1
1

मैंने कई माँ-बाप देखे हैं जो अपने नन्हें-मुन्नों की बड़ाई करते वक़्त उनकी मोबाइल पे नाचती उँगलियों का बखान करने से नहीं चूकते| रोते बच्चों को चुप करना है तो कार्टून लगा दो, वो टूटा खिलौना भूल जाएगा| अगर आप व्यस्त होने वाले हैं तो यूट्यूब पे राइम्स या कार्टून लगा दें| एक ख़त्म होते ही दूसरा शुरू हो जाएगा| मैं आपसे जानना चाहती हूँ कि क्या आपने भी अपने आस-पास के परिवारों में, या खुद के परिवार में यह देखा है? क्या आप ऐसा करते हैं, और आपके बच्चे की उम्र कितनी है?

ये करना कितना ज़रूरी है और कितना हानिकारक, ये भी बताएं| क्या बच्चे फोन न देने पर चिड़चिड़े हो जाते हैं? या फिर छोटी उम्र से ही टेक्नोलॉजी की तरफ रुझान बढ़ जाता है, बच्चे सीखने लगते हैं? आपने आस-पास क्या देखा है, क्या महसूस करते हैं नीचे कॉमेंट्स में हमे बताएं| 

181
Replies (1)
  • जी मैंने कई बार ऐसा देखा है या यूँ कहूँ गाहे-बगाहे देख ही लेता हूँ। मैन देखा है लोग अपने बच्चों को अक्सर बस-ट्रैन पर शांत रखने के लिए कार्टून यूट्यूब पर प्ले करके दे देते हैं। बच्चे इसके आदि भी हो गए हैं, मोबाइल ना मिलने पर उनमें चिड़चिड़ापन और गुस्सा साफ देखने को मिलता है। गेम्स का भी गजब का क्रेज़ है बच्चों को सोने से पहले गेम्स खेलना है, पढ़ने के बाद खेलना है। आजकल तो माता-पिता भी लोभ देने लगे हैं कि खाना खा लो तो गेम्स खेलने देंगे, होमवर्क कर लो तो 15 मिनट गेम मिलेगा बगैरा।

    किसी हद तक यह अच्छा पर बुरा भी है।