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हमारे देश में ज्यादातर किसानों की हालत बहुत ही दयनीय है। अक्सर किसान आर्थिक हालातों के आगे मजबूर होकर आत्महत्या तक कर रहे हैं। लेकिन इन सब से अलग समाज में कुछ किसान ऐसे भी हैं जो अपनी मेहनत और जज्बे के बल पर सफलता के एक मुकाम तक पहुंच चुके हैं। ऐसे ही एक किसान उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले में हैं। जिन्होंने अपनी सोच और काबिलियत के बल पर अपनी अलग पहचान बनाई। पर आज हम आपको एक ऐसे शख्स के बारे में बताने जा रहे हैं जो आठवीं में फेल है। जिसने सपनों को सपनों तक ही सीमित रखा, हकीकत में भी उतारा। आज वह केले व टमाटर की खेती से लाखों का मुनाफा कमाता है।

इनका नाम है रामशरण वर्मा। उत्तर-प्रदेश की राजधानी लखनऊ से सटे बाराबंकी जनपद के ग्राम दौलतपुर के मामूली पढ़े-लिखे रामशरण वर्मा ने वह कर दिखाया जो बड़े बड़े शूरमा नहीं कर पाते। जिन्होंने अपने छोटे से गाव में रहकर वह कामयाबी हासिल की है। लखनऊ से सटे 30 किलोमीटर दूर बाराबंकी जनपद में खेतों से उगता है हरा सोना और ये सोना जमीन से उगाने वाला यह मामूली इंसान आज करोड़पति हैं। हाईस्कूल फेल होने के बावजूद उन्होंने आज वह सब करके दिखा दिया। जिसे बड़ी-बड़ी डिग्री लेने के बाद भी लोग हासिल नहीं कर पाते। इतनी कम पढ़ाई करके मेहनत और लगन से जिंदगी में वो सब हासिल कर लिया, जिससे आज उत्तर-प्रदेश में ही नहीं बल्कि देश में भी उसका नाम प्रसिद्द हो चुका है। उन दिनों में जब किसान खेती छोड़कर अधिक लाभ के लोभ में शहरों की तरफ पलायन कर रहे थे, तो ऐसे समय में रामशरण वर्मा खेतों से हरा सोना पैदा करने का सपना देख रहे थे।

रामशरण सिर्फ हरा केला नहीं उगाते लाल केला भी उगाते हैं। जी सही सुना अपने यह केला आम नहीं बल्कि बहुत खास है क्योंकि अभी तक आपने हरे और पीले रंग के केले के बारे में सुना होगा और इसका स्वाद भी लिया है लेकिन लाल रंग के केले के बारे में आप कम ही जानते होंगे। लाल रंग का केला ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका, वेस्टइंडीज, मेक्सिको जैसे देश के साथ ही भारत में सिर्फ तमिलनाडु राज्य के कुछ हिस्सों में पैदा किया जाता है।आसपास के गाँवों से लेकर दूसरे जिलों से किसान उनके खेत पर केले की खेती देखने पहुंच रहे हैं किसानों के साथ-साथ रामशरण वर्मा से हाईटेक खेती सीखने तमाम वीआईपी हस्थिया भी उनके फार्म हाउस पर पहुंचती हैं। रामशरण वर्मा “टिशूकल्चर पद्धति से केले की खेती” करते हैं और आज केले की पैदावार में रामशरण वर्मा सबसे आगे निकल चुके हैं। रामशरण वर्मा एक एकड़ केले की फसल में 2.5 – 3 लाख तक फायदा उठाते हैं। इसके अलावा रामशरण वर्मा अपने खेतों में अलावा टमाटर और आलू की भी खेती करते हैं।

उन्नत किसान रामशरण वर्मा हाईटेक एग्रीकल्चर एवं कंसल्टेशन के माध्यम से पहले खुद खेतों में पौधों से सीखते हैं उसके बाद किसानों को खेती के नए नए गुर सिखाते हैं। रामशरण वर्मा ने खेती में खुद को सर्वश्रेष्ठ साबित करने के लिए जो रास्ता चुना, उसमें कामयाबी भी हासिल की। पर उन्हें यह नहीं पता था कि प्रदेश के हजारों किसान उन्हीं की राह चल पड़ेंगे। उनका अनुसरण करने वाले हजारों किसान प्रदेश के बहुत से जिलों में रामशरण मॉडल पर खेती कर रहे हैं और सफल हैं। मजदूरी से जीवन यापन करने वाले किसानों ने कभी सोचा न था कि वे अपने खेत के एक टुकड़े से ही समृद्ध किसान बन जाएंगे। हाईटेक खेती के गुर से रामशरन वर्मा ने प्रदेश में पांच हजार से अधिक गरीब मजदूरों को प्रगतिशील किसान बना दिया। खुद रामशरन वर्मा ने एक हेक्टेयर खेत पर पारम्परिक खेती छोड़, वर्ष 1990 में हाईटेक खेती शुरू की। नित नया करने की जिज्ञासा से दूसरे वर्ष ही टमाटर और केला की खेती अपने छह हेक्टेयर खेतों पर उन्होंने की। उत्पादन को बाजार तक पहुंचाने के साथ रामशरन का नित नए प्रयोग करना ही छोटे किसानों के लिए वरदान बन गया और आज वह करोड़ों रुपए केला और टमाटर से कमा रहे हैं।

रामशरण वर्मा जी की इसी मेहनत का नतीजा है कि उन्हें साल 2007 और 2010 में राष्ट्रीय कृषि पुरस्कार से नवाजा जा चुका है। राष्ट्रीय कृषि पुरस्कार को देश के सबसे बड़े कृषि सम्मान के रूप में जाना जाता है। इसके साथ ही साल 2014 में रामशरण वर्मा को बागवानी के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया। आपको बता दें कि रामशरण वर्मा को कई प्रदेशों के मुख्यमंत्री और राज्यपाल सम्मानित कर चुके हैं। साल 2012 में पूर्व राष्ट्रपति स्वर्गीय ए.पी.जे. अब्दुल कलाम ने तो रामशरण वर्मा को खेती का जादूगर होने का खिताब देते हुए सम्मानित किया था।