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ग्रामीण जीवन की सरलता, सरसता, प्रदूषण मुक्त वातावरण, सौहार्द और प्रेम जहां भारत की असली संस्कृति का सूचक है वहीं दूसरी ओर शिक्षा के कमजोर ढांचे के कारण अशिक्षा और ग्रामीण जीवन एक दूसरे के पूरक है। लेकिन भारतीय प्रशासनिक सेवा 2017 में 8 वीं रैंक हासिल करने वाले अनुभव सिंह ने इस मिथक को झुठला दिया है। 

उत्तर प्रदेश राज्य के टॉपर अनुभव, ग्रामीण पृष्ठभूमि से हैं। उनके पिता धनंजय सिंह किसान हैं और मां सुषमा सिंह सरकारी स्कूल में क्लर्क हैं। अनुभव की बड़ी बहन ने विज्ञान के क्षेत्र में मास्टर्स किया है। अनुभव ने आठवीं कक्षा तक की शिक्षा गांव से करने के बाद इलाहाबाद के बीबीसी इंटर कॉलेज, शिवपुरी से आगे की पढ़ाई की। 11वीं कक्षा से ही IIT की तैयारी में अनुभव जुट गए। जिसके फलस्वरुप आईआईटी रुड़की में उन्हें दाखिला मिला। 

अनुभव की मां सुषमा सिंह लगभग 12 साल उनके साथ इलाहाबाद में रहीं। और उनकी पढ़ाई से लेकर खाने-पीने तक हर चीज का ध्यान रखा। अनुभव की मां गर्व से कहती हैं कि उनके बेटे को किताबों और पढ़ाई के अलावा कोई अन्य शौक नहीं है। शादी के प्रश्न पर सकुचाते हुए बस इतना ही कहती हैं कि समय आने पर ही शादी भी जरूर होगी। 

अनुभव के पिता के शब्दों में उनकी जिंदगी का सबसे खूबसूरत दिन वह अनुभव की इस कामयाबी को मानते हैं। बचपन से ही अनुभव का गंभीर बातों को ग्रहण करना और कंठस्थ रखना उनकी सफलता में सहायक बना। 

अनुभव अपने परिवार और मित्रों को अपनी सफलता का मुख्य स्रोत मानते हैं आईआईटी रुड़की से इंजीनियरिंग करने के बाद भारतीय राजस्व सेवा में अनुभव का चयन होने पर भी ट्रेनिंग के दौरान वह प्रशासनिक सेवा की तैयारी करते रहे। उन्हें अपनी मेहनत और लगन पर पूरा विश्वास था इसलिए अपने सपने को पूरा करने में उन्होंने कोई कसर नहीं छोड़ी। पंडित नेहरू को अपना प्रेरणास्रोत मानने वाले अनुभव स्वभाव से गंभीर और शांत है। उनका मानना है कि प्रशासनिक सेवाओं की तैयारी किसी के बहकावे या दबाव में आकर नहीं वरन अपने मन में प्रबल इच्छा के अनुरूप ही करनी चाहिए। दो से ढाई साल की कड़ी मेहनत और दोस्तों से लगातार पढ़ाई के विषयों के बारे में चर्चा करने से और परीक्षा के विषयों की किताबें लगातार पढ़ते रहने से आप सफलता के ज्यादा करीब पहुंच सकते हैं। 

ग्रामीण जीवन के पारंपरिक शैक्षिक ढांचे से बाहर निकलकर ही अनुभव ने यह सफलता अर्जित की, अन्यथा ज्यादातर ग्रामीण युवा स्वयं को इसी ढांचे में ढालकर अपने जीवन से संतुष्ट हो जाते हैं। 

अनुभव ने अपने जीवन के लक्ष्य को अपनी कड़ी मेहनत से प्राप्त करके यह सिद्ध कर दिया है कि सफलता भी उन्हीं के कदम चूमती है जो कदम उसकी तरफ बढ़ना चाहते हैं।