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समस्या जब बहुत बड़ी हो जाए तो समझ जाना चाहिए कि समस्‍या का समाधान मिलने वाला है। यह बात लागू होती है ‘वेस्ट मैनेजमेंट’ पर। आज शहरों में कूड़ा सबसे बड़ी समस्या बन चुकी है। लेकिन आज कचरे के प्रबंधन अर्थात वेस्ट मैनेजमेंट को लेकर जहां एक और नए स्टार्टअप युवाओं द्वारा शुरू किए जा रहे हैं वहीं नित नए प्रयोग वेस्ट मैनेजमेंट को लेकर भी किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में चेन्नई के इंजीनियरिंग के छात्रों ने इमारतें टूटने के बाद निकले मलबे से ब्लॉक बनाने में सफलता हासिल कर ली है।

मलबा प्रबंधन की दिशा में एक नयी खोज 

मलबा एक ऐसा वेस्‍ट है जिसे फेंकना भी आसान नहीं है। शहरों की सड़कों के किनारे यहां वहां मलबे के ढेर देखे जा सकते हैं। कोंगू इंजीनियरिंग कॉलेज इरोड के छात्रों को इस प्रयोग के लिए आईआईटी मद्रास द्वारा आयोजित कार्बन जीरो चैलेंज प्रतियोगिता में पुरस्कृत भी किया गया है। निर्माण प्रक्रिया में प्रयोग की जाने वाली ईटों की भांति मलबे से बने यह ब्लॉक गुणवत्ता में भी परखे गए हैं। भविष्य में इसे बेहतर विकल्प के तौर पर निर्माण प्रक्रिया में प्रयोग किया जा सकेगा।

मलबे को ब्‍लॉक्‍स में तब्‍दील करने की प्रक्रिया

ब्लॉक बनाने की प्रक्रिया में मलबे में से कंक्रीट वेस्ट को बड़े टुकड़ों से अलग करके बारीक टुकड़ों में पीसकर सोडियम सिलिकेट में मिला दिया जाता है जिसके कारण कंक्रीट बेस्ट के कणों की बीच की दूरी कम होकर वह अच्छी तरह बंध  जाते हैं जिससे बनने वाले ब्लॉक्स को मजबूती मिलती है। इस मिश्रण में कार्बन डाइऑक्साइड को अलग-अलग प्रेशर पर चेंबर में डालकर इंजेक्ट किया जाता है। इसके बाद ही पानी और सीमेंट में मिलाने की प्रक्रिया पूरी होती है फिर इसे सूर्य की धूप में सुखाया जाता है। कार्बन डाइऑक्साइड इंजेक्‍ट करने से मिश्रण के भौतिक गुणों के साथ-साथ घनत्व की गुणवत्ता भी बढ़ जाती है जिससे यह लंबे समय तक चलेंगे।

चेन्‍नई शहर में इस तकनीक की शुरूआत हो गई है

अकेले चेन्नई शहर की बात करें तो प्रतिदिन 1200 टन मलबा यहां फेंका जाता है। चेन्नई कारपोरेशन ने दो जगहों अठीपट़टू और पल्‍लीकरनाइ में मलबे के वेस्ट मैनेजमेंट की व्यवस्था फिलहाल शुरू कर दी है। इस तकनीक से कंक्रीट वेस्ट मैनेजमेंट काफी सफल हो सकता है क्योंकि भवन निर्माण पूरे देश में एक निरंतर प्रक्रिया है।

विकसित देश बनने की कड़ी में एक महत्‍वपूर्ण कदम  

छात्रों की टीम ने वेस्ट मैनेजमेंट की प्रक्रिया और इसमें प्रयोग होने वाले टूल्स के पेटेंट के लिए भी अप्लाई कर दिया है। विकासशील से विकसित देश की ओर अग्रसर होते हुए भारत में किया गया यह अविष्कार सफलतापूर्वक पूरे देश में अपनाए जाने पर मलबा वेस्ट मैनेजमेंट की दिशा में एक अभूतपूर्व कदम होगा भविष्य में युवा पीढ़ी के लिए नए प्रयोगों के रास्ते भी खुलेंगे।