अपने विश्व-प्रसिद्ध फुटपाथ ट्यूशन से गरीब बच्चों को मुफ्त शिक्षा देकर बना रहे ‘देश का भविष्य’

अहमदाबाद के भुदारपुर में लोगों को यह अनोखा नजारा देखने को मिलता है l फुटपाथ पर लगभग स्लम के 150 बच्चे कमलभाई परमार के साथ मिलकर हर शाम पढ़ाई करते हैं l फुटपाथ का यह स्कूल उच्च स्तरीय ज्ञान के साथ रात का भोजन भी कराता और यह सिलसिला चल रहा है लगातार 15 वर्षों से l इस प्रयास के लिए हमें कमल भाई परमार जी का शुक्रिया अदा करना चाहिए जो भले ही खुद अपनी पढ़ाई पूरी नहीं कर सके, परंतु आज वो स्लम के बच्चों को सही रास्ता दिखाने की पूरजोर कोशिश कर रहे हैं l

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कमलभाई ऑटो भी चलाते हैं और पास के मेटल फैब्रिकेशन वर्क्स में भी काम करते हैं l 15 साल पहले उन्होंने पास के नगरपालिका के स्कूल से वार्षिक परीक्षा के बाद लौटते हुए कुछ बच्चों को देखा l जब कमलभाई ने उन्हें परीक्षा के विषय में पूछा तो वे आश्चर्य में पड़ गए; क्योंकि उनमें से किसी भी बच्चे को पढ़ना-लिखना नहीं आता था l उनमें कुछ तो आठवीं कक्षा के छात्र थे l इस घटना के बाद उन्होंने वहां के बच्चों के बारे में और भी जानकारी इकट्ठा की तो पता चला की वहां केवल चार-पांच लोग ही पढ़े लिखे थे l तब ही उन्होंने यह फैसला कर लिया कि वे इन बच्चों को मुफ्त-शिक्षा देंगे l

स्कूल के बाद रोज शाम साढ़े पांच से उन्होंने बच्चों को पढ़ाना शुरू किया, वे चार से पांच घंटे रोज पढ़ाते l उस दौरान वे अक्षर ज्ञान से लेकर, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी तक का समावेश रखते थे l पढ़ाई ख़त्म होने के बाद सभी को भोजन भी कराते l उन्होंने शुरुआत में अपनी खुद की बनाई डेस्क व ब्लैक बोर्ड से काम चलाया l 10 से 15 बच्चों से फुटपाथ पर हुई शुरुआत आज 150 विद्यार्थियों से गुलज़ार है l

“मेरा सबसे बड़ा पुरस्कार यही है कि मेरे विद्यार्थी आत्मविश्वास के साथ खड़े होकर उन लोगों  की बराबरी कर सकें जिन्हें हर सुविधा मिली हुई है”

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अपने महान काम से उन्होंने दुनिया भर के लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है l अभी-अभी लीसे इंटरनेशनल सेंट जर्मैन एन लाये (फ्रांस ) ने बच्चों को स्वेच्छा से पढ़ाना शुरू किया है l कमलभाई परमार को उनके इस अनोखे काम के लिए 2009 में धरती रत्न से भी नवाजा गया l उनके इस अनोखे कदम के लिए उन्हें दिल से सलाम है l

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