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साधारण से दिखने वाली मिट्टी जब कुम्‍हार के हाथों किसी आकार में ढलती है तो बहुत से रूपों में प्रयोग होती है। मिट्टी तो वही होती है कुम्‍हार के द्वारा दिया आकार ही उसके भविष्य को निर्धारित करता है। ठीक वैसे ही बच्चे के जन्म से लेकर बड़े होने तक माता-पिता, गुरु द्वारा उसके व्यक्तित्व का निर्माण होता है। एक छोटी सी गलती भी उसके जीवन की दिशा को बदल सकती है। हमारी आज की कहानी एक ऐसी लड़की की है जिनके माता-पिता की एक गलती उसकी जिंदगी तबाह कर सकती थी लेकिन उसने इसके खिलाफ़ आवाज़ उठाई और आज एक प्रेरक व्यक्तित्व के रूप में हमारे सामने खड़ी हैं।

बी. अनुषा के जीवन में भी बहुत बड़ी गलती उसके मां-बाप द्वारा होने जा रही थी लेकिन सही समय पर पुलिस द्वारा कार्यवाही करने पर जहां एक तरफ उनका जीवन तबाह होने से बचा, वहीं दूसरी ओर उसने अपने अंदर छिपी प्रतिभा को पहचानते हुए एक सफल खिलाड़ी के रूप में उभरकर पूरे देश के सामने आ पाई।

16 साल की अनुषा जो दसवीं कक्षा की छात्रा हैं, उसके परिवार वाले उसकी शादी 26 साल के एक लड़के से अप्रैल 2017 में करवाना चाहते थे। लेकिन जिले में कार्यरत एक स्वयंसेवी संस्था ने पुलिस के साथ मिलकर उनके विवाह को रूकवाने की कार्यवाही की। अनुषा का झुकाव बचपन से किक्रेट की तरफ था।

अभी हाल ही में इंटर स्‍कूल क्रिकेट प्रतियोगिता का आयोजन मध्यप्रदेश में किया गया था जिसमें अनुषा ने बतौर ऑलराउंडर प्रदर्शन करके सभी का दिल जीत लिया। राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता के बाद अब रग्‍बी टूर्नामेंट में भाग लेने की तैयारी भी वह कर रही हैं।

आपकी जानकारी के लिए बताना चाहते हैं कि चाइल्ड मैरिज एक्ट 2006 के अनुसार 18 वर्ष से कम उम्र की लड़की और 21 साल से कम उम्र के लड़के की शादी को कानूनी तौर पर 2 साल की सजा और एक लाख रुपए के जुर्माने का प्रावधान है लेकिन विडंबना यह है कि लोग अन्य परिवारों द्वारा ऐसा करने पर भी पुलिस में शिकायत नहीं करते हैं। अनुषा के केस में भी स्वयंसेवी संस्था के दखल से ऐसा संभव हो पाया।

बाल विवाह का दुष्परिणाम व्यक्ति, परिवार को ही नहीं बल्कि समाज और देश को भी भुगतना पड़ता है। दरअसल यह कुप्रथा आज भी देश के कई हिस्सों में जारी है। विवाह के पश्‍चात् माँ-बाप कन्‍या को शिक्षा से वंचित कर देते है और उस कन्‍या के लिए जीवन नर्क के समान हो जाता है। बाल-विवाह एक सामाजिक समस्या है और इसका अंत बेहद जरूरी है।

इसका निदान सामाजिक जागरूकता से ही सम्भव है। आज युवा वर्ग को आगे आकर इसके विरूद्ध आवाज़ उठानी होगी और अपने परिवार व समाज के लोगों को इस कुप्रथा को खत्‍म करने के लिए जागरूक करना होगा। 

अनुषा समाज के सामने एक जीवंत उदाहरण है और इस बात का प्रमाण कि यदि बेटियों को सपोर्ट किया जाए तो वह पूरी दुनिया के सामने अपनी काबिलियत को प्रदर्शित करने की ताकत रखती है।