परंपरागत खेती छोड़ इस किसान नें शुरू की मोती की खेती, सालाना 3 लाख का हो रहा शुद्ध मुनाफ़ा

एक ओर जहाँ कम मुनाफ़े के कारण ज्यादातर किसान खेती को छोड़ने लगे हैं। तो वही दूसरी तरफ नई पीढ़ी के युवा किसान आधुनिक तरीके को अपना कर खेती के नए आयाम स्थापित कर रहे हैं। मतलब स्पष्ट है कि जैसे एक ही सिक्के के दो पहलू होते हैं उसी प्रकार खेती के भी दो पहलू हैं, खेती भी मुनाफ़े का सौदा बन सकता है बस जरुरत है तो सोच समझ कर आधुनिक तरीका अपनाने की। आज हमारा देश भी खेती की दिशा में दिन-व-दिन हाईटेक होता जा रहा है। कई तरह की फ़सलों और फल-सब्जियों की आधुनिक तरीके से खेती करने के बारे में आपने सुना होगा। लेकिन आज हम एक किसान द्वारा की जा रही ऐसे चीज़ की खेती के बारे में बताने जा रहे हैं, जो शायद ही आप जानते होंगे।

हम जिनकी बात कर रहे हैं उनका नाम है सत्यनारायण यादव। सत्यनारायण राजस्थान के खड़ब गाँव के रहने वाले हैं। सत्यनारायण सीप मोती पालन की खेती है। वे सीप को पालते हैं और उससे मोती पैदा कर बेचते हैं। इस काम में उनका साथ उनकी पत्नी भी देती हैं। दोनों आज साथ मिलकर इस सफल खेती को चला रहे हैं और सालाना 3 लाख रूपये की कमाई कर रहे हैं।

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दरअसल सत्यनारायण भी पहले आम किसानों की तरह खेती-बाड़ी करके अपना परिवार चलाते थे। लेकिन कभी मौसम की मार, कभी फसल का सही दाम नहीं मिलना तमाम कारणों से उन्हें ज्यादा फायदा नहीं हो पाता था। फिर एक दिन उन्हें सीप पालन कर मोती उगाने की खेती के बारे में पता चला। उन्हें इस काम में मुनाफ़ा नज़र आया। भविष्य में अच्छी सम्भावना को देखते हुए उन्होंने इस विधि को सिखने की इच्छा जतायी और ओड़िसा के आईसीएआर भुवनेश्वर में 15 दिनों की ट्रेनिंग ली। ट्रेनिंग खत्म करने केे बाद वे अपने गाँव वापस लौट आये और सीप मोती की खेती करना प्रारंभ कर दिया।

शुरुआत में उन्होंने 10 हज़ार की लागत से इस काम की शुरुआत की। उन्होंने इसके लिए एक हौज़ का निर्माण करवाया जिसमें वह पानी भरकर सीप रख सकें। इस हौज़ में वे गुजरात, केरल और हरिद्वार से उन्नत नस्ल की सीप लाकर डालते थे। चूंकि यह मोती प्राकृतिक नहीं मानव निर्मित होती है, इन सीपों में शल्य कार्यन्वयन द्वारा मेटल ग्राफ्ट और उचित नाविक डाला जाता है। इसी के द्वारा सीप अपने अन्दर मोती का निर्माण करता है। फिर इस सीप को उपयुक्त वातावरण में करीब 8-10 महीने के लिए रखा जाता है जबतक की सीप में मोती का निर्माण न हो जाये। उसके बाद सीप को चीरा लगाकर मोती को निकल लिया जाता है। इस मोती की डिमांड मार्केट में काफी अधिक होती है, तो इससे उन्हें अच्छा खासा मुनाफ़ा भी मिल जाता है।

सीप से मोती निकाल लेने के बाद भी उस सीप से और भी कमाई होती है। दरअसल सीप सेल का इस्तेमाल लोग साज-सज़्ज़ा के लिये भी करते हैं। घर की खूबसूरती बढ़ाने के लिए, गमलों में, झूमर में, गुलदस्ते में, मुख्य द्वारा पर लटकने के लिए, व अन्य सजावटी चीजों में भी लोग सीप के सेल का उपयोग करते हैं। सीप निर्मित इस प्रकार के सामान को लोग अच्छे दामों में खरीदते हैं। यही नहीं सीप के सेल का उपयोग आयुर्वेदिक दवा बनाने में भी होती है। इस लिए सीप का सेल भी बहुत महँगे कीमत पर बिक जाते हैं।

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सत्यनारायण के इस फायदे भरे अनोखी खेती को देख ढेर सारे लोग उनसे इसका तरीका सीखने आते हैं। अबतक वो आसपास के राज्य असाम, जम्मू, हरियाणा, मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश व पंजाब आदि के करीब 150 विद्यार्थियों को इसकी ट्रेनिंग दे चुके हैं। जहाँ वे लोगों को सीप पालन व मोती की खेती का पूरा तरीका सिखाते हैं। आज उनको देख कई सारे किसान और युवा भी इस खेती की ओर आकर्षित हो रहे हैं। अब वे भी इसे अपना कर इसमें अपना करियर बनाना चाहते हैं।

विशेषज्ञों की मानें तो अक्टूबर से दिसम्बर मोतियों की खेती के लिए अनुकूल समय होता है। 0.4 हेक्टेयर के तालाब में करीब 25 हजार सीप से मोती का उत्पादन किया जा सकता है और इससे सालाना 8 से 10 लाख रुपए की आमदनी आसानी से हो सकती है।


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