स्कूल छोड़ अपने जुनून के साथ बढ़े आगे और आज विश्व की सबसे बड़ी रिसर्च टीम का हिस्सा हैं

माता-पिता की बस इतनी सी ख़्वाहिश होती है कि उनके बच्चे कम से कम अपने हाई स्कूल  तक की पढ़ाई पूरी कर लें ताकि कुछ तो सम्मान जनक भविष्य उन्हें हासिल हों l पर कभी-कभी माता-पिता का सामना ऐसे बच्चों से होता है जिनमें असाधारण क्षमताएं होतीं हैं और उन क्षमताओं को परंपरागत हाई स्कूल-शिक्षा के परिवेश में निखारना संभव नहीं होता l ऐसे लोग हाई स्कूल की पढ़ाई को छोड़कर भी सिर्फ अपने जुनून के पीछे-पीछे चलकर बेहतरीन सफलता हासिल कर पाते हैं l 

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आजकल लोगों की सबसे बड़ी चिंता शिक्षा को लेकर होती है l आप स्कूल में कितने सफल रहे इससे एकदम अलग यह याद रखना ज़रुरी है कि आपकी अकादमिक शिक्षा सिर्फ आपके अगणित क्षमताओं में से कुछ मुट्ठी भर ही प्रतिभाओं को उभार पाते हैं l जहाँ आपकी औपचारिक शिक्षा आपके लिए अच्छा करियर तय करने में भरोसेमंद होता है वहीँ कड़ी मेहनत सफलता की गारंटी होती है चाहे आप के पास अच्छी डिग्री हो या कि न भी हो l पढ़ाई का विषय चाहे आपको आकर्षित करे यह न करे , स्कूल की पढ़ाई बीच में ही छोड़ देने वाले इस लड़के की कहानी मंज़िल तक पहुँचने के  दो-चार गुर ज़रूर सीखा जायेगी l 

यह कहानी छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले के एक 26 वर्षीय वैज्ञानिक की है जिन्होंने जर्मनी के मैक्स प्लान्क इंस्टिट्यूट फॉर क्वांटम ऑप्टिक्स से पीचडी कर रहे हैं l और उन्होंने इंटरनेशनल साइंटिस्ट ग्रुप के साथ मिलकर एक विशेष तकनीक का निर्माण किया है जिसके द्वारा लेज़र-लाइट का उपयोग करके ठोस के भीतर के इलेक्ट्रॉन्स की गति को नियंत्रित करके किसी भी इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स को चलाया जा सकता है l वैज्ञानिक मनीष गर्ग उस इंटरनेशनल साइंटिस्ट ग्रुप में अकेले भारतीय हैं जिन्होंने यह बताया कि ठोस में सबसे तेज इलेक्ट्रिक करंट का प्रवाह होता है l यह लेज़र-लाइट के  क्षेत्र की सबसे बड़ी खोज है l 

मनीष एक छोटे से शहर कोरिया जिले के मनेन्द्रगढ़ के निवासी हैं l वहाँ अच्छे स्कूलों की कमी है l उनका स्कूल घर से 16 किलोमीटर की दूरी पर था l पढ़ाई के लिए समय बचाने के लिए उन्होंने दसवीं की पढ़ाई छोड़ दी l उसके बाद मनीष आईआईटी-जेईई  की तैयारी में लग गए और साथ ही साथ उन्होने अपनी आगे की पढ़ाई के लिए प्राइवेट पढ़ाई भी जारी रखा l उन्होंने 2012 आईआईटी-जेईई की परीक्षा पास की l उन्होंने अपना पोस्ट-ग्रेजुएशन इंस्टिट्यूट ऑफ़ साइंस, एजुकेशन एंड रिसर्च कोलकाता से पूरा किया l उनका रुझान क्वांटम ऑप्टिक्स की तरफ था और उन्होंने विश्व के सबसे अच्छे इंस्टिट्यूट जर्मनी से उसकी पढ़ाई पूरी की l 

बक़ौल मनीष: “लेज़र लाइट से बीस गुनी अधिक तीव्रतर ऊर्जा लेज़र लाइट  को विकिरण में परिवर्तित करने से पैदा होती हैl  जब इलेक्ट्रॉनों की गति लेज़र के पल्स  से चालित होती है, एक सेकंड में पेटा-हर्ट्ज़ फ्रीक्वेंसी पर 1015 ओसीलेशन करने की क्षमता आज की एल्क्ट्रॉनिक्स में पायी जाने वाली स्पीड से १० लाख गुना तेज़ होती है l “ 

“नॉन-लीनियर ऑप्टिक्स और बुनियादी साइंस, लेज़र टेक्नोलॉजी, संचार और मेडिसिन के क्षेत्र में उसके बहुआयामी उपयोग प्रकाश के एक से दूसरे रंग में परिवर्तन पर आधारित होती हैl  यह प्रक्रिया तब होती है जब एक तीव्र लेज़र रश्मि मैटर  से क्रिया करती है l  यह प्रक्रिया अलग रंग ( फ्रीक्वेंसी) के लेज़र  विकिरण पैदा करने को संभव बनाता है, यह लेज़र से संभव नहीं हो पाता l और इसीलिए इसको नए अनुप्रयोगों में आज़माना संभव है l”

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