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तेज़ाब से जलने का दर्द, अपनों का सितम और फिर इलाज कराने के लिए लाखों का खर्च। आखिर ऐसी स्थिति में किसी के लिए जीना कितना मुश्किल होता होगा, इसका अंदाजा लगाना कठिन नहीं है। अगर वह शख्स ग़रीब हो, तब तो उसके लिए जीना और भी कठिन हो जाता है। लेकिन इसी दर्द और मुश्किल को कम करने का काम कर रहे हैं लखनऊ शहर के कॉस्मेटिक और प्लास्टिक सर्जन डॉ विवेक सक्सेना। विवेक तेज़ाब से जले लोगों का मुफ्त में इलाज करते हैं, उन्होंने तेज़ाब से पीड़ित कई लोगों की मुफ्त में प्लास्टिक सर्जरी करके, उन्हें दोबारा नया जीवन दिया।

एसिड से जले युवक को दिया नया जीवन

डॉ विवेक सक्सेना गोमतीनगर में दिवा क्लिनिक नाम से प्लास्टिक और कॉस्मेटिक सर्जरी का हॉस्पिटल चलाते हैं, डॉ विवेक ने इस सोशल वर्क की शुरुआत तब की, जब उनकी मुलाकात भोपाल के बिलाल से हुई। दिखने में चुस्त दुरुस्त, स्मार्ट नौजवान सा दिखने वाला इकबाल भी एसिड अटैक का शिकार हुआ था, सुनने में अटपटा जरूर लगता है लेकिन ये सच है। इकबाल एक तरफा प्यार का शिकार हुआ था, उस हमले में उसकी आँखें और बाल जल गए थे। डॉ विवेक ने उसका मुफ्त में इलाज किया और उसको आर्टिफिशियल बाल दिए।

जले पर नमक नहीं, मरहम लगाते हैं डॉ विवेक

समाज के जो लोग संवेदनहीन होकर लोगों पर तेज़ाब फेंकते हैं, उसी समाज के संवेदनशील इंसान हैं, डॉ विवेक कुमार सक्सेना। लखनऊ के केजीएमयू से प्रैक्टिस कर चुके डॉ विवेक अभी तक कई तेजाब पीड़ितों का मुफ्त में इलाज कर चुके हैं। केनफ़ोलिओज़ से बातचीत के दौरान उन्होंने बताया कि तेज़ाब पीड़ित के इलाज में कम से कम 15-20 लाख का खर्च आता है। और 8-10 सर्जरीज के बाद घरवाले कर्ज में डूब जाते हैं। इतना ही नहीं वे तेज़ाब पीड़ितों के अलावा लेप्रोजी, कैंसर पेशंट और दृष्टिहीन लोगों का भी फ्री में इलाज करते हैं। तेज़ाब से पीड़ित कविता को प्लास्टिक सर्जरी की मदद से दोबारा सुन्दर सूरत देने का श्रेय डॉ विवेक को ही जाता है। डॉ विवेक ने कविता की एसिड अटैक में जल गयीं आइब्रो बनाई, जिसमें एक लाख रुपये खर्च हुए और बिलाल के हेयर ट्रांसप्लांट में डेढ़ लाख रुपये खर्च हुए।

ऐसे हुई शुरुआत

उन्होंने कहा कि उनके पिताजी भी डॉक्टर थे। उनके एक संबंधी का देहांत सिर्फ इस वजह से हो गया क्योंकि उनके पास इलाज के पैसे नहीं थे। इसी घटना ने उनके जीवन को बदला और उन्होंने जरूरतमंदों का निशुल्क इलाज करना शुरू किया। डॉ विवेक को उनके इस काम के लिए कई जगह सम्मानित भी किया जा चुका है। इतना ही नहीं डॉ विवेक हर साल एसिड अटैक पीड़िता कविता का जन्मदिन भी धूमधाम से मनाते हैं।

डॉ विवेक की इस पहल के बाद देशभर के कई एसिड अटैक पीड़िता उनसे मिल चुकी हैं और अपना इलाज करवा रही हैं। यदि हर कोई डॉ विवेक की तरह सोचने लगे और डॉक्टर को पेशे की तरह न जोड़े तो कोई भी व्यक्ति इलाज के अभाव में दुनिया से नहीं जाएगा। सुना तो था कि डॉक्टर भगवान होते हैं लेकिन डॉ विवेक इस बात का प्रमाण भी हैं।