53 साल के इस भारतीय ने ख़ुद की काबिलियत से ₹85,000 करोड़ की कंपनी के सबसे शीर्ष पद पर जमाया कब्ज़ा

दुनिया के नक्‍शे में आज चाइना, जापान, अमेरिका के अलावा भारत एक ऐसा देश ऊभर कर सामने आया है जो सबसे तेजी से तकनीकी विकास की राह में आगे बढ़ रहा है। इसका श्रेय उन तमाम भारतीयों को जाता है जिन्होंने सूचना और प्रोद्योगिकी के क्षेत्र में सिर्फ देश के भीतर ही नहीं बल्कि विदेशों में भी अपना परचम लहराया। माइक्रोसॉफ्ट में सत्‍या नडेला और गूगल में सुंदर पिचाई की भूमिका से तो हर भारतीय वाक़िफ़ है लेकिन इनके अलावा भी कई ऐसे भारतीय हैं जिन्होंने अपनी काबिलियत से पूरी दुनिया में नाम कमाया।

आज हम ऐसे ही एक भारतीय की कहानी लेकर आए हैं जो वर्तमान में 85,000 करोड़ रूपये की एक अंतराष्ट्रीय कंपनी के कर्ता-धर्ता हैं। ताज्जुब की बात है कि इनके द्वारा संचालित कंपनी के प्रोडक्ट्स से पूरा भारत वाक़िफ़ है लेकिन हम इन्हें नहीं जानते हैं।

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सॉफ़्टवेयर क्षेत्र की दुनिया की अग्रणी कंपनी अडोबी सिस्टम्स के सीईओ शांतनु नारायण की गिनती आज दुनिया के सबसे सफल व्यवसायिक अधिकारी के रूप में होती है। हैदराबाद में जन्में और पले-बढ़े शांतनु ने इलेट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में अपनी स्नातक डिग्री हैदराबाद के उस्मानिया विश्वविद्यालय से हासिल की और इसके बाद उन्होंने बर्कली में कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के हास स्कूल ऑफ बिज़नेस से सफलतापूर्वक एमबीए किया।

सॉफ्टवेयर और इंटरनेट क्षेत्र में शुमार करने वाले ज्यादातर नामचीन हस्तियों की तरह शांतनु नारायण ने भी अपना कैरियर ऐप्पल से शुरू किया। कुछ सालों तक यहाँ काम करते हुए उन्होंने बिज़नेस और मैनेजमेंट के गुर सीखे और फोटो शेयरिंग कंसेप्ट को लाने वाली एक कंपनी पिक्ट्रा की स्थापना की। यह दुनिया की पहली इंटरनेट फोटो शेयरिंग कंपनियों में से एक थी। इस कंपनी को सफलतापूर्वक चलाते हुए शांतनु ने सॉफ्टवेयर की दुनिया में अपनी एक पहचान बनाई। फोटो शेयरिंग क्षेत्र में इनकी कोशिश ने उन्हें साल 1998 में अडोबी सिस्टम्स से जुड़ने का मौका दिया। एडोबी में वैश्विक उत्पाद शोध के लिए उन्होंने बतौर सीनियर वाइस प्रेसिडेंट ज्वाइन किया। यहाँ काम करते हुए उन्होंने अपने प्रदर्शन से जल्द ही ऊँची छलांग लगाई और सिर्फ दस वर्षों के अंतराल के भीतर ही कंपनी के सीईओ बन बैठे।

सीईओ बनने के बाद शांतनु ने बीबीसी को दिए एक इंटरव्यू में कुछ इस तरह प्रतिक्रिया दी थी “मैं अडोबी का नेतृत्व पाकर ख़ुद को गौरवान्वित महसूस कर रहा हूँ. मैं अडोबी की तकनीकी क्षेत्र में अगुवाई की परंपरा को आगे बढ़ाने के लिए काम करूँगा”

इनके नेतृत्व में एडोब तरक्की के एक नए पायदान पर चढ़ते हुए सचमुच हर जगह फैल गया। आपको यह जानकार हैरानी होगी कि नारायण को कंपनी के लिए पूरे 350 सफल सौदों का श्रेय जाता है। वास्तव में देखें तो वायाकॉम, सीबीएस और पीबीएस जैसी बड़ी मीडिया कंपनियां आज एडोब फ्लैश प्लेयर के साथ वीडियो चलाती हैं और इन सब के लिए नारायण जिम्मेदार हैं।

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बतौर सीईओ नारायण को करीबन साढ़े 5 करोड़ का वेतन पैकेज दिया जाता था। साल 2013 में उन्हें कुल $15.7 मिलियन का सकल वेतन भुगतान किया गया, जो उन्हें दुनिया में सबसे ज्यादा वेतन लेने वाले अधिकारियों की सूची में भी शामिल करता है। इतना ही नहीं साल 2011 में अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा की सुझाव समिति में इन्हें भी शामिल किया गया था।

नारायण ने खुद की काबिलियत से वैश्विक पटल पर अपनी एक पहचान बना पाए। आज नारायण जैसे प्रभावशाली भारतीय पर हमें सिर्फ फक्र ही नहीं होता बल्कि हमारे अंदर एक नई आशा का संचार होता है और हमें भी जिंदगी में कुछ कर गुजरने की प्रेरणा मिलती है। 

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