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किसी भी प्रदेश में पुलिस के सर्वोच्च अधिकारी के रुतबे को हम सभी समझ सकते हैं। उसकी कर्तव्यनिष्ठा, सम्मान और उपलब्धियों के चलते ही वह इस पद तक पहुँचता है। उसके ऊपर न केवल प्रदेश में कानून व्यवस्था बनाये रखने की जिम्मेदारी होती है बल्कि वह समाज के प्रति भी समग्र रूप से जवाबदेह होता है। हमारे देश में ऐसे तमाम पुलिस अधिकारी हुए हैं जिन्होंने अपनी संवेदनशीलता से देश को आगे ले जाने का काम किया है। यह सच है कि जिस समाज को सँभालने का उनपर जिम्मा होता है उसमे रहते हुए वो तमाम तरह की मुश्किलों की भी पहचान करते हैं। हालाँकि कानून व्यवस्था को सँभालते हुए यह हर बार संभव नहीं होता कि वो उन मुश्किलों का हल तुरंत दे सकें। लेकिन कुछ अफसर ऐसे भी होते हैं जो सेवा-निवृत्त हो जाने के बाद भी ने केवल अपनी जिम्मेदारियों को समझते हैं बल्कि उन मुश्किलों के हल पर भी काम करते हैं। आज की कहानी ऐसे ही एक पूर्व डीजीपी (प्रदेश में पुलिस का सर्वोच्च अधिकारी), मुकेश सहाय की है जिन्होंने सेवामुक्त होने के अगले दिन से ही एक सामान्य से विद्यालय में गणित पढ़ाना शुरू करदिया। आइये जानते हैं उनके इस सलाम करने योग्य कार्य के बारे में।


34 साल पुलिस में रहते हुए की समाज की सेवा और अब बने शिक्षक
मुकेश सहाय बीते 30 अप्रैल को असम के डीजीपी के रूप में सेवामुक्त हुए और उन्होंने अगले ही दिन से गुवाहाटी के भरलुमुख क्षेत्र में स्थित सोनाराम हायर सेकेंडरी स्कूल में बतौर गणित शिक्षक अपनी जिंदगी की दूसरी पारी की शुरुआत करदी। इसके पीछे का कारण यह रहा कि उन्होंने अपने बचपन में शिक्षा को लेकर खुदके संघर्ष को देखा था, सेवा में रहने के दौरान समाज में शिक्षा के स्तर को देखा था और उसके बाद उन्होंने यह ठान लिया था कि वो एक शिक्षक के रूप में भी इस समाज के काम आना चाहेंगे। यह गौरतलब है कि पुलिस सेवा से जुड़ने के पहले मुकेश जी की आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी नहीं हुआ करती थी, जिसके चलते उन्हें एक ट्यूटर के तौर पर कार्य करते हुए पैसे कमाने पड़ते थे।

एक बार विद्यालय में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे और महसूस कि वहां पर अपनी जरुरत
इस विद्यालय में एक बार उनको मुख्य अतिथि के रूप में निमंत्रण प्राप्त हुआ था (वर्ष 2017 में) और जब वो वहां पहुंचे तो वहां के प्रधानाध्यापक, द्विजेन्द्र नाथ बरठकुर ने बताया कि विद्यालय में गणित शिक्षक की कमी होने के कारण वहां पढ़ने वाले विद्यार्थियों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि, "2016 से हमारे पास एक गणित शिक्षक की कमी है, अगर यह कमी दूर हो जाए तो बच्चों का काफी भला हो सकेगा।" उसी पल मुकेश सहाय को लगा कि काश वो खुद वहां पढ़ा पाते तो बच्चों को एक गणित का शिक्षक मिल जाता जिससे उनकी पढ़ाई ढंग से हो पाती। यह सोचते हुए मुकेश जी ने प्रधानाध्यापक से कहा कि, वो विद्यालय में आकर शिक्षक के तौर पर कार्य करने के इच्छुक हैं लेकिन व्यस्तता के चलते ऐसा शायद संभव न हो सके। हालाँकि उन्होंने प्रधानाध्यापक से कहकर विद्यालय में पढ़ाई जाने वाली गणित की पुस्तकों को अपने घर माँगा लिया और उसपर अध्ययन भी किया। उन्होंने प्रधानाध्यापक को इस सम्बन्ध में हल खोजने का भरोसा भी दिलाया था।

सेवामुक्ति की सूचना मिलते ही जाहिर की गणित शिक्षक के तौर पर विद्यालय से जुड़ने की मंशा
मुकेश जी को जब यह मालूम चला कि वो आगामी 30 अप्रैल 2018 को सेवामुक्त होने जा रहे हैं तो उन्होंने विद्यालय के प्रधानाध्यापक से मिलकर विद्यालय के साथ बतौर नियमित गणित शिक्षक जुड़ने की अपनी मंशा जाहिर की। और सेवामुक्ति के अगले दिन यानि कि 1 मई से उन्होंने उस विद्यालय में गणित पढ़ाने की शुरुआत भी करदी। अपनी इस नई पारी के बारे में उनका कहना था कि, "मैंने शिक्षक के तौर पर कभी कार्य नहीं किया है, हालाँकि मै एक पुलिस ट्रेनर रहा हूँ और इस कारण मुझे मदद मिलती है।" उन्होंने यह भी कहा कि, "इन बच्चों को पढ़ने के पहले मै स्वयं कैलकुलस के उन अध्यायों को घर पर दोहराता हूँ। मै समझता हूँ कि सीखने की कोई उम्र नहीं होती है।"

उनके आने से विद्यालय में छाई हैं खुशियां
जहाँ मुकेश जी को समाज के काम आने का एक मौका मिला है, वहीँ बच्चों को उनके रूप में एक बेहतर मार्गदर्शक भी मिला है। उनके बारे में पूछने पर एक विद्यार्थी ने कहा कि, "वो एक साधारण इंसान की तरह हमे पढ़ाते हैं और उनकी यही बात हम सबकी पसंदीदा है।" वास्तव में मुकेश जी के इस कार्य को देखते हुए यही कहा जा सकता है कि न केवल खुदके प्रति, अपने परिवार के प्रति बल्कि समाज के प्रति भी हमारी कुछ जिम्मेदारी बनती है। मुकेश जी के बारे में जानकार ऐसा लगता है कि आज भी समाज में ऐसे लोग हैं जो खुदके लिए न सोचकर दूसरों के भले के लिए सोचते हैं। वो चाहते तो शायद सेवामुक्ति के पश्च्यात एक आरामदायक जीवन बिता सकते थे लेकिन उन्होंने ऐसा न करने का निर्णय लिया और वो आज एक साधारण से विद्यालय में शिक्षक के तौर पर कार्य कर रहे हैं। हम उनके इस नेक कार्य के लिए उन्हें सलाम करते हैं।