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सन 1947 में हमारा देश आज़ाद हुआ। देश अभी सही तरीके से आज़ादी का जश्न मना भी नहीं पाया था कि उससे पहले ही विभाजन के काले साये ने पूरे देश को घेर किया। भारत छोड़ कर पाकिस्तान जाने वाले और पाकिस्तान से भारत आने वाले लोगों के लिए वो दिन आज भी ख़ुशी से ज़्यादा दहशत मन में पैदा कर जाता है। विभाजन के दौरान उठे आतंक के तूफ़ान ने 10 लाख से ज़्यादा लोगों को मौत के घाट उतार दिया। करोड़ों लोगों को अपना घर-परिवार, ज़मीन-जायदाद और रिश्तेदारों को छोड़ कर दूसरी जगह जाना पड़ा। लोगों को किसी अनजान व नए देश में खुद को स्थापित करना किसी चुनैती के काम नहीं थी। लाखों लोग पाकिस्तान से भारत आये थे, उन्हें इस देश में सिर्फ बसना नहीं था बल्कि अपनी जमीन तैयार करनी थी। उनके आँखों में सपने तो थे पर जेब में पैसे नहीं थे। ऐसे ही एक शख्स की बात करने जा रहे हैं भारत-पाक बंटबारे के समय मात्र 5 हज़ार रुपये लेकर आये थे। लेकिन आज वे देश की सबसे बड़ी ट्रैक्टर कंपनियों में से एक के मालिक हैं।

इनका नाम है हर प्रसाद नंदा (एच.पी नंदा)। हर प्रसाद नंदा का जन्म सन 1918 में पाकिस्तान में हुआ था। मूलतः पाकिस्तान के लाहौर के रहने वाले नंदा, भारत-पाक विभाजन के वक़्त दिल्ली आ गए। उस वक़्त से वे लाहौर से 5000 रुपये और अपनी दो कारें लेकर आये थे। बावजूद इसके उन्होंने लक्जरी होटल द इम्पीरियल में रुकना सही समझा। इसकी वजह यह थी कि वे चाहते थे कि वहाँ उनकी बड़े-बड़े बिजनेसमैन से मुलाकात कर सकने और व्यपारिक संपर्क बना सकें। बाद में उन्होंने ट्रेक्टर और एग्रीकल्चर उपकरण की कंपनी एस्कोर्ट्स ग्रुप की स्थापना की।

दरअसल हर प्रसाद नंदा और उनके भाई युदी नंदा नें मिलकर एस्कॉर्ट्स ग्रुप की स्थापना की थी। इसकी स्थापना सन 1944 में लाहौर में एस्कॉर्ट्स एजेंट के नाम से हुई थी। उन्होंने अपने परिवार के बिजनेस नंदा बस कंपनी जो कि जम्मू में स्थित थी, वहीं से अपनी शुरुआत की। भारत आने के बाद  नंदा एस्कोर्ट्स को भारत के एक बड़े बिजनेज़ ग्रुप के रूप में स्थापित करने का सपना संजोये हुए थीम उन्होंने इसके लिए भारत की मूल समस्याओं पर ध्यान केंद्रित क़िया। उन्होंने पाया कि भारत में एक बहुत बड़ा तबका खेती करता है और यहाँ आधुनिक कृषि उपकरण की भारी कमी है। उन्हें इस क्षेत्र में बहुत संभावना नज़र आई।

1948 में उन्होंने एस्कोर्ट्स एग्रीकल्चर मशीन्स की नींव रखी ताकि वे ट्रैक्टर और खेती उपकरण के बाजार में ढक जमा सकें। धीरे-धीरे वे खेती उपकरणों के अलावा कंस्ट्रक्शन, मेटल हैंडलिंग और रेलवे के लिए भी उपकरण बनना शुरू कर दिया। बाद में उन्होंने ऑटोमोबाइल पार्ट्स भी बनाना शुरू किया और इसके लिए यामाहा मोटर्स के साझेदारी की। 1959 नें उन्होंने पोलैंड में भी ट्रैक्टर का एक प्लांट स्थापित किया। उन्होंने फोर्ड के साथ पार्टनरशिप की और तेजी के अपने बिजनेज़ को एक्सपैंड किया। 1990 में पत्नी के देहांत के बाद नंदा नें बिजनेज़ से सन्यास के लिया और बागडोर बेटे राजन के हाथों में दे दी। 13 अप्रैल 1999 को 82 वर्ष की उम्र में नंदा का देहांत हो गया। पर तबतक उन्होंने एस्कोर्ट्स ग्रुप को देश के शीर्ष संस्थान के शामिल करने का सपना पूरा कर लिया था।

फिलहाल एस्कोर्ट्स की जिम्मेदवारी एच.पी नंदा के पोते निखिल नंदा के हाथों में इसकी बागडोर है। आज एस्कोर्ट्स ग्रुप देश का सबसे बड़ा ट्रैक्टर उत्पादक है। आज एस्कॉर्टस ग्रुप 3500 करोड़ के अधिक की कंपनी है। एस्कोर्ट्स ग्रुप 40 से अधिक देशों में बिजनेज़ करता है और इस कंपनी में 8000 से अधिक कर्मचारी काम करते हैं।