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आए दिन हम उन व्यक्ति विशेष के बारे में सुनते हैं जो विपरित परिस्थितियों से लड़ कर इस दुनिया में अपने लिए एक विशिष्ठ स्थान बनाते हैं। आज की कहानी ऐसे ही एक व्यक्ति की है जिसने अपने सपनो को साकार करने के लिए सब कुछ पीछे छोड़ दिया। वे अब एक अरबपति हैं और विश्व के तमाम बड़े शहरों में उनके होटल हैं।

1946 में फरीदकोट, पंजाब में संत सिंह चटवाल का जन्म एक छोटे से चाय दुकान वाले के घर में हुआ। यद्यपि उनकी परिवारिक पृष्ठभूमि आर्थिक रुप से बहुत मजबूत नहीं थी फिर भी संत सिंह के सपने काफी ऊँचे थे। उनके लिए सफलता का सूचक पैसे कमाना था। ऐसा शायद इसलिए था क्योंकि उन्होंने अनवरत अपने परिवार को संघर्ष करते देखा था।

जब संत 5वीं कक्षा में थे तो उन्होंने कार खरीदने और ऊँचा उड़ने का सपना देखा था। हालांकि उनके पिता साईकिल खरीदने में भी समर्थ नहीं थे। इसके बावजूद भी वे कृत संकल्प थे। उन्होंने अपने कठिन मेहनत से 14 वर्ष की उम्र में ही निजी विमान चालन का लाईसेंस लिया और 17 साल की उम्र में पायलट बने।

कुछ वर्षों तक भारतीय वायु सेना में कार्य करने के बाद उन्होंने वह नौकरी छोड़ दी। वह जीवन में सफल होना चाहते थे। वे बचपन से फरीदकोट के महाराज के प्रशंसक थे और उनके ही जैसा बनना चाहते थे। पैसे कमाने की चाह में संत अपनी पत्नी दमन के साथ इथोपिया की राजधानी अदीस अबाबा में जाकर बस गये।

वे वहाँ के एक स्थानीय रेस्तराँ में काम करने लगे जहाँ के मालिक ने कुछ महीनों के लिए कार्यभार की पुरी जिम्मेदारी उन्हें सौंप दी। संत ने रेस्तराँ को एक बढ़ते हुए व्यापार के रुप में बदल दिया। उनके भीतर के व्यवसाय के हुनर को पहचानते हुए रेस्तराँ के मालिक ने उन्हें उनकी प्रतिभा का बोध कराया। इसके बाद संत ने अपने कठिन परिश्रम के दम पर भारतीय पाक शैली की दो रेस्तराँ चलाए। यह दौर इथोपिया में राजनैतिक बदलाव का था जिसने हमेशा के लिए उनकी जिन्दगीं बदल दी।

साल 1975 में संत अपनी गाढ़ी कमाई के बचत को समेट कर कनाडा का रुख किया और वहाँ एक रेस्तराँ खोला। जिन्दगी के हर राह पर उनकी पत्नी ने साथ दिया। कुछ महीनो बाद उन्होंने वहाँ के रेस्तराँ को बेचकर न्यूयॉर्क चले आए। संयुक्त राज्य में उन्होंने पहले 'बम्बे रेस्तराँ' की शुरुआत की और फिर अपने साम्रज्य का विस्तार करते चले गये। जो आज 'हैम्पशायर होटलस और रिसाॅर्ट्स' के नाम से जाना जाता है। समय के कालक्रम में उनके बेटे विक्रम और विवेक भी व्यवसाय में उनके साथ जुड़ गये। 

वह 90 का दशक था और बिल क्लिंटन अमेरिका के वाईट हाऊस में राष्ट्रपति के रुप में थे। खाने के बड़े शौकिन क्लिंटन जोड़े ने भारतीय भोजन को हमेशा अपने निकट पाया। 90 के बाद के दशकों में चटवाल और क्लिंटन काफी करीबी मित्र बन गये। संत डेमोक्रेट पार्टी के समर्थक बने और उन्होंने उनके चुनावी अभियान के लिए चन्दा भी दिया। वह विलियम जे. क्लिंटन फाउण्डेशन के न्यासी (trustee) बने, यह एक परोपकारी संगठन है जिसका संचालन स्वयं पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन द्वारा किया जाता है। इस संस्था का मुख्य फोकस वैश्विक स्वास्थ सुरक्षा और आर्थिक विकास आदि पर होता है। यह वह वक्त था जब उनका होटल 'पाशा' रियल स्टेट संकट के कारण दिवालिया हो चुका था। 

वह दौर संत के लिए चुनौतियों से भरा था क्योंकि उनका एक मित्र भेदिया बन गया और उनके राजनैतिक दान का रहस्योदघाटन कर दिया। इसमें उनके द्वारा स्ट्रा डोनर के रुप में डेमोक्रेट उम्मीदवार को फण्डिंग करने की भी बात कही। जो चुनाव अभियान कानून का उल्लंघन है। संत कई षडयंत्रों में उलझ गये और उन्हें दोषी पाया गया। अपने कठिन मेहनत से उन्होंने फिर से अपनी शाख बनाई और वे पुनः तेजी से ऊपर बढ़े।

आज, भारतीय व्यंजनों के बादशाह, संत के होटल दुनिया भर में सभी मशहूर शहरों में है। टोरंटो, न्यूयॉर्क, वाशिंगटन डी.सी., ह्यूस्टन, बुडापेस्ट उनमें से कुछ नाम हैं। भारत में भी दो होटल मुंबई और जयपुर खोलने की उनकी योजना है। वे संयुक्त राज्य के पहले भारतीय हैं जिन्हें उनके सामाजिक क्षेत्र में उत्कृष्ट सेवा के लिए 'आॅडर आॅफ खालसा' से नवाजा गया है। 

हैम्पशायर होटलस एण्ड रिसाॅर्ट्स, एल.सी.सी. और द चटवाल, न्यूयॉर्क के अध्यक्ष और सी.ई.ओ के रुप में संत यूके, यूएस और थाईलैण्ड के होटलों समेत मैनहैट्टन में 2500 कमरों का स्वामित्व रखते हैं। आज वे खरबों डाॅलर की संपत्ति के मालिक हैं। वे अब कुछ नया लाने जा रहे हैं, जीवन शैली होटलों में रेगिस्तान राजशाही के रुप में। वे अपने आप को असली पंजाबी कहते हैं जिसका दिल हमेशा हिन्दुस्तान में रहता हैं और वे कभी भारतीय भोजन के बगैर नहीं रह सकते। संत परम आत्मविश्वासी और अन्नत आशावादी व्यक्ति है। 2010 में उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया गया।

"सपने वह नहीं होते जो रात को सोने पर आते हैं, सपने वो होते हैं जो रातों को सोने नहीं देते।" अब्दुल कलाम जी की इन बातों की झलक संत सिंह चटवाल के जीवनवृत पर स्पष्ट नजर आती है। संत की कहानी करोड़ों लोगो को सपने देखने और उन्हें पुरा करने के लिए मेहनत की प्रेरणा देता है।