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परिस्थितियाँ चाहे जो भी हो, प्रतिभा किसी की मोहताज़ नहीं होती। कोई भी जब किसी मंज़िल के लिए निकलता है तो रास्ते में कठिनाइयाँ बहुत आती है। पर उन कठिनाइयों को जो पार कर लेता है वही उस मंज़िल को जीतता भी है। पर यह कठिनाइयाँ और भी बढ़ जाती है जब किसी लड़की की बात हो। हमारा देश एक पुरुषप्रधान देश है, अब धीरे-धीरे लोगों की मानसिकता तो बदल रही है। पर आज भी कई जगह लड़कियों को अपनी बुनियादी हक़ के लिए भी लड़ना पड़ता है। टैलेंट होने के बावजूद उन्हें आगे बढ़ने से रोका जाता है और उनकी प्रतिभा को दबाया जाता है। पर आज हम जिस लड़की की बात करने जा रहे हैं, उसने परिस्थितियों का सामना कर खुद को साबित किया।

इनक नाम है दीक्षा सिंह जो उत्तर प्रदेश के सुलतान जिले के बरवारीपुर गाँव की रहने वाली हैं। दीक्षा एक बहुत ही सामान्य परिवार से आती हैं। उनके पिता प्रदीप कुमार सिंह गाँव में ही मैकेनिक का काम करते हैं। उनकी माता कुसुम सिंह एक गृहिणी हैं। इतनें सामान्य परिवार से होनें के बावजूद दीक्षा नें इंडियन इंजीनियरिंग सर्विस (आइईएस) में 27वां रैंक लाकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है।

दरअसल दीक्षा बचपन से ही बहुत ही मेधावी छात्र थीं। वह बचपन से ही पढाई में अव्वल आती थीं। दीक्षा नें झारखंड के सरस्वती विद्या मंदिर से अपनी स्कूली शिक्षा पूरी थी। 12 वीं तक की पढाई उन्होंने वही से पूरी की है। दीक्षा 10वीं और 12वीं दोनों बोर्ड एग्जाम में डिस्ट्रिक्ट टॉपर रही हैं। उन्हें दसवीं में 87 प्रतिशत और बारहवीं में 89 प्रतिशत अंक प्राप्त हुए थे। 12वीं पूरी करनें के बाद दीक्षा की इक्षा इंजीनियरिंग करनें की थी, उन्हें अपने पहले प्रयास में यूपीटीयू में 8000 वां रैंक प्राप्त हुआ, उसके बाद उन्होंने गाज़ियाबाद के एक प्राइवेट कॉलेज में एडमिशन लिया।

दीक्षा ने इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में एडमिशन लिया था। इंजीनियरिंग की पढाई के दौरान भी अपनें कॉलेज की भी हमेशा टॉपर रही। कॉलेज की पढाई ख़त्म करनें के बाद दीक्षा को कोई प्राइवेट जॉब नहीं करनी थी। बल्कि वह किसी प्रतिष्ठित संसथान के लिए काम करना चाहती थी। फिर दीक्षा नें मेडिज़ी नमक एक कोचिंग संसथान में एडमिशन लिया और परीक्षा की तैयारी में लग गई। 1 साल की तैयारी के बाद उनका सिलेक्शन भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर में हो भी गया था लेकिन दुर्भाग्य से इंटरव्यू में वह छट गयीं। लेकिन जब हौसले बुलंद हो तो मंज़िल मिल ही जाती है। फिर दीक्षा नें इंडियन इंजीनियरिंग सर्विस (आइईएस) के लिए अप्लाई किया और उन्हें 27 वां रैंक प्राप्त हुआ।

लेकिन दीक्षा की उड़ान बस यहीं नहीं रुकी, वे अब आईएएस की तैयारियों में जुटी हैं। उनकी भावन अब देश सेवा की है। इतनी आर्थिक रूप से कमज़ोर होने और एक मैकेनिक की बेटी होने की बाबजूद दीक्षा ने जो जज़्बा दिखाया है वो वाकई क़ाबिले तारीफ है।