एक साधारण छात्र जिसने दृढ़ इच्छाशक्ति की बदौलत हर सरकारी परीक्षा में हासिल की सफलता

यदि आपने अब तक अपने जीवन में कुछ असाधारण नहीं किया है, तो अपनी क्षमता पर संदेह न करें। आप शायद शीर्ष पर नहीं गए हैं क्योंकि आपने दृढ़ता से लक्ष्य का पीछा नहीं किया है। और याद रखें हर नई सुबह आपके लिए एक और मौका है, अपने स्थिर लक्षणों को पीछे छोड़े और पूरी दृढ़ता के साथ लक्ष्य को साधें। आपकी इच्छाशक्ति ही वह हथियार है, जिसकी सहायता से आप कुछ भी हासिल करने की ताकत रखते हैं। हमारी आज की यह कहानी इन्हीं चीजों को चरितार्थ करती है।

अखण्ड स्वरूप पंडित, एक ऐसे व्यक्ति हैं जिन्होंने हर सरकारी परीक्षा को सफलतापूर्वक क्रैक किया है। यदि आप सोच रहे होंगे कि वह बचपन से ही मेधावान छात्र होंगे, अपने क्लास के टॉपर होंगे, तो आप गलत हैं। वह उत्तर प्रदेश के बरेली में एक साधारण मध्यम वर्ग के घर से ताल्लुक रखते हैं। उनके पिता ने एक एनजीओ चलाते हैं, जो स्कूलों में ओलम्पियाड का आयोजन करता है और माँ एक स्कूल में प्रिंसिपल के पद पर कार्यरत हैं। पठन-पाठन का माहौल मिलने के बावजूद भी अखण्ड अपने स्कूल के दिनों में एक औसत छात्र हुआ करते थे।

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"मैं हमेशा एक बहुत ही औसत किस्म का छात्र था या आप औसत छात्र से नीचे भी कह सकते हैं जो कभी भी पढ़ाई में रुचि नहीं रखता था। लेकिन यह सच है कि मैंने लगभग 8-10 सरकारी परीक्षाओं में उत्तीर्ण किया है।"

एक दिन अखण्ड को एक व्यक्ति का फोन आया जिसने कुछ भयावह ख़बरें सुनाईं। वह तब कॉलेज में थे और उनका जीवन दोस्तों के साथ मौज-मस्ती में बीत रहा था। उनके उपर कोई बड़ी जिम्मेदारी भी नहीं थी। फोन पर व्यक्ति ने उन्हें बताया कि उनके पिता एक दुर्घटना का शिकार हो गए हैं, जिसमें वह गंभीर रूप से घायल हैं और उनके चालक की मृत्यु हो गई थी। उनके पिता को तुरंत अस्पताल पहुँचाने की आवश्यकता थी। एक हजार किलोमीटर दूर से वह समझ नहीं पा रहे थे कि हालात को कैसे संभाला जाए। वह इसे अपने जीवन का सबसे बुरा अनुभव मानते हैं, हालाँकि यह उनके लिए एक टर्निंग पॉइंट साबित हुआ।

किसी तरह उनके पिता को भर्ती कराया गया। अस्पताल पहुंचकर उन्होंने उन विकट परिस्थितियों को बेहद करीब से देखा। अस्पताल के खर्चों ने उनकी सारी बचत को खत्म कर दिया और इस व्यक्तिगत आपदा ने उन्हें बदलने को मजबूर कर दिया।

परिवार किसी तरह स्थिति से उबर गया लेकिन इस घटना ने उसे एक बात सिखाई कि वह अपने जीवन को उस तरह से नहीं जी सकते जैसा वह जी रहे थे। वह कभी भी इतना असहाय महसूस नहीं करना चाहता थे। अखण्ड जीवन में एक ऐसे स्थान पर पहुँचना चाहते थे, जहाँ वह बिना जमीन खोए हर संकट का सामना कर सके। शैक्षणिक जीवन में अव्वल न रहने के बावजूद भी उन्होंने सरकारी परीक्षाओं को पास करने का संकल्प लिया।

हर मध्यम वर्ग के व्यक्ति की तरह, उन्होंने अपनी समस्याओं को हल करने के लिए शिक्षा को अपना हथियार बनाया। उन्होंने नए सिरे से पढ़ाई शुरू की। उन्होंने यूपीएससी परीक्षाओं में बैठने  का निश्चय किया क्योंकि इससे उन्हें अपने परिवार के रास्ते में आने वाली हर समस्या को संभालने के लिए सुरक्षा, शक्ति और जीवन में स्थिरता मिल सकती थी। उन्होंने दूसरों को पढ़ाना शुरू किया क्योंकि इससे उन्हें अध्ययन और संशोधन दोनों में मदद मिलेगी। उन्होंने साथी उम्मीदवारों को पढ़ाने के लिए प्रत्येक सप्ताह के अंत में विभिन्न स्थानों की यात्रा की और इस प्रकार अपने ज्ञान को पॉलिश किया।

"कई बार मुझे लगता था कि यह मेरी सीमा से परे है। मैं ऐसा नहीं कर सकता। लेकिन फिर मैं खुद को याद दिलाता था कि अगर मैंने इसे दूर नहीं किया तो यह हताशा मुझसे आगे निकल जाएगी और एक दिन मेरा परिवार और मैं फिर से मैदान में उतर सकते हैं। पहले जैसी गंभीर स्थिति पुनः उत्पन्न हो सकती है।"

अपने दृढ़ संकल्प पर डटे रहें और हर दिन के लिए लक्ष्य तय करें। आपको अपने लक्ष्यों को मासिक आधार पर, साप्ताहिक आधार पर, दैनिक आधार पर तय करना होगा। जब आप उन लक्ष्यों को पूरा करेंगे, तो आप संतुष्ट महसूस करेंगे। प्रत्येक चरण को पार करने से आपको अपने लक्ष्य के करीब लाने के लिए एक और लक्ष्य निर्धारित करने की प्रेरणा मिलेगी और एक दिन आप अपने सपनों को जीएंगे।

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अखण्ड ने बहुत संघर्ष किया, अपने लक्ष्य को प्राप्त करने का सपना देख अपनी जेब में थोड़े से पैसों के साथ शहरों की यात्रा की। आज, वह सबसे लोकप्रिय ऑनलाइन शिक्षा प्रबंधन कंपनियों में से एक, द कैटलिस्ट ग्रुप के संस्थापक हैं, जो सरकारी नौकरी के इच्छुक उम्मीदवारों को तैयार करते हैं। भारतीय इंजीनियरिंग सेवा (IES) की शानदार नौकरी को छोड़ अब वह दूसरों को प्रतियोगिता परीक्षा क्रैक करने की ट्रेनिंग दे रहे हैं। 

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