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बेंगलुरु पुलिस के ज्वाइंट कमिश्नर डी सी राज्‍जपा अपने पेशे के साथ एक कुशल कवि भी हैं जिन्होंने अपने जीवन और पेशे के अनुभवों को कविताओं में ढालने का अनूठा प्रयास किया है। अभी तक 500 पुलिसकर्मियों के अंतर्मन की प्रतिभा को कविता लिखने के द्वारा प्रेरित भी किया है। सामाजिक सौहार्द के साथ पुलिस के पेशे को जोड़ने में विश्वास रखने वाले डी सी राज्जपा संवेदना और भावनाओं को कन्नड़ भाषा में कविताएं लिखकर खूबसूरती से पिरो लेते हैं।  

पुलिस फोर्स में उनका चुना जाना भी अचानक ही हुआ दरअसल राज्‍जपा अपने नाम से पहले डी सी से प्रेरित होकर डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर बनना चाहते थे इसी प्रयास में आईपीएस की परीक्षा पास होने पर पुलिस का कैरियर चुनना तो स्वाभाविक ही था। 

पिछले 28 सालों से पुलिस फोर्स में कार्य करते हुए राज्जपा ने अपने कार्य के प्रति हमेशा मुस्तैदी और ईमानदारी दिखाई है। इन्‍होंने कर्नाटक के अलावा सागर, मंगलुरु, गुलबर्ग, शिमोगा, बिलारी, बीजापुर और बेंगलुरु में भी रेलवे सीआईडी और डीसीपी वेस्ट पद पर कार्य किया है। इस समय वह सिटी आर्मड रिजर्व बेंगलुरु में जॉइंट कमिश्नर हैं। राजप्पा ने 14 साल की उम्र से कविताएं लिखना शुरू किया था। कन्नड़ भाषा के महान कवि कुवेंपु की ‘करीसिडा’ कविता ने राजप्पा पर गहरा असर छोड़ा। इस कविता में कुवेंपु ने अपने जन्म स्थान कुप्पल्ली और कर्नाटक के मलनाड क्षेत्र में अपने घर के बारे में लिखा था। इससे प्रेरित होकर राजप्पा ने अपने घर के बारे में एक कविता लिखी। इसके बाद राजप्पा ने अपना लेखन जारी रखा। 1979 में जब वह मैसूर के महाराजा कॉलेज से स्नातक कर रहे थे, तब उनकी मुलाकात उनके प्रेरणास्त्रोत कुवेंपु से हुई। राजप्पा ने अपनी कविताएं कुवेंपु को दिखाईं और उन्हें काफी सराहना मिली। कुवेंपु ने उन्हें लेखन जारी रखने की सलाह दी। अब तक लगभग 300 कविताओं की रचना कर चुके हैं काफी कविताएं उनके जीवन और पेशे के अनुभवों पर भी आधारित है। इनमें से ज्यादतर बतौर पुलिसकर्मी, उनके निजी अनुभवों से प्रेरित हैं। इस संबंध में एक बार उनके सामने एक केस आया। जिसमें एक 13 साल की बच्ची, रेप के बाद गर्भवती हो गई। पीड़िता के मां-बाप उसे राजप्पा के ऑफिस लाए और उनसे न्याय की गुहार लगाई। उस बच्ची ने राजप्पा की संवेदनाओं को झकझोर दिया। राजप्पा को अपने अंदर उमड़ रहे तूफान को संभालने के लिए कविता का सहारा लेना पड़ा। जब राजप्पा गुलबर्ग में बतौर एएसपी कार्यरत थे। खदान के पत्थरों से भरा एक ट्रक दुर्घटनाग्रस्त हुआ और इस दुर्घटना में कई लोगों की जान चली गई। जब वह शवों को एक दूसरे से अलग कर रहे थे, तब उन्होंने एक 9 महीने के बच्चे को उसकी मां के शव से अलग किया। बच्चा मां का दूध पी रहा और उस अवस्था में ही दोनों की मौत हो गई थी। इस बारें में अपनी संवेदनाएं जाहिर करने के लिए राजप्पा ने एक कविता लिखी। अंग्रेजी अनुवाद में जिसका शीर्षक था, ‘डेथ ऐंड सेलिब्रेशन’। यह कविता कवि और मौत के बीच का संवाद है। कवि, मौत से सवाल करता है कि उसने एक मासूम को अपना शिकार क्यों बनाया? मौत ने उन लोगों को क्यों नहीं चुना, जो रोज मौत की दुआ मांगते हैं। 

अब तक राज्जपा के तीन कविता संग्रह छप चुके हैं। अम्मा, बसावा और राज्यश्री अवार्ड से सम्मानित यह आईपीएस अधिकारी चार साहित्य सम्मेलनों में अपनी कविताएं प्रस्तुत कर चुके हैं। 

पुलिस का कडा रवैया कई बार जनता की नाराजगी का कारण बनता है। जनता और पुलिस की इस दूरी को पाटने के लिए पुलिसकर्मियों की भावनाओं को जागृत कर के उन्हें भी कविताएं लिखने के लिए राज्‍जपा ने प्रेरित किया। लगभग 500 कॉन्स्टेबल से लेकर इंस्पेक्टर की कविताओं के चार संकलन राज्‍जपा अब तक संपादित कर चुके हैं। उन के पुलिस अधिकारी अत्यंत नकारात्मक परिस्थितियों में भी संवेदना और भावनाओं को प्रधान रखते हुए सकारात्मक समाधान की ओर बढ़ रहे हैं। 

राज्‍जपा का सपना है कि पूरे देश के पुलिसकर्मी अपनी भावनाएं कविताओं के माध्यम से व्यक्त करने के लिए एक मंच पर आएं हालांकि यह कार्य मुश्किल है लेकिन असंभव नहीं।