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वर्तमान समाज में महिलाओं के प्रति बढ़ते हुए अपराध निश्चित ही चिंता का विषय है। इसके समाधान के बारे में विचार करें तो एक शब्द जो अपराध का विपरीतार्थक मन में कौंधता है तो वह है ‘खौफ’। जैसे आम जनता को अपराधियों का खौफ होता है वैसे ही अपराधियों को भी यदि पुलिस का खौफ हो तो अपराध के स्तर में अवश्य कमी आएगी। इसके लिए जरूरी है आम जनता की शिकायतों पर पुलिस द्वारा गंभीर एक्शन लिया जाना। जिसका जीता जागता उदाहरण प्रस्तुत किया है आईपीएस ऑफिसर ज्योतिप्रिया सिंह ने। 

मशहूर आईपीएस महिला ऑफिसर ज्योतिप्रिया सिंह कद में 6 फीट लंबी हैं और उन्हें एक दबंग ऑफिसर के रूप में जाना जाता है। पुणे में इस समय डिप्टी कमिश्नर के पद पर तैनात ज्योतिप्रिया मनचलों के खिलाफ सख्त एक्शन लेने के लिए जानी जाती हैं। जिस क्षेत्र में ज्योति प्रिया सिंह की तैनाती होती है वहां के मनचलों की तो मानो शामत ही आ जाती है। कोल्हापुर में एसपी के पद पर तैनात रहते हुए उन्होंने शिवसेना की एमएलए और उसके समर्थकों पर लेडी पुलिस अफसर पर छेड़छाड़ का केस दर्ज करवा कर सकते में डाल दिया था। गणेश विसर्जन के दौरान लेडी पुलिस ऑफिसर पर जूता फेंकने की घटना और पुलिस से लाठी छीन कर उस पर हमला करने की घटना को इन्होंने गंभीर रूप से लिया और इस घटना में शामिल लोगों पर एक्शन लिया था। राजनीतिक दबाव होने के बावजूद भी उन्होंने अपना केस वापस नहीं लिया। बस यहीं से ज्‍योतिप्रिया की छवि लेडी सिंघम के रूप में लोगों की नजरों में आई। 

लखनऊ में जन्‍मीं ज्योति प्रिया ने लखनऊ यूनिवर्सिटी से एमएससी जूलॉजी में की है। उनके पिता रणवीर सिंह 35 वीं बटालियन के कमांडर थे और उनकी मां महिला कॉलेज में प्रोफेसर के पद पर हैं। ज्योतिप्रिया 2008 बैच की आईपीएस ऑफिसर है उंनका सपना तो आईएएस बनने का था लेकिन यूपीएससी की परीक्षा में रैंक के अनुसार उन्हें आईपीएस बनना पड़ा। जालना में अपने 3 साल के कार्यकाल में उन्होंने अवैध धंधे तो बंद करवाए ही अपराध के स्‍तर में भी यहां काफी कमी आई थी। कोल्हापुर में एडिशनल एसपी  की पोस्ट के दौरान जब कुछ लड़कियों ने ज्योति प्रिया को मनचले लड़कों की शिकायत की तो उन्होंने एक विशेष ऑपरेशन के तहत सिविल ड्रेस में बाइक पर घूम घूम कर एक दिन में ही 80 से ज्यादा मनचलों को गिरफ्तार कर उनकी पिटाई भी की और उनके परिवार वालों को भी उनकी हरकतों के बारे में जानकारी दी थी। उस समय ज्योतिप्रिया सोशल मीडिया में काफी चर्चा में आ गई थीं। 

90  प्रतिशत  आम जनता जो अपराध से छुटकारा पाना चाहती है उन 90 प्रतिशत लोगों के लिए ज्‍योतिप्रिया काम करती हैं बाकी 10 प्रतिशत जो उनके काम से नाखुश होते हैं वह लोग हैं जो किसी न किसी रूप में अपराधों में लिप्त रहते हैं जिनकी वह बिल्कुल परवाह नहीं करती हैं। 

अधिक से अधिक महिला पुलिस अफसरों की तैनाती  महिलाओं के प्रति बढ़ते अपराधों को कम करने में काफी हद तक सहयोग कर सकती है।