आईआईएम के एक ऐसे प्रोफेसर की कहानी जिन्होंने पूरे देश की राजनीति से गन्दगी को साफ करने का उठाया बीड़ा

आईआईटी-दिल्ली से ग्रेजुएट और आईआईएम-अहमदाबाद से निकले त्रिलोचन शास्त्री उन नेताओं के बड़े आलोचक हैं जिन्होंने देश की स्थिति को लेकर हताश किया है l उनके द्वारा सार्वजनिक जीवन के मानक के लिए जो PIL दाखिल किया गया है उस सरल और साहसिक कारनामे के लिए हम उनके शुक्रगुज़ार है l वे एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफार्म (ADR) के कर्ता-धर्ता हैं l भारतीय राजनीति में पारदर्शिता और जवाबदेही लाना और चुनाव के समय उपयोग में आने वाले रुपयों और बाहुबल का प्रभाव कम करना ही ADR का लक्ष्य हैl 

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त्रिलोचन का बचपन भारत की राजधानी दिल्ली में बीता l उनकी कोई महत्वाकांक्षा नहीं थी l अपनी हाई स्कूल की शिक्षा प्राप्त करने के बाद वे आईआईटी दिल्ली पढ़ने चले गए l उनका समय यहाँ अच्छा बीता l 1981 में वे मैनेजमेंट की पढ़ाई के लिए आईआईएम अहमदाबाद को चुना l आईआईएम अहमदाबाद के पहले साल के समर प्रोजेक्ट के लिए उन्होंने एक एनजीओ ज्वाइन किया जिसका नाम सेवा मंदिर था l उन्होंने ये दो महीने राजस्थान में गुजारे जो उनके लिए आँखे खोल देने वाला दौर साबित हुआ l त्रिलोचन ने देश के सबसे पिछड़े ब्लॉक खेरवाड़ा में प्रोजेक्ट लेने का तय किया l उन्होंने सरकारी विभागों का सर्वेक्षण किया और जो कुछ उन्होंने पाया वह उनके लिए बहुत बड़ा धक्का था l उन्होंने यह महसूस किया कि सरकारी विभागों में काम नहीं के बराबर होते हैं l 

अपने कैंपस वापस आने के बाद त्रिलोचन अपनी पढ़ाई में लग गए l जब प्लेसमेंट का समय आया तब वे नौकरी के लिए विशेष रूप से इच्छुक नहीं लगे l पर वे कुछ करना चाहते थे l तब उन्होंने एक एनजीओ में शामिल होने होने के लिए पता लगाना शुरू किया, पर यह काम नहीं आया l उनके मन में दूसरा विचार आया कि देश की सेवा के लिए पब्लिक सेक्टर ज्वाइन कर लेंl एक साल ओएनजीसी में काम करने के बाद उनके लगा कि यह गलत निर्णय था l उसी समय उनके साथ एक दुःखद घटना घटी, उनके पिता का देहावसान हो गया l त्रिलोचन ने तब विश्व की सबसे अच्छी यूनिवर्सिटी MIT में जाने का  निर्णय लिया l वहाँ से अपनी पीचडी करने के बाद वे भारत लौट आये और आईआईएम अहमदाबाद में  प्रोफेसर के रूप में ज्वाइन कर लिया l खाली समय में वह एनजीओ के बारे में नेटवर्किंग करते और यह पता करते कि  तब क्या चल रहा है l 

धीरे से त्रिलोचन ने अपने आप को एक ठोस वजह के लिए तैयार किया l सभी मध्यम वर्गीय लोगों की तरह वह भी सोचते हैं कि देश में जो भी गड़बड़ियाँ फैली है वह सब राजनेताओं के द्वारा है l जब प्रधानमंत्री पर भी आपराधिक मामलों के आरोप लग रहे थे l  जो बहुत ही अच्छे पोजीशन में हैं ऐसे लोग खुले आम देश को लूट रहे हैं l त्रिलोचन ने तब यह तय किया कि वे एक PIL दाख़िल करेंगेl उन्हें यह विश्वास था कि पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन राजनेताओं से उनके आपराधिक रिकार्ड्स की जानकारी लेंगे इस तरह एक नया रास्ता खुलेगा l दोस्त और उनके सहकर्मी उनके इस कदम को मूर्खता पूर्ण मान रहे थे पर वे फिर भी सोचते थे कि यही अच्छा तरीका है l वे वकील से मिले सभी उन्हें कह रहे थे कि PIL सुप्रीम कोर्ट में दाख़िल किया जाये और यह संगठन की ओर से किया जाए न की व्यक्तिगत l आखिर में उन्होंने और नौ लोगों के साथ मिलकर एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफार्म(ADR) की स्थापना कीl दिसंबर 1999 में  PILदाख़िल किया गया l भाग्य ने साथ दिया और वे दिल्ली हाई कोर्ट से जीत गए l मई 2002 में सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि उम्मीदवार अपनी आमदनी, शिक्षा और आपराधिक रिकार्ड्स घोषित करें l

ADR अभी नैतिक और प्रेरक भूमिका निभा रहे हैं l हर राज्य में जाकर वे ज़मीनी स्तर पर काम कर रहे हैं l दूसरा काम उन्होंने राजनेताओं को निगरानी में रखने का, वह भी न केवल चुनाव के समय बल्कि वे कितने बार संसद गए, बहस में हिस्सा ले रहे हैं की नहीं, दिए गए फंड का कैसा उपयोग कर रहे हैं आदि जानकारियाँ भी इकट्ठी करते l 

उनकी सतर्कता का असर कि राजनेता धीरे-धीरे ही सही पर देश के लिए जवाबदेही दिखाने लगे हैं l त्रिलोचन शास्त्री अपनी तार्किकता, हिम्मत और सिस्टम के साथ उलझने के दुस्साहस के बल-बूते अपने देश को  सही दिशा में  बढ़ने के लिए कृत्संकल्प हैं l 

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