करती हैं।

यूनियन बैंक के जनरल मेनेजर ओ पी दुआ कहते हैं शुरुआत में हम थोड़ा उलझन में थे परंतु मंजू भाटिया एक साहसी महिला हैं। उन्होंने इस वसूली के बिज़नेस को एक अलग ही मक़ाम पर लाकर रख दिया है। वह बड़ी ही शिष्टता और प्रभावी संवाद के द्वारा अपना काम संभालती हैं।

मंजू महिलाओं के लिए एक रोल मॉडल हैं। जब उन्होंने यह काम शुरू किया था तब वह कम उम्र की थीं पर उन्होंने अपना फोकस कभी भी नहीं खोया। उन्होंने इस बिज़नेस को बड़ी ही सकारात्मकता और ताज़गी भरे रवैये के साथ अपनाया और लीक से हटकर एक नया मक़ाम हासिल किया। उन्होंने अपने परिवार वालों और उन दोस्तों को गलत साबित किया जो यह सोचते थे कि मंजू ने एक गलत निर्णय लिया है। इस पुरुष प्रधान समाज और जोखिम भरे एरिया में काम कर मंजू लाखों महिलाओं के लिए प्रेरणा बन गई है।

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