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तनाव और बीमारी के चलते नौकरशाहों की आत्महत्या का मामला आये दिन हमें देखने को मिलते रहते हैं। छोटे-छोटे कारणों से आत्महत्या के मामले लगभग रोजाना सुनने को मिल ही जाते हैं, जो परिस्थितियों से हार मान कर या तो जीवन को खत्म करने का निर्णय ले लेते हैं या अपने लक्ष्य को पाने का इरादा बीच में ही छोड़ देते हैं। 

लेकिन आज की कहानी है आईएएस ऑफिसर अमन गुप्ता के बारे में जिनका व्यक्तित्व ऐसे लोगों के लिए मिसाल है। आंखों की लाइलाज बीमारी को दरकिनार कर आईएएस ऑफिसर अमन गुप्ता ने मानो नियति को ही चुनौती दी है। अमन एजीएमयूटी (अरुणाचल प्रदेश-गोवा-मिजोरम-केंद्र शासित प्रदेश) कैडर के 2013 बैच के आईएएस अधिकारी हैं। 

जब अमन 12वीं कक्षा में थे तो मोटरसाइकिल चलाना उन्हें बहुत पसंद था। इसी दौरान उन्हें कंप्यूटर का कर्सर दिखना बंद हो गया उसके बाद हवा में क्रिकेट बॉल और कुछ दिनों बाद ही क्लास के ब्लैकबोर्ड पर अक्षरों का दिखना भी बंद हो गया 2002 में ऑल इंडिया मेडिकल इंस्टिट्यूट के डॉक्टर्स ने बताया कि उन्हें जुवेनाइल मैकुलर डीजनरेशन है। इस बीमारी में धीरे-धीरे मरीज को 90 फी़सदी तक दिखाई देना बंद हो जाता है। बावजूद इसके आईआईएम से बीटेक करने के बाद अमन ने 2012 में यूपीएससी सिविल सर्विस की परीक्षा की तैयारी ऑडियो बुक्स के माध्यम से की। सफलता नहीं मिलने पर भी हिम्मत ना हारते हुए उन्होंने 2013 में कड़ी मेहनत की और इस बार पूरे भारत में 57 वीं रैंक हासिल की। 

अमन की आंखे अब इतनी कमजोर हो चुकी है कि वह लोगों को चेहरे के फीचर्स के आधार पर भी नहीं पहचान पाते हैं।सामान्य व्यक्ति से 200 गुना अधिक समय उन्हें अमेरिकन वीडियो मैगनीफायर से पढ़ने में लग जाता है, फिर भी उनकी टेबल पर अगले दिन के लिए कोई काम पेंडिंग नहीं होता, यह अमन की कर्मठता और कठिन परिश्रम का परिचायक है। 

स्वच्छता सर्वेक्षण 2018 में दक्षिणी दिल्ली नगर निगम की रैंकिंग में सुधार पर काम करने वाले अमन ने निगम में 30 साल से लंबित पड़े नियुक्ति नियमों को अंतिम आकार देकर सैकड़ों कर्मियों के प्रमोशन का रास्ता आसान बनाया। फिलहाल अमन के पास तीन महत्वपूर्ण पद हैं डायरेक्टर पर्सनेल, डायरेक्टर एजुकेशन और एसडीएमसी कमिश्नर सचिव। इससे पहले वह वैस्‍ट जोन के डिप्टी कमिश्नर और दिल्ली सरकार में चाणक्यपुरी के एसडीएम पद पर आसीन थे। दिल वैस्‍ट जोन में कई बार अधिकारी जानबूझकर मीटिंग हॉल छोड़ कर निकल जाते थे लेकिन जब अमन को पता चलता तो उन अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी हो जाता था। एक बार अमन को दृष्टि बाधित होने के कारण सामने वाले अधिकारी के हाथ मिलाने का पता नहीं चल पाया जिस पर उस अधिकारी को अपमानित महसूस हुआ लेकिन अमन गुप्ता की बीमारी के बारे में जानकर वह बहुत अभिभूत हो गए। 

अमन गुप्ता अपनी कार्यकुशलता के बल पर 600 स्कूलों में पढ़ रहे ढाई लाख विद्यार्थियों की जिम्मेदारी को भलीभांति संभाल रहे हैं। असंभव को संभव कर दिखाने वाले अमन की आंखों से रोशनी चाहे दूर चली गई है लेकिन उनकी जीवन शैली का उदाहरण मानसिक तनाव से ग्रस्त समाज को रोशनी की राह पर ले जा सकता है।