"लोग थूकते थे मुझपर, मेरे काम पर" 19 साल, 10,000 लाशें और एक व्यक्ति की अविश्वनीय कहानी

"अस्सलाम-वालेकुम" , साक्षात्कार कॉल प्रारंभ होने के पर 38 वर्षीय 'बाॅडी मियाँ' ने अभिवादन किया। असामान्य सा यह नाम है, लेकिन इस व्यक्ति ने नि:स्वार्थ भाव से पिछले दो दशकों से कर रहे काम से इस उपाधी को अर्जित किया है। बाॅडी मियाँ लावारिस शवों को संभालने, उन्हें मुर्दाघर में शिफ्ट करने, और यहां तक कि उनके अंतिम संस्कार और दफ़नाने का कार्य नित्य रुप से कर रहे हैं।

इस एक असाधारण यात्रा की भी एक असामान्य शुरुआत है। एक दिन मैसूर-निवासी अय्यूब अहमद, अपनी नई कार खरीद करने के लिए KSRTC की बस में गुंदलुपेट, कर्नाटक के लिए यात्रा कर रहा थे। रास्ते में बंदीपालया में उन्होंने एक बड़ी भीड़ एक मृत शरीर के आसपास जमा हुए देखा। 10 घंटे के बाद जब वे अपनी नई कार में घर लौट रहे थे, उन्होंने देखा कि शरीर अभी भी वहाँ पड़ा रहा।

ऐसे में तब उन्होंने शरीर को अपनी बाहों में ले लिया, उसे अपनी नई कार में डाल दिया, और उसे शवगृह में लेकर गये। अय्यूब ने अपने कार्य के परिणामों को सोचा नहीं था। घर वापस आने के बाद, उसे हर किसी के क्रोध का सामना करना पड़ा।

"मुझे मर जान पसंद आना लगा था उस वक़्त, ऐसा कौन सा गलत काम कर दिया था मैंने", वह अपनी आवाज़ में स्पष्ट नाराज़गी से कहते हैं।

जल्द ही अय्यूब मैसूर में एक परित्यक्त हो गया। वह कुछ समय के लिए काम करने के लिए बेंगलुरु चले आये। और फिर से एक दिन यह हुआ कि जब अय्यूब सिलिकाॅन सिटी में लालबाग घूमने गये, तो उन्होंने एक मृत शरीर देखा। वह पूरी तरह से दुविधा की स्थिति में फँस गये।

वह याद करते हैं, "मुझे इस कारण मैसूर छोड़ना पड़ा, लेकिन मैंने किसी भी तरह से मदद करने का फैसला किया।" 

इस घटना के बाद, अय्यूब जान गये थे कि वह क्या करना चाहते हैं। वह अपने माता-पिता से दुआएँ लेने मैसूर लौट आए, जिन्होंने केवल कहा, "जो भी आप चाहते हैं वह करो।" तब से उन्होंने पीछे मुड़ कर कभी नहीं देखा 

यद्यपि वे एक महान काम कर रहे थे लेकिन लोगों से इनाम के रूप में केवल कांटे ही प्राप्त किये। "लोग थूकते थे मुझपे, मेरे काम पर। मैं कई रातों को रोता था", वह याद कर बताते हैं।

जब लोग उन्हें देखते तब लोग उनकी ओर पीठ मोड़ देते। लेकिन अय्यूब ने भी अपना काम करना जारी रखा, भले ही उन्होंने इसे एक पैसा भी नहीं कमाया। दुसरी कक्षा तक ही शिक्षित अयूब कभी-कभी फल बाजार में कुली के रूप में काम करता है या टैक्सी ड्राइवर का काम करते हैं। उन्होंने अपनी कमाई को तीन समान भागों में बांट दिया है, अपने परिवार के लिए, मृत शरीर की दफ़नाने के लिए, और फुटपाथ पर रहने वाले लोगों के लिए।

अय्यूब बेघर लोगों के लिए भोजन और कपड़े लाते हैं, अनाथ बच्चों को स्कूल भेजते हैं, और उन्हें शादी भी करवाते हैं। वह अपनी पत्नी का शुक्रिया अदा करना नहीं भूलते जो अपनी सिलाई के काम के साथ परिवार की भी देखभाल करती हैं। वह अपनी शादी की रात को याद करते है जब उन्हें एक मृत शरीर को लाने के लिए जाना पड़ता था, "मैंने उससे कहा कि मैं किसी से मिलने जा रही हूं जो अस्वस्थ है। बाद में, उसे किसी से मेरे इस काम के बारे में पता चला। लेकिन, कभी भी उसने एक पलक नहीं उठाया।"

अय्यूब के पास छह फोन हैं जो हर समय लोगों की मदद के लिए उपलब्ध रहते हैं, दिन में एक घंटा छोड़कर, जब वह प्रार्थना करते हैं। पुलिस विभाग की सहायता के साथ उन्होंने पिछले 19 वर्षों 10,000 से अधिक लोगों की आत्माओं को राहत दिया है। वह अपनी मां को याद करते हुए भावनाओं में बह जाते है, जिन्होंने एक बार उन्हें पदक जीतने के लिए कहा था, जो कि दुनिया देखेगी और सराहना करेगी "जब मेरा वक्त अया है मेरी मां नहीं है," वे भावुक हो कर कहे।

अय्यूब को दुबई सरकार ने उन्हें निःस्वार्थ काम के लिए भी सम्मानित किया है। उनका कहना है कि किसी को भी उनके सम्मान के लिए पैसा नहीं दें, बल्कि वे गरीबों को खाना और कपड़े देने चाहिए। वह अपनी पुरानी कार के बजाय मृत शरीर परिवहन के लिए उपयुक्त एम्बुलेंस लेने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं। वह मृत आत्मा के आराम शांति और गरिमा के लिए मदद करना चाहता है। उसके लिए सभी एक समान हैं।

वे कहते हैं, 'इंसान काटो या जानवर, खून ही निकलागा।" वे खुद को स्वस्थ बनाए रखना चाहते हैं ताकि वह लोगों की मदद कर सके। 

अय्यूब अहमद हर विपरित परिस्थितियों का समाने करते हुए भी इस कल्याणकारी कार्य से जुड़े हुए है। जिन्दगीं के बाद जहाँ एक बेहतरीन जिस्म मात्र एक बाॅडी बन कर रह जाता हैं वही 'बाॅडी मियाँ' उन्हें पूरा सम्मान दे कर मानवता की सार्थकता को सिद्ध कर रहे हैं। इस कार्य में उनके हर प्रयास की सफलता की कामना है।

Share This Article
1309