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हम अक्सर यह सुनते आये हैं की किसी व्यक्ति को अपने जीवन यापन के लिए रोटी,कपडा और मकान जैसी बुनियादी चीज़ों की दरकार होती है।  इन आधारभूत चीज़ों को व्यक्ति के लिए इसलिए भी जरुरी माना जाता है क्यूंकि संभवतः इन मूलभूत जरूरतों के बगैर व्यक्ति के जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती है।  हमारे समाज में समय समय पर तमाम ऐसी मुहीम छेड़ी गयी हैं, जिसके चलते मनुष्य को वो सभी जरूरतें मुहैय्या कराने की कोशिशें की गयी हैं।  फिर भले वो सरकार हो, या समाजसेवी संगठन।  हालाँकि हम इस बात से भी इंकार नहीं कर सकते की हमारे समाज में आज भी लोग भूखे सोने को मजबूर हैं।  ऐसे लोगों की मदद करने के लिए कई सारे समाजसेवक एवं समाजसेवी संगठन अवश्य आगे आये हैं, उनमे से एक हैं केरल राज्य में एर्नाकुलम जिले की निवासी मीनू पॉलिन। मीनू पॉलिन एक ऐसी व्यवसायिका एवं समाजसेविका के रूप में उभरी हैं, जिन्होंने अपनी फलती फूलती नौकरी केवल इसलिए छोड़ दी जिससे वो ऐसे अभियान का नेतृत्व कर सकें जिसके अंतर्गत गरीबों को मुफ्त में भोजन मिल सके और किसी को भी भूखा न सोना पड़े।  उनके जीवन और उनके इस नेक कार्य के विषय में चलिए पढ़ते हैं।

 बैंक में नौकरी छोड़ शुरू की गरीबों को मुफ्त भोजन कराने की मुहिम

मीनू पॉलिन पूर्व में बैंक में नौकरी करती थी, लेकिन कुछ साल पहले वे रेस्त्रां के व्यवसाय से जुड़ीं और समाज में परिवर्तन की रौशनी बिखेरने कि खातिर उन्होंने एक मुहिम कि शुरुआत की। उन्होंने इस मुहिम का नाम रखा 'रेफ्रिजरेटर ऑफ लव'। यानि एक ऐसा फ्रिज जहां किसी को भी मुफ्त में भोजन मिल सकता है।  इस फ्रिज से खाना खाने के लिए व्यक्ति को पैसे की जगह थोड़ी सी दुआ देनी होगी और टिप के नाम पर थोड़ा सा प्यार। मीनू बताती हैं कि उन्होंने इस मुहिम कि शुरुवात कुछ अन्य लोगों के सहयोग से की और आज वो इसे एक सफल अभियान के तौर पर देखती हैं। वो बताती हैं कि उनकी इस मुहिम का मकसद गरीबों को मुफ्त भोजन कराना और समाज में हो रही खाने की बर्बादी को रोकना है। 28 साल की मीनू स्वयं का एक रेस्त्रां चलाती हैं और एर्नाकुलम स्थित कालूर बस स्टैंड के पास उन्होंने यह कम्युनिटी रेफ्रिजरेटर स्थापित किया है़। मीनू जी ने इस फ्रिज को अपने रेस्त्रां के ठीक बाहर एक पेड़ के नीचे रखा है, और इसको 'ननमा मारम' (पुण्य पेड़) का नाम दिया है।
 
फ्रिज वाकई में है ख़ास
'रेफ्रिजरेटर ऑफ लव' नाम से मशहूर यह फ्रिज मीनू जी के रेस्त्रां के ठीक बाहर स्थापित किया गया है। अंदर उनका स्वयं का रेस्त्रां चलता है, जहां संपन्न लोग आते हैं और पैसे देकर भोजन करते हैं और बाहर है यह 420 लीटर का कम्युनिटी रेफ्रिजरेटर जिसमें खाद्य पदार्थ हर वक़्त मुफ्त में खाने के लिए मौजूद रहता हैं। वहां के गरीब और जरूरतमंद लोगों को इस बात कि जानकारी भी है और वे अपनी जरूरत के हिसाब से इस फ्रिज से सामान निकालकर खाते हैं। जब जनवरी, 2014 में मीनू जी ने सिटी बैंक की अपनी नौकरी छोड़ कर खुदका व्यवसाय शुरू करने का सोचा था, उस वक़्त भी उनका इरादा था कि वे अपने व्यवसाय के साथ साथ गरीबों के लिए भी कुछ करना चाहती हैं। इसी कारण के चलते मीनू जी ने इस मुहिम की शुरुआत की। मीनू जी कहती हैं, "हम अक्सर रेस्त्रां जाते हैं और अधिकतर बार ऐसा होता है कि वहां खाना बच जाता है, जो अंत में रेस्त्रां द्वारा फेंक दिया जाता है। मैं खाने की इस बर्बादी को रोकना चाहती थी और इससे अच्छा तरीका नहीं हो सकता था कि मैं बचे हुए खाने को फेंकने के बजाय गरीबों एवं जरूरतमंदों में बाँट दूँ"। उनका मानना है कि ऐसा करके खाने की बर्बादी भी रुकती है और भूखों को खाना भी मिल जाता है। मीनू कहती हैं, इस 420 लीटर के रेफ्रिजरेटर को 24 घंटे चलाने के लिए बिजली का सारा खर्चा उनका रेस्त्रां ही उठाता है़।
 
सुरक्षा-स्वच्छता की भी जांच का है इंतजाम
इस फ्रिज के पास एक सीसीटीवी कैमरा और सुरक्षा गार्ड्स भी तैनात किये गये हैं। इस फ्रिज में कोई भी अपने घर से खाने की सामग्री लाकर रख सकता है, इसके अलावा इस फ्रिज में रेस्त्रां में बचा हुआ साफ खाना भी रखा जाता है।  फ्रिज में रखे खाने को सिर्फ गरीब एवं जरूरतमंद लोग ही खा सकते हैं।  इस अभियान में मीनू जी के साथ और भी लोग जुड़े हैं जो इस मुहिम को सफल बनाने में उनकी मदद कर रहे हैं, मीनू जी की मानें तो इस रेफ्रिजरेटर में रोजाना 50 से 100 पैकेट खाना रखा जाता है। उन्होंने अलग अलग रेस्त्रां मालिकों से भी बचा हुआ खाना इस फ्रिज में लाकर रखने कि मांग कि है़। इसके अलावा स्वच्छता के लिहाज से इस फ्रिज को हर तीसरे दिन साफ किया जाता है। आज के इस दौर में मीनू जी द्वारा चलित ऐसी मुहिम काबिले तारीफ है, जिससे खाना भी बर्बाद नहीं होता और गरीबों की भूख भी मिटती है। मीनू जी की इस मुहिम को हम सलाम करते हैं और यह उम्मीद करते हैं कि मीनू जी की इस मुहिम में लोग उनके साथ जुड़ते जायेंगे और समाज में गरीब एवं जरूरतमंद लोगों के लिए इसी प्रकर से बेहतर कार्य होता रहेगा।