चंद पैसों के लिए जो कभी मुम्बई की लोकल में ढोलक बजाते, उन्ही हाथों की थाप आज विश्व-मंच पर गूंजती है

साल 1988 में एक दुःख और गरीबी से संक्रमित घर में दीपक भट्ट का जन्म हुआ। राजस्थान से पलायन कर इनके पिता मुम्बई आ गए, जहाँ वे शादियों में गाना गाते और मूर्तियां बनाने का धंधा किया करते थे। जब दीपक सात वर्ष के थे तब उनके पिता उन्हें अपनी साईकिल में बिठा कर शहर में घूमा करते थे। जहाँ कहीं साज-सज्जा और उत्सव होता देखते, वह तेज आवाज़ में गाना गाने लग जाते ताकि लोग उन्हें गाने के लिए बुला लें। जब वे दस वर्ष के थे तब जुहू-चौपाटी पर वह गाना गाते हुए तोरण बेचते थे। उन कठिन दिनों में केवल संगीत ही था जो उनके जीने का सहारा था। जहाँ दूसरे लोग उनके गरीबी में पैदा होने को दुर्भाग्य समझते थे वहीं दीपक इसे अपनी किस्मत समझते थे कि वह संगीत की चादर में लिपटे हुए पैदा हुए। बहुत ही कम उम्र में दीपक ने ढोल की थाप समझना शुरू कर दिया था। किशोर अवस्था तक पहुँचते ही दीपक ने शादी, उत्सव और यहाँ तक कि मुम्बई की लोकल ट्रेन्स में भी ढोलक बजाना शुरू कर दिया था। 

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एक दिन जब वह लोकल ट्रेन में संगीत में डूबे हुए थे तब किसी ने उनके इस टैलेंट और क्षमता को पहचाना। दीपक के लिए यह किस्मत की बात थी कि वे भले-मानस उस्ताद तौफ़ीक़ कुरैशी को जानते थे, जो मशहूर तबला वादक और संगीतकार थे। प्रसिद्ध तबला वादक उस्ताद अल्ला रखा के पुत्र और उस्ताद ज़ाकिर हुसैन के भाई तौफ़ीक़ ने दीपक के टैलेंट को निखारने के लिए उन्हें तालीम देने का निश्चय किया। उस समय दीपक केवल 14 वर्ष के थे परन्तु वह जल्दी सीखने वाले विद्यार्थी थे और जल्द ही वे उनके चहेते विद्यार्थी बन गए। परंतु लोग तब भी उनका मज़ाक उड़ाया करते थे। इन सब चीजों पर वह ध्यान नहीं देते थे और नकारात्मकता को अपने पर हावी होने नहीं देते। वह सिर्फ अपने हुनर को तराशने में लगे रहते थे। आज यह लड़का संगीत से विश्व में अपना नाम बना चुका है। एक दिन उनके किसी दोस्त ने बताया कि शंकर-एहसान-लॉय अपने बैंड के लिए एक ढोल बजाने वाला तलाश रहे हैं। वहाँ ऑडिशन में सभी उनके प्रदर्शन से प्रभावित हुए और उन्हें बैंड में जगह मिल गयी। और उन्हें समझ आ गया कि उनकी सफलता की यात्रा शुरू हो गयी है। 

“आज मेरे माता-पिता दोनों मुझे देखकर बहुत खुश होते हैं, विशेष कर मेरी माँ। वह बहुत गर्व महसूस करती है। पर अभी मुझे बहुत कुछ करना है अभी तो यह सिर्फ शुरुआत है l” — दीपक

आज तक दीपक ने बहुत बड़े-बड़े नामी-गिरामी लोगों के साथ परफॉर्म किया है जैसे ज़ाकिर हुसैन, एआर रहमान, शंकर-एहसान-लॉय, अमित त्रिवेदी, स्टीव स्मिथ और विशाल-शेखर। वह पूरा विश्व घूम चुके हैं और इन्होंने प्रीतम, सलीम-सुलेमान, शंकर महादेवन के साथ स्टेज भी शेयर किया है।दीपक ने ग्रैमी अवार्ड जीतने वाले वर्ल्ड म्यूजिक एल्बम 2009 के लिए ग्लोबल ड्रम प्रोजेक्ट में भी हिस्सा लिया था। जर्मनी में इंडियन सर्कस ए आर रहमान के बैंड में इन्होंने हिस्सा लिया था। बहुत फिल्मों में भी इनका योगदान रहा है जैसे धूम-2 ,भूल-भुलैया, 2-स्टेट्स, लाइफ इन अ मेट्रो।

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 दीपक ने आज यह दिखा दिया कि कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप कहाँ के हो, अगर आप अपने काम से प्यार करते हैं और अपना सब कुछ दांव पे लगा देते हैं तब निश्चय ही आप हीरक बन कर चमकेंगे। दीपक यह मानते हैं कि उन्हें अपने सपनों से भी कहीं ज्यादा मिला है। और यह केवल तभी संभव हो पाया है जब दीपक ने अपने जुनून को जिन्दा रखा और हमेशा सकारात्मक सोच के साथ चले वे आज उस मुक़ाम पर आ खड़े हैं जहाँ एक पूरी युवा पीढ़ी उनसे प्रेरणा ले सकती है।

 

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