लोगों के घर केबल टीवी लगाने वाला व्यक्ति कैसे बना लिया 1000 करोड़ विशाल साम्राज्य

हमारे घर में टीवी केबल लगाने वाले व्यक्ति पर हम कभी ध्यान तक नहीं देते। हम कभी सोच भी नहीं पाएंगे कि इसे भी कोई अपना करियर बना सकता है। लेकिन एक ऐसा शख्स था जो इसे ही अपना करिअर बना कर पूरी इंडस्ट्री में एक गेम चेंजर के रूप में उभर कर सामने आया। लीक से हटकर एक नई राह बनाने वाला और इस सेक्टर में एक नया कीर्तिमान स्थापित करने वाले इस शख्सियत का आज वार्षिक टर्न ओवर 1000 करोड़ के पार है और उनका लक्ष्य इससे भी कई गुणा ज्यादा करने का है। इतना कुछ हासिल करने वाले इस व्यक्ति के पास न तो कोई मैनेजमेंट की औपचारिक शिक्षा थी और न ही कोई तकनीकी विशेषज्ञता।

आज हम बात कर रहे है कुंवर सचदेव कि जो सु-काम इंवर्टर्स के संस्थापक हैं और हमारे आज के एक प्रेरक व्यक्तित्व।यह वह व्यक्ति है जिन्होंने घर-घर जाकर बिजली की लगातार हो रही कमी के दौरान साल 1998 में एक बड़ी इन्वर्टर बनाने की कंपनी खोली और उसका नाम दिया सु-काम। एक मध्यम-वर्गीय पंजाबी परिवार में जन्में कुंवर एक छोटे से घर में अपने माता-पिता और दो भाइयों के साथ रहते थे।उनके पिता भारतीय रेलवे में क्लर्क थे और माता गृहिणी थीं। इन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा एक प्राइवेट स्कूल से शुरू की लेकिन आर्थिक बाधाओं की वजह से बाद में गवर्नमेंट स्कूल में पढ़ाई करनी पड़ी।

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“सांख्यकी में स्नातक करना बिज़नेस तकनीक के नज़रिये से एक असामान्य छलाँग थी पर मेरे दिमाग में हमेशा बिज़नेस ही था। जब तक मैं कॉलेज में था तब तक मेरे मन में और कुछ भी नहीं था;” ऐसा कुंवर कहते हैं। असफलता ही हर सफलता की आधारशिला होती है ऐसा कुंवर मानते हैं।

सचदेव ने सबसे पहले अपने भाई के साथ काम करते हुए पेन बेचने का धंधा शुरू किये लेकिन कुछ दिन काम करने के बाद उन्हीनें कुछ नया करना चाहा। इन्होनें अगला काम एक केबल कंपनी में सेल्स एक्जीक्यूटिव के रूप में किया। पर वह भी कम समय के लिए ही था।

1989 में इन्होंने अपने ही कंपनी के एक तकनीकी विशेषज्ञ के साथ मिलकर केबल टीवी बिज़नेस की शुरुआत की। इन्होंने सिर्फ 10,000 रुपये से शुरुआत की और केबल टीवी जैसे छोटे कारोबार के लिए यह पूंजी पर्याप्त थी। इन्होंने एक छोटे स्तर पर छः लोगों के साथ मिलकर एम्प्लिफायर्स और डायरेक्शनल कप्लर्स का उत्पादन शुरू किया। यह सारी ज़रूरत की चीजें केबल के बिज़नेस के लिए उपयोगी थी और इसे सु-काम नाम के ब्रांड के साथ शुरू की। 

साल 2000 में सचदेव ने यह निर्णय लिया कि वह केबल टीवी प्रोडक्ट बनाने का यह बिज़नेस बंद कर देंगे और फिर उन्होंने अपनी इन्वर्टर बनाने की पहली बड़ी फैक्ट्री गुरु-ग्राम में शुरू की। और उस वक़्त इसकी लागत 15 लाख रुपये थी। इंवर्टर्स का प्रोडक्शन इन्होंने पूरे जोरों से अपनी पर्सनल सेविंग्स से ही की। उनकी सफलता का सत्यापन होने पर रिलायंस और टेमासेक ने कंपनी के 20 फीसदी भागीदारी के लिए 45 करोड़ रुपये उन्हें दिए। कुंवर अपनी उप्लब्धियों से कभी संतुष्ट नहीं होते थे वह नई-नई तकनीकी का उपयोग कर हमेशा मार्केट के लीडर बने रहे। उनकी सफलता की कहानी यही पर ख़त्म नहीं होती। 

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अपने प्रोडक्ट इनोवेशन, डिजाईन की संवेदनशीलता और सेल्स डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क के कारण सु-काम पावर सिस्टम्स लिमिटेड आज विश्व के 50 देशों में अपना लोहा मनवा रही है। यह इन्वर्टर का उत्पादन करने वाली विश्व की सबसे बड़ी कंपनी है। उद्योगपति, टेक्नोलॉजी और इनोवेशन के चलते उन्हें बहुत से पुरस्कार मिले हैं जिसमे मुख्य रूप से भारत सरकार द्वारा नवाज़ा गया “भारत शिरोमणी” का सम्मान है।

आज कुंवर सचदेव की जीवन यात्रा देखते हुए यह निश्चित तौर पर कहा जा सकता है कि किसी भी व्यक्ति के सफल होने के लिए डिग्री की जरुरत नहीं होती बस आपकी अपनी प्रतिभा, सपने देखने का साहस और उसको पूरा करने के लिए लगन, मन की दृढ़ता और मेहनत ही पर्याप्त होती है। 

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