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हर व्यक्ति की यही चाह होती है कि वो अपनी जिंदगी में ऊँचे पायदान पर पहुँचने में सफल हो। अपने स्तर से हर कोई भरपूर कोशिश करता लेकिन कुछ भाग्यशाली लोग ही जिंदगी की राह में सफल हो पाते। ऐसे लोग न सिर्फ सफल होते बल्कि इनकी सफलता औरों के लिए मिसाल बन जाती है। लेकिन सबसे खास बात यह है कि सफल होने वाले व्यक्ति में जयादातर वो होते जिन्होंने अपनी जिंदगी की राह में कभी हार नहीं माने और परिस्थितियों का डटकर मुकाबला किया।

आज हम ऐसे ही एक भारतीय की कहानी लेकर आए हैं जिन्हें एक वक़्त पर जॉब के लिए काफी मशक्कत का सामना करना पड़ा था लेकिन बाद में वे दुनिया में सबसे ज्यादा सैलरी लेने वाले अधिकारी बनें।

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दुनिया में सबसे अधिक सैलरी उठाने वाले बैंकरों में शुमार निकेश अरोरा किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। गाजियाबाद में एक भारतीय वायुसेना अधिकारी के घर पैदा लिए, अरोड़ा ने साल 1989 में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, बीएचयू से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में स्नातक की डिग्री हासिल किया। महज 21 वर्ष की आयु में आगे की पढ़ाई के लिए उन्होंने अमेरिका का रुख किया और नार्थईस्टर्न विश्वविद्यालय से सफलतापूर्वक एमबीए की पढ़ाई की। लेकिन अच्छी यूनिवर्सिटी से पढ़ाई करने के बाद भी निकेश का शुरूआती सफ़र बिलकुल भी अच्छा नहीं था। एक साक्षात्कार में, अरोड़ा इस बात के बारे में बताते हैं कि शुरुआत में उन्हें अनेकों जॉब के लिए ख़ारिज कर दिया जाता था और जिंदगी जीने के लिए उनके पास पिता द्वारा दिए 200 डॉलर ही एकमात्र सहारा था। 

साल 1992 उनके लिए अच्छा रहा और उन्हें फिडेलिटी इन्वेस्टमेंट्स में जॉब मिल गई। यहाँ उन्होंने शीर्ष वित्त और प्रौद्योगिकी प्रबंधन पोर्टफोलियो आयोजित किए। बाद में उनके काम को देखते हुए उन्हें उपाध्यक्ष बना दिया गया। कुछ वर्षों तक यहाँ काम करने के बाद उन्होंने टेलीकॉम सेक्टर में घुसने का फैसला किया और साल 2001 में टी-मोबाइल इंटरनेशनल डिवीजन के मुख्य विपणन अधिकारी के रूप में कार्य किया। 

साल 2004 में उन्होंने गूगल जॉइन किया और इसके यूरोपियन ऑपरेशंस की अगुवाई की। गूगल ज्वाइन करने का उनका इरादा बेहद क्रांतिकारी साबित हुआ और उसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। कुछ सालों तक यहाँ काम करने के बाद साल 2011 में उन्हें कंपनी के चीफ बिजनस ऑफिसर के तौर पर पदोन्नति मिली और वे गूगल में सबसे ज्यादा सैलरी लेने वाले अधिकारी बन गये। अरोड़ा गूगल में काम करते हुए नए विज्ञापन बाज़ार खोलने और कंपनी के विज्ञापन राजस्व में वृद्धि को लेकर कई कदम उठाये। उन्होंने प्रदर्शन विज्ञापनों से और अधिक राजस्व प्राप्त करने और गूगल की यूट्यूब वीडियो साइट के लिए अधिक विज्ञापनदाताओं को प्राप्त करने में भी प्रमुख भूमिका निभाई।

अक्टूबर 2014 में अरोड़ा ने गूगल के वाइस चेयरमैन का पद छोड़कर सॉफ्टग्रुप को ज्वाइन कर लिया। अक्टूबर 2014 में ही अरोड़ा की अगुवाई में सॉफ्टबैंक ने स्नैपडील में 62.7 करोड़ डॉलर और ओला कैब्स में 21 करोड़ डॉलर का निवेश किया था। नवंबर 2014 में सॉफ्टबैंक ने रियल एस्टेट वेबसाइट हाउसिंग में 9 करोड़ डॉलर लगाए थे। इतना ही नहीं अगस्त-नवंबर 2015 में सॉफ्टबैंक ने अरोड़ा की कमान में डिलीवरी स्टार्टअप ग्रोफर्स में भी निवेश किया था। 

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निकेश अरोड़ा को फाइनैंशल ईयर 2015-16 में 73 करोड़ डॉलर यानी करीब 500 करोड़ रुपये का सैलरी पैकेज मिला था। इस वेतन पैकेज ने उन्हें दुनिया का तीसरा उच्चतम-भुगतान अधिकारी बना दिया था। 

जून 2016 में अरोरा ने सॉफ्टबैंक समूह से इस्तीफा दे दिया था। अरोड़ा अपनी सफलता में तीन महत्वपूर्ण कारकों को श्रेय देते हैं — भाग्य, कड़ी मेहनत और किसी भी स्थिति के अनुकूल होने की क्षमता।

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