पति की इच्छा को लक्ष्य बना कर इस महिला ने कायम किया वर्ल्ड रिकाॅर्ड, जैविक चावल की अनगिनत किस्में खोज निकाली

एक पिता का अपने बच्चे के स्वस्थकर भोजन के लिए अथक तलाश की और अपने पति के उस सपने को जीवित रखते हुए उसकी पत्नी ने जो एक महत्वाकांक्षी लक्ष्य ठाना है वह आज समस्त भारत में जैविक खेती के भविष्य में परिवर्तन ला रहा है। सदियों पहले भारत गुणवत्ता युक्त औषधीय फसलों और अन्न के लिए एक अनूठा देश हुआ करता था। अनवे मारुन्धु, एक प्रसिद्ध तमिल कहावत, जिसका अर्थ होता है 'भोजन स्वयं में ही एक औषधि है', इस जागरुकता को साधारण जनमानस तक  फैलाने की कहानी है मेनका की।

मेनका और थिलगराज ने अन्तर्जातीय विवाह किया था। जिस कारण प्रारंभ से ही उन्हें परिवार से विरोध का सामना करना पड़ा। परंतु दोनों एक अच्छी तनख्वाह की नौकरी में थे और आत्मनिर्भर थे तो दोनो ने साथ रहने का निर्णय किया।

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दोनों ने मिलकर भारत में पाई जानेवाली चावल की विभिन्न किस्मों का पुर्नजीवित करना शुरु किया और इसके खोज और अनुसंधान में जुट गए। मगर स्थिति उनके पहले बच्चे के जन्म के बाद से बदलने लगी। थिलगराज को अपने बच्चे के लिए बेहतरीन भोजन उपलब्ध कराने की जिद्द थी। "मुझे थायराॅइड की समस्या थी, और चावल की मूल किस्म को खाने से इसे ठीक किया जा सकता है। हमारे चावल की कई मूल किस्में हैं जिनसे, शुगर, थायरॉयड, ब्लड प्रेशर आदि ठीक किया जा सकता है" ,मेनका ने एक वेबसाइट को बताया।

थिलगराज ने देश के कोने कोने से स्वस्थकर और जैविक भोज्य पदार्थों के तलाश के लिए यात्राएँ शुरु की। किस्मत से उनकी मुलाकात निम्माजावर से हुई। निम्माजावर एक वैज्ञानिक हैं जिन्हें उनकी जैविक खेती के ज्ञान के लिए पहचाना जाता है। थिलगराज ने उनसे चावलों की मूल किस्मों और उसके अविश्वसनीय लाभों के बारे में काफी कुछ सीखा।

इस घटना ने थिलगराज के काम करने के तरीके को बदल दिया। उन्होंने चावल की विलुप्त हो चुकी प्रजातियों की तलाश करनी शुरु कर दी। थिलगराज ने चावल की 100 किस्मों को संरक्षित किया।

प्रारंभ में मेनका ऐसे जोखिम लेने के लिए बहुत सतर्क थी और उन्होंने उनका समर्थन नहीं किया। परंतु थिलगराज का उत्साह देखते हुए वो भी उनके काम में साथ देने लगी और उन्होंने मन वासिनीनाम से जैविक चावलों की एक दुकान खोली। दुकान में मूल जैविक चावलों की 100 किस्में हैं, जिन्हें बहुत कम लोग ही जानते हैं। 

मूल जैविक चावलों और उनके बीजों के प्रति जागरुकता फैलाने के प्रति थिलगराज के समर्पण को देखते हुए उन्हें निम्माजावर सम्मान प्राप्त करने के लिए बुलाया गया। सम्मान समारोह से ठीक एक रोज पहले ही दोनो पति पत्नी आपस में बात-विमर्श कर रहे थे। थिलगराज ने चावल की 100 किस्मों को एक फूड फेस्टिवल में बना कर खिलाने का वर्ल्ड रेकाॅर्ड कायम करने की इच्छा जताई। वह विश्व में चावल के प्रति जागरुकता फैलाना चाहते थे।

मगर किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। उसी रोज, जब वे कहीं जा रहे थे। वह एक दुर्धटना के शिकार हो गए और उन्होंने अपनी आखिरी साँसें ली। मेनका की तो दुनिया ही बिखर गई। फिर भी किसी तरह उन्होंने जीवन में आगे बढ़ने की हिम्मत जुटाई। अपने दो बच्चों और पति के सपनों को ले कर वह आगे चल पड़ी। 25 नवम्बर, 2017 को थिलगराज के जन्मदिवस पर मेनका ने एक फूड फेस्ट का आयोजन कर विश्व कीर्तिमान स्थापित किया। उन्होंने 1 घंटे 47 मिनटों में चावल की 100 किस्में बनाया और असिस्ट वर्ल्ड रेकाॅर्ड में नाम दर्ज करवाया।

आज मेनका एक सफल उद्यमी हैं और अपने जैविक चावल की दुकान चला रही हैं। वे मूल चावलों की किस्मों और उसकी पोषक मूल्यों के बारे मे लोगो में जागरुकता फैला रही हैं। चावल की विलुप्तप्राय किस्मों के संरक्षण के लिए उनके अथक प्रयास के लिए निम्माजावर सम्मान भी प्राप्त हुआ है। मेनका का कहना है कि "मैंने कोई समाजिक कार्य नहीं किया है, मैं बस यही सुनिश्चित करना चाहती हूँ कि मेरे दैनिक कार्यों से समाज को कुछ लाभ हो सके"। 

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