ट्रेवल एजेंट की नौकरी छोड़ माँ के जेवर बेच शुरू किया कारोबार, आज है 10,000 करोड़ की कंपनी

यह कहानी है एक ऐसे शख्स की जो बेहद ही विषम् परिस्थिति में अपनी लगन और मेहनत की बदौलत जमीन से सीधे आसमान की दौड़ लगाई है। ख़ुद के बूते पर दुनिया के जाने-माने पूँजीपतियों की अग्रिम श्रेणी में अपना स्थान बनाने वाले नरेश गोयल ने भारत में निजी एयरलाइंस की अवधारणा का सूत्रपात किया।

300 रूपये की मामूली पगार पर एक ट्रेवल एजेंसी में काम करने वाला यह शख्स आज देश के सबसे अमीर उद्योगपति की सूची में शुमार कर रहे हैं।

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जी हाँ, हम बात कर रहे हैं भारत की सबसे बड़ी निजी एयरलाइंस कंपनी जेट एयरवेज के मालिक नरेश गोयल की। 1949 में पटियाला के एक छोटे से कारोबारी परिवार में पैदा लिए नरेश ने खुद की आँखों के सामने अपने पैतृक कारोबार को डूबते देखा। कारोबार में हुई भयंकर आर्थिक हानि की पूर्ति के लिए घर-बार सब कुछ बेचना पड़ा। महज़ 12 साल की उम्र में ही जिंदगी में संघर्ष ने दस्तक दे चुकी थी। फिर भी हार ना मानते हुए नरेश ने अपनी पढ़ाई जारी रखी।

शुरुआती पढ़ाई अच्छे से ख़त्म करने के बाद वो लॉ की पढ़ाई कर सीए बनना चाहते थे। किन्तु आर्थिक तंगी ने उनके सपनों पर पानी फेर दिया। उन्होंने 1967 में 18 साल की उम्र में बी.कॉम खत्म कर अपनी मां के एक चाचा की एजेंसी में कैशियर के रूप में काम शुरू किया।

महज़ 300 रूपये की मासिक पगार पर काम करते हुए नरेश को रॉयल जॉर्डन एयरलाइंस जैसे कई बड़ी कंपनियों में काम करने का मौका मिला। 1969 में महज़ 20 साल की उम्र में उनके अनुभव ने उन्हें ईराक की एक एयरलाइंस कंपनी में मैनेजर बना दिया। पांच सालों तक भिन्न-भिन्न एयरलाइंस कंपनीयों के साथ काम करते हुए नरेश के हौसले को एक नई उड़ान मिली और उसने ख़ुद की एक ट्रेवल एजेंसी खोलने का फैसला लिया।

ट्रेवल एजेंसी से एक बड़े एयरलाइन्स कंपनी की शुरुआत कर उसे सफल बनाना आसान नहीं था।

25 साल की उम्र में ट्रेवल एजेंसी खोलने के उद्देश्य से उन्होंने अपनी माँ के गहने करीब 15 हजार रूपये में बेचा। फिर 10,000 रूपये से अपने सपने की नींव रखी, जेट एयर के रूप में। शुरूआती दिनों में यह कंपनी विदेशी एयरलाइंस कंपनियों को मार्केटिंग और सेल्स में मदद मुहैया कराती थी। साल 1991 में भारत निजी एयरलाइंस की दुनिया में कदम रखा। इस मौके का लाभ उठाते हुए नरेश ने अपनी कंपनी जेट एयर को जेट एयरलाइंस के रूप में एक नई दिशा प्रदान की।

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और नरेश ने ऐसी उड़ान भरी की फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। 18 अप्रैल वर्ष 1993 में जेट एयरलाइंस के पहले जहाज़ की मुबंई के सांताक्रूज हवाई अड्डे पर अगवानी हुई। आज जेट एयरवेज दुनिया की एक बड़ी एयरलाइन्स कंपनी का रूप ले चुकी है। भारतीय ट्रेवेल मार्केट का 32 फीसदी आज जेट एयरलाइन्स के हिस्से है।

12,000 करोड़ की निजी संपत्ति के साथ नरेश साल 2006 में 16वें सबसे अमीर भारतीय थे। वर्तमान में जेट एयरवेज की वैल्यूएशन 10 हज़ार करोड़ के पार है।

एक युवा लड़का जो कभी गलियों की रोशनी में पढ़ाई किया करता था, आर्थिक बाधाओं को चीरते हुए सफ़लता का ऐसा कीर्तिमान स्थापित किया की आज हम-सब के लिए एक मज़बूत प्रेरणा के स्रोत हैं। नरेश भले ही आज इतनी ऊंचाई पर पहुँच गये हों किन्तु आज भी वो एक साधारण इंसान की तरह पेश आते। आज भी वो हमेशा जरूरतमंदों की सहायता में तत्पर रहते।

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